Hindi 2 Meaning

बॉलीवुड में भाई भतीजावाद | Nepotism in Bollywood Meaning in Hindi

हाल ही में 12 अगस्त 2020 को सड़क 2 मूवी का ट्रेलर रिलीज हुआ।

यूट्यूब पर इस ट्रेलर के लाइक 10 लाख भी नही हुए जबकि डिसलाइक 1 करोड़ के करीब पहुँचने वाले हैं।

इक्का-दुक्का वीडियोज को छोड़ दिया जाए तो अमूमन यूट्यूब वीडियोज पर लाइक की संख्या डिसलाइक से ज्यादा ही रहती है।

वहीं आज तक किसी भी बॉलीवुड मूवी के साथ ऐसा नही हुआ है; जबकि सड़क 2 का ट्रेलर रिलीज होते ही भारतीय सर्कल में यूट्यूब की सबसे ज्यादा डिसलाइक की जाने वाली वीडियो बन गई।

लेकिन ऐसा हुआ क्यों; आइए जानने की कोशिश करते हैं...

दरअसल इसके पीछे वजह है नेपोटिज्म (नेपोटिज्म का हिंदी में अर्थ होता है भाई-भतीजावाद। जब कोई व्यक्ति अपने अधिकार या प्रभाव का प्रयोग कर परिवार के सदस्‍यों को अनुचित लाभ पहुँचाता है तो इसे नेपोटिज्म कहा जाता है)

बॉलीवुड में नेपोटिज्म खुलेआम होता है जहां एक परिवार जो बॉलीवुड में सफल है उसकी संताने ही आगे चलकर फिल्मों में अभिनय करती हैं।

अर्थात ये परिवार अपने प्रभाव का फायदा उठाते हुए के बॉलीवुड को अपने बच्चों के लिए आरक्षित रखने का काम करते हैं।

इसलिए भारत की सबसे बड़ी इंडस्ट्री होने के बावजूद बॉलीवुड कुछ विशेष लोगों के समूह के शिकंजे में है। बॉलीवुड में होने वाले नेपोटिज्म पर हजारों आर्टिकल्स लिखे जा चुके हैं।

सड़क 2 मूवी में आलिया भट्ट का होना नेपोटिज्म का प्रभाव माना जा रहा है; क्योंकि आलिया भट्ट महेश भट्ट की बेटी हैं (महेश भट्ट बॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर्स में से एक हैं)

हालांकि नेपोटिज्म प्रत्येक कार्यक्षेत्र में होता है; यद्द्पि मल्टी-नेशनल कंपनी इससे बचने के लिए कुछ नियम लागू करती हैं जो सराहनीय है लेकिन पारिवारिक रूप से स्थापित किए गए छोटे उद्योगों (MSMEs) में इसका प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है।

लेकिन बॉलीवुड में नेपोटिज्म ज्यादा बड़ा मुद्दा इसलिए है क्योंकि बॉलीवुड देश के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है किसी भी देश में बनने वाली फिल्में उस देश के समाज का आईना होती हैं ठीक ऐसे ही भारतीय समाज को बॉलीवुड के जरिए पर्दे पर उतरता हुआ देखा जा सकता है।

ऐसे में बॉलीवुड पर भारत के सभी लोगों का हक होना चाहिए तथा इसे एक पैसा कमाने का स्त्रोत मानने की बजाए देश के नए टैलेंट को निखार कर पर्दे पर उतारने का स्त्रोत माना जाना चाहिए।

इसीलिए बॉलीवुड में किसी परिवार या मुठ्ठीभर लोगों के समूह का वर्चस्व होना देश की विविधता व टैलेंट दोनों के लिए खतरा है।

कुछ बाहरी लोग (जिनका परिवार बॉलीवुड से संबंधित नही रहा है) ऐसे हैं जिन्होंने बॉलीवुड में अपने दम पर पहचान बनाई है जैसे कि कंगना रनौत।

ऐसे लोगों का अनुभव हमें बॉलीवुड में हो रहे नेपोटिज्म के बारे में बता सकता है। कंगना रनौत ने एक इंटरव्यू के दौरान डारेक्टर करण जौहर को बॉलीवुड नेपोटिज्म का फ।्लैग बियरर (ध्वजधारक) कहा। कंगना के अनुसार करण जौहर केवल स्टार किड्स को ही लांच करते हैं।

स्टार किड्स यानी कि ऐसे लोगों की संतानें जो पहले से ही बॉलीवुड में सफल हैं; इन्ही स्टार किड्स के लिए बॉलीवुड की कुछ खास फिल्में एक तरह से आरक्षित रखी जाती हैं।

और इस बात को झुठलाया भी नही जा सकता क्योंकि हम आज बहुत से स्टार किड्स को एक अभिनेता या अभिनेत्री के रूप में देख सकते हैं हालांकि कुछ स्टार किड्स ऐसे हैं जिसके टैलेंट को दरकिनार नही किया जा सकता लेकिन फिर भी भारत में जो टैलेंट का अंबार है जो बॉलीवुड के जरिए नए तरीके से लोगों का मनोरंजन करने हेतु ललाहित है उसकी तुलना कुछेक ऐसे परिवार की संतानों से करना जिनका बॉलीवुड में प्रभाव है; किसी भी तरीके से जायज नही माना जा सकता।

हाल ही में अपने दम पर बॉलीवुड में पहचान बनाने वाले सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून 2020 को कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली (जिसकी पुष्टि हेतु जाँच चल रही है) जबकि सुशांत अपने सकेमय में एक पढ़ा-लिखा होनहार विद्यार्थी रहा था तथा देश के बड़े मुद्दों पर गहन जानकारी रखता था।

इसके लिए बॉलीवुड के नेपोटिज्म को वजह माना गया; सफल अभिनेता होने के बावजूद भी बॉलीवुड उन्हें एक्सेप्ट करने में असफल रहा। कथित तौर पर बॉलीवुड के लोगों के इसी व्यवहार ने सुशांत को आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर किया।

यदि यह बात सच है कि नेपोटिज्म ने ही सुशांत सिंह राजपूत को मौत के मुँह में धकेला है तो बॉलीवुड की फिल्मों को चाहने वालों और बॉलीवुड में पहचान बनाने का सपना देखने वालों के लिए इससे भयानक सदमा कोई ओर नही हो सकता।

लोगों में अब बॉलीवुड की जड़ में दशकों से बैठे नेपोटिज्म को लेकर गुस्सा है जो हाल ही में सड़क 2 के ट्रेलर के डिसलाइक्स के रूप में हमै देखने को मिला जहां करीब 1 करोड़ लोगों ने इस मूवी को नेपोटिज्म की उपज माना और डिसलाइक कर अपनी नाराजगी जाहिर की।

15 अगस्त पर निबंध | 15 August Essay in Hindi

आप सभी को आने वाले स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की हार्दिक शुभकामनाएं।

पिछली वीडियो में हमने 15 अगस्त पर दिए जाने वाले भाषण के बारे में जाना था। इस वीडियो में हम 15 अगस्त पर लिखे जाने वाले निबंध की बात करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं।

15 अगस्त पर निबंध इस प्रकार है :

प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त का दिन स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन 15 अगस्त 1947 को हमारा देश ब्रिटिश राज से आजाद हुआ था।
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यह दिवस सम्पूर्ण भारत में पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन देश में सार्वजनिक अवकाश होता है।

स्कूलों व अन्य संस्थानों में तिरंगा फहराया जाता है मुख्यथिति के तौर पर गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है। स्कूलों में स्थानीय गणमान्य व्यक्ति इस दिवस पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस मौके पर मिठाईयां बांटी जाती है और पूरे जोश से आजादी का जश्न मनाया जाता है।

देश के राष्ट्रपति द्वारा 15 अगस्त से एक दिन पूर्व देश को संबोधित किया जाता है जिसे 15 अगस्त के दिन टीवी, रेडियो व अन्य माध्यमों से टेलीकास्ट किया जाता है।

15 अगस्त के दिन देश के प्रधानमंत्री लालकिले पर झंडा फहराते हैं तथा देश को संबोधित करते हैं। भाषण के जरिए प्रधानमंत्री बीते वर्ष देश द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों की जानकारी देते हैं तथा आगे के लक्ष्य के बारे में बात करते हैं।

इस दिन राजपथ पर महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में राजपथ पर सैन्य बलों, अर्धसैनिक बलों, NCC कैडेट्स तथा सेना की विशेष टुकड़ियों द्वारा परेड की जाती है व देश की सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया जाता है।

इस पूरे कार्यक्रम का प्रधानमंत्री के भाषण व परेड सहित लाल किले से डीडी नेशनल व ऑल इंडिया रेडियो के माध्यम से सीधा प्रसारण किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।

इस दिन देश भर में देशभक्ति गीत गूंज रहे होते हैं, लोग रैलियां निकाल कर देशभक्ति के नारे लगाते हैं, हर ओर तिरंगे के रंग फैले होते हैं।

राज्य व स्थानीय स्तर पर मुख्यमंत्रियों, सांसदों, पार्षदों तथा विधायकों द्वारा स्थानीय कार्यक्रमों में शिरकत की जाती है; प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं तथा जीतने वालों को उचित इनाम देकर सम्मानित किया जाता है।

यह दिवस हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने अपने प्राणों का ।बलिदान देकर देश को आजादी दिलवाई। इस दिन हम अपने शूरवीरों को विभिन्न माध्यमों के जरिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना नई पीढ़ी में भारत के इतिहास के महत्व का प्रसार करता है तथा हमें आजादी के सही मायने समझाता है।

15 अगस्त पर भाषण | 15 August Speech in Hindi

वो सभी विद्यार्थी जो हिंदी 2 मीनिंग के सब्सक्राइबर्स हैं; उनके लिए स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी कुछ विशेष वीडियोज आने वाले कुछ दिन आपको लगातार मिलती रहेंगी। हालांकि लॉकडाउन के चलते विद्यालय व कॉलेज बंद है लेकिन फिर भी यदि ऑनलाइन स्तर पर या अन्य तरीके से आपको 15 अगस्त स्पीच देने के लिए बुलाया जाए तो उसके लिए आप इस वीडियो के स्क्रीन शॉट्स ले सकते हैं; इस वीडियो में आसान, सरल व सटीक भाषा में 15 अगस्त की स्पीच उपलब्ध है। इसके साथ ही हम स्पीच देने का सही तरीका भी आपको समझाएंगे तो चलिए शुरू करते हैं।

तो स्पीच देने का सही तरीका इस प्रकार है...

सबसे पहले आप स्टेज पर जाएं... सबको प्रणाम करें... भारत माता की जय और वन्दे मातरम बोलें...

उसके बाद शुरू करें...

यहां मौजूद अतिथिगण, अध्यापकगण व मेरे प्रिय सहपाठियो आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं...

आज स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर मुझे आप सब के सामने बोलने का अवसर मिला इसके लिए मैं खुद को सम्मानित महसूस कर रहा/ रही हूँ...

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है; क्योंकि इसी दिन हमें पूर्ण रूप से स्वतंत्रता मिली थी।

हमारे देश की बागडोर सदियों बाद विदेशियों से छूटकर हमारे अपने हाथों में आई थी। लेकिन हमने आजादी का दिन ऐसे ही नही देखा यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, साहस और बलिदान का परिणाम था। इसीलिए उस संघर्ष, साहस और बलिदान को याद करने और महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए हम प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के शुभ अवसर पर एकत्रित होते हैं और अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं। इस आजादी के लिए हमें अपने उन शूरवीरों को कभी नही भूलना चाहिए जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए।

हम आज दिन इस शुभ अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह, महान स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद और अनेकों-अनेकों शूरवीरों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने देश की आजादी को अपने रक्त और प्राणों से सींचा है।

15 अगस्त का दिन भारत की ब्रिटिश राज से मुक्ति का ही प्रतीक नही है बल्कि यह हम सब भारतीयों की एकता का भी प्रतीक है। यह हमें स्मरण दिलाता है कि यदि हम सब एक हो जाएं तो दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत भी हमारे सामने नतमस्तक हो जाएगी।

आज हमारे प्रधानमंत्री देश के लालकिले पर तिरंगा फहरा रहे हैं यह पल अपने आप में गौरवान्वित करने वाला है। इसी लहराते तिरंगे की छाया में हमारा देश विकास की ओर अग्रसर रहे इसके लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए। हमारा प्यारा देश भारत प्रत्येक वर्ष विकास के कई नए कदम पार कर लेता है हमारा यह कर्तव्य है कि विकास की इस रफ्तार को तेज करने में हम निरंतर सहयोग करें।

बीते दशकों में हमने अपने देश की विविवधा, अखंडता, एकता, संस्कृति और संप्रभुता को बरकरार रखते हुए प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति को प्राप्त किया है। चाहे वो कृषि हो, उद्योग जगत हो, प्रौद्योगिकी हो या अंतरिक्ष की नई उड़ान प्रत्येक क्षेत्र में हम वैश्विक शक्ति बनकर उभर रहे हैं। आज हमारी पहुँच चंद्रमा को पार करते हुए मंगल ग्रह तक है; और जल्द ही हम इनकी सतहों को छू कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

हमारी सेना के जवान दिन रात सीमा पर तैनात हैं इसीलिए हम रातों को चैन से सो पाते हैं हमारा पेट भरने वाले किसानों और हमारी रक्षा करने वाले जवानों के लिए जय जवान जय किसान का नारा दोहरा कर हमें अपना सम्मान प्रकट करना चाहिए।

आप सबने इस भव्य दिवस पर मेरे विचार सुने और मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिए मैं आप सब को दिल से धन्यवाद देते हुए अपना भाषण समाप्त करता हूँ; जय हिंद... वंदे मातरम...

इसके बाद आप हाथ जोड़ कर तीन ओर झुक कर प्रणाम करें पहले सीधी ओर, फिर स्टेज से उतरने की ओर, तथा अंत में उस ओर जिस तरफ आप चलकर आए थे...

और इस तरह स्पीच समाप्त कर आप अपनी सीट पर जाकर बैठ जाएं...

स्पीच देते समय निम्न बातों का ध्यान रखें...

1). कागज में कम से कम देखने की कोशिश करें।

2). एक-दो गलती चल सकती है लेकिन बार-बार गलती करना अच्छी स्पीच नही मानी जाती।

3). इसलिए हो सके तक शीशे के सामने खड़े होकर स्पीच का अभ्यास अवश्य कर लें।

4). कोई शब्द कठिन लगे तो उसके स्थान पर उसका पर्यायवाची (यदि तर्कसंगत हो तो) प्रयोग करना उचित रहता है।

5). स्टेज पर आते ही हाथ जोड़ कर प्रणाम करें व जाने से पहले भी यही प्रक्रिया दोहराएं इसके बिना आपकी स्पीच असभ्य मानी जाती है।

कार्डियक अरेस्ट क्या होता है | Cardiac Arrest Meaning in Hindi

हाल ही में प्रसिद्ध उर्दू शायर राहत इंदौरी की कार्डियक अरेस्ट के चलते मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के साथ ही कार्डियक अरेस्ट के बारे में बात की जाने लगी। इस बीमारी का नाम हमें अक्सर सुनने को मिलता है। दुनिया को हरा देने वाले बहुत से दिग्गज कार्डियक अरेस्ट से हार जाते हैं हार्ट अटैक जैसी दिखने वाली यह बीमारी दरअसल हार्ट अटैक से कई मायनों में अलग है। आइए इस बीमारी को समझने की कोशिश करते हैं।

दरअसल कार्डियक अरेस्ट को हिंदी में
" पूर्णहृदरोध " कहा जाता है।

इसे कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट या सर्कुलेटरी अरेस्ट के नाम से भी जाना जाता है।

हमारा हृदय लगातार रक्त को पंप करने का काम करता है ताकि शरीर में रक्त प्रवाह बना रहे।

लेकिन जब हृदय अकस्मात ही सही ढंग से कार्य करना बंद कर दे तो रक्त का संचरण अचानक से ठहर जाता है इसी स्थिति को कार्डियक अरेस्ट या पूर्णहृदरोध कहा जाता है।

कार्डियक अरेस्ट हृदयघात (हार्ट अटैक) से अलग है क्योंकि हार्ट अटैक में जहां हृदय की मांसपेशियों में रक्त बाधित हो जाता है वहीं कार्डियक अरेस्ट में हृदय की गति ही रूक जाती है। यद्द्पि हार्ट अटैक आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकता है।

कार्डियक अरेस्ट के कारण रुका हुआ रक्त संचार शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर देता है जिसकी वजह से मस्तिष्क में भी ऑक्सीजन की कमी हो जाती है इससे चेतना का लोप होने लगता है जिसके परिणाम स्वरूप सांस लेना असामान्य हो जाता है या बंद हो जाता है और व्यक्ति बेहोशी की हालत में जाने लगता है।

कार्डियक अरेस्ट दो शब्दों से मिलकर बना है पहला शब्द है कार्डियक (अर्थात हृदय से संबंधित); तथा दूसरा शब्द है अरेस्ट (अर्थात अवरुद्ध करना) इस प्रकार जो हृदय से संबंधित क्रियाओं को अवरुद्ध करे उसे कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है।

कार्डियक अरेस्ट के चलते होने वाली मृत्यु को सडन कार्डियक डेथ (Sudden Cardiac Death) - हृदय गति अचानक रूकने से होने वाली मृत्यु - कहा जाता है।

मनुष्य के हृदय में एक आंतरिक विद्युत प्रणाली होती है जो हृदय की धड़कनों की लय को बनाए रखती है उस आंतरिक विद्युत प्रणाली में डिस्टर्बेंस होने पर हृदय के रक्त पंपिंग कार्य में बाधा पड़ती है। यही बाधा कार्डियक अरेस्ट कहलाती है।

कार्डियक अरेस्ट होने पर तुरंत मेडिकल सहायता की आवश्यकता होती है अन्यथा व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।

कार्डियक अरेस्ट की ऐसी स्थिति जिसमें कोई भी आंतरिक विद्युतीय गतिविधि ना हो रही हो और हृदय धड़कना बंद कर दे; तो इस स्थिति को एसिटोल कहा जाता है।

वहीं कार्डियक अरेस्ट की ऐसी स्थिति जिसमें आंतरिक विद्युतीय गतिविधि असामान्य हो जाती है जो दिल की धड़कने बनने में अड़चन पैदा करती है; इस स्थिति को वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन कहा जाता है।

वहीं हृदय के पूरी तरह से बंद हो जाने की स्थिति को कंप्लीट हार्ट ब्लॉक कहा जाता है।

गतिहीन जीवनशैली, उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, मधुमेह, नशा इत्यादि कार्डियक अरेस्ट के लिए उत्तरदायी हैं (कोलेस्ट्रॉल मनुष्यों के रक्त में पाया जाने वाला एक पदार्थ होता है जो हार्मोन्स, विटामिन डी व ऐसे सब्सटांस बनाने में सहायता करता है जो भोजन पचाने हेतु आवश्यक होते हैं; कोलेस्ट्रॉल का आवश्यक्ता से अधिक हो जाना ह्रदय संबंधी बीमारियां पैदा करता है)

बेंगलुरु हिंसा क्यों हुई थी ?

हाल ही में बेंगलुरु में साम्प्रदायिक हिंसा का मामला देखने को मिला।

पुलिस के अनुसार - इस हिंसा के भड़कने की शुरुआत उस समय हुई कर्नाटक (कांग्रेस) के एक MLA अखंड श्रीनिवास मुर्थी के भतीजे नवीन द्वारा फेसबुक पर पैगम्बर मोहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट की गई।

इस पोस्ट से समुदाय विशेष के लोगों की भावनाएं आहत हुई जिस कारण लोगों ने MLA के घर के बाहर एकत्रित होना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार धीरे-धीरे MLA के घर के बाहर 1000 से अधिक लोग एकत्रित हो गए और उन्होंने MLA के घर (जो कि बेंगलुरु के पुलकेशी नगर में स्थित है) पर हमला कर दिया।

इस हमले में MLA के घर पर तोड़ फोड़ की गई तथा आसपास खड़ी गाड़ियों को जलाने की कोशिश की गई।

इसके बाद गुस्साई भीड़ MLA के भतीजे नवीन की गिरफ्तारी की माँग लेकर पुलिस स्टेशन पहुँची।

इसके बाद भीड़ द्वारा दो पुलिस स्टेशन - केजी हाली और डीजे हाली पर पथराव किया गया।

फलस्वरूप पुलिस ने ओपन फायर जिसमें तीन लोगों की मृत्यु हो गई।

शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हिंसा में 60 पुलिस कर्मी घायल हुए तथा 03 लोगों की मृत्यु हो गई।

इसके बाद पुलिस द्वारा नवीन को गिरफ्तार कर लिया गया; नवीन के बयान के अनुसार उसका फेसबुक एकाउंट हैक कर यह आपत्तिजनक पोस्ट की गई थी ताकि साम्प्रदायिक हिंसा भड़काई जा सके।

इस मामले में भीड़ में सम्मिलित 149 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

आगे किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने के लिए प्रभावित क्षेत्र (जो कि बानसवाड़ी पुलिस सब-डिवीजन) में कर्फ्यू तथा धारा 144 लागू कर दी गई है।

फिलहाल इस मामले में जाँच चल रही है तथा समय के साथ अन्य तथ्य सामने आते रहेंगे।

डॉ. मनमोहन सिंह के तीन सुझाव

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री व दिग्गज अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हाल ही में बीबीसी से ईमेल के जरिए बातचीत की; जिसमें उन्होंने कोरोना के कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए तीन सुझाव दिए।

डॉ. मनमोहन सिंह के सुझाव इसलिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि वर्ष 1991 में जब देश की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर खड़ी थी उस समय देश में किए गए बड़े आर्थिक सुधारों में उनका मुख्य योगदान था।

उन्होंने ही उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण सहित अन्य सुधारों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को देखते ही देखते नई गति प्रदान कर दी थी।

अब जब कोरोना के चलते विश्व के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था भी अपने बुरे दौर से गुजर रही है तो डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा बीबीसी के जरिये देश की सरकार को दिए गए तीन सुझावों पर पूरे देश को गौर करना चाहिए। ये तीन सुझाव इस प्रकार हैं :

पहला सुझाव : सरकार को लोगों को आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए तथा यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों की नगदी रकम के जरिए सहायता की जाए ताकि लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा हो।

दूसरा सुझाव : सरकार को कारोबारों के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध करवानी चाहिए इसके लिए सरकार समर्थित क्रेडिट गारंटी प्रोग्राम चलाया जाना चाहिए।

तीसरा सुझाव : सरकार को सांस्थानिक स्वायत्तता तथा प्रक्रियाओं के जरिए वितीय क्षेत्र की समस्याओं को हल करना चाहिए।

इन तीन सुझावों के साथ ही डॉ. सिंह ने कहा कि 1991 की आर्थिक मंदी घरेलू थी जबकि आज पूरा विश्व इसकी चपेट में है इसलिए यह व्यापक और असाधारण है।

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान भी पूरी दुनिया इस तरह एकसाथ बंद नही हुई थी जैसा कि कोरोना समय में हुआ है।

डॉ. मनमोहन सिंह के इन तीन सुझावों पर मीडिया क्षेत्र के लोगों तथा अर्थशास्त्रियों द्वारा गहन मंथन शुरू हो चुका है।

हो सकता है आने वाले समय में सरकार द्वारा आर्थिक क्षेत्र में उठाए जाने वाले कदमों में डॉ. सिंह के सुझावों का प्रभाव देखने को मिले।

दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन : स्पुतनिक V

हाल ही में रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन को रेजिस्टर करवाया है।

इस वैक्सीन का नाम रूस ने अपने प्रथम उपग्रह स्पुतनिक के नाम पर "स्पुतनिक V" रखा है।

गौरतलब है कि रूस का पहला कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक 1 था जो कि विश्व का प्रथम कृत्रिम उपग्रह बना जिसने पृथ्वी की परिक्रमा की। उस समय रूस सोवियत संघ के रूप में दुनिया की दूसरी धुरी हुआ करता था।

सोवियत संघ ने 04 अक्टूबर 1957 के दिन इस उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित किया था इसकी बैटरी के डेड डिस्चार्ज होने से पहले इस उपग्रह ने तीन सप्ताह तक पृथ्वी की परिक्रमा की तथा इसके 02 महीने बाद पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर नष्ट हो गया। लेकिन इस उपग्रह ने अंतरिक्ष युग को जन्म दे दिया जिसके बाद दुनिया के देशों के मध्य स्पेस रेस शुरू हो गई।

दुनिया में कोरोना वायरस के कुल मामले 2 करोड़ से पार जा चुके हैं वहीं वर्ल्डओमीटर के आंकड़ो के अनुसार भारत में 23 लाख कोरोना मामले पाए जा चुके हैं। ऐसे में इस दवा ने एक सुखद खबर दी है।

रूस को इस दवा के लिए 20 देशों से 01 करोड़ वैक्सीन बनाने के ऑर्डर मिल चुके हैं।

आम लोगों के लिए यह वैक्सीन जनवरी 2021 तक उपलब्ध होने की संभावना है।

स्पूतनिक रूसी भाषा का शब्द है जिसका अंग्रेजी में अर्थ होता है फेलो ट्रैवलर (Fellow Traveller) (हिंदी में कहा जाए तो "सह यात्री या साथी")

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इस वैक्सीन के बनने की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को इस वैक्सीन का डोज दिया जा चुका है और वो स्वस्थ महसूस कर रही है।

इस वैक्सीन का शुरुआती नाम Gam-COVID-Vac Lyo रखा गया था। जबकि विदेशी डील्स में इसे स्पुतनिक V नाम दिया गया है।

रूस के स्वास्थ्य मंत्री ओलेड ग्रिडनेव के अनुसार यह वैक्सीन मॉस्को के गैमेल्या इंस्टीट्यूट तथा रूस के रक्षा मंत्रालय द्वारा सयुंक्त रूप से विकसित की गई है।

इस वैक्सीन को बनाने में अडेनोवायरस (Adenovirus) का इस्तेमाल किया गया है जो कि एक सामान्य जुकाम के लिए उत्तरदायी होता है।

इस वैक्सीन का मास प्रोडक्शन (बड़े स्तर पर उत्पादन) सितंबर 2020 से शुरू होने की संभावना है।

बॉलीवुड में भाई भतीजावाद | Nepotism in Bollywood Meaning in Hindi

हाल ही में 12 अगस्त 2020 को सड़क 2 मूवी का ट्रेलर रिलीज हुआ। यूट्यूब पर इस ट्रेलर के लाइक 10 लाख भी नही हुए जबकि डिसलाइक 1 करोड़ के करीब पहुँ...