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(Rashke Qamar) रश्क ए क़मर/ रश्के कमर का अर्थ Meaning in Hindi

रश्के कमर उर्दू जुबान का शब्द है जिसका हिन्दी भाषी क्षेत्रों में प्रचलित होने का कारण नुसरत फ़तेह अली खान द्वारा लिखी गई ग़ज़ल “रश्क-ए-क़मर” है। यह शब्द इस ग़ज़ल का शीर्षक है इस ग़ज़ल में उर्दू शब्दों का बहुतयात प्रयोग है इसी कारण बहुत से शब्द हैं जिन्हें समझना थोडा कठिन है उन्ही में से एक है रश्के कमर जिसका अर्थ होता है “चाँद की इर्ष्या” अर्थात वह जो इतना अधिक सुंदर है जिससे चाँद को भी इर्ष्या होने लगे उसे रश्के कमर कहा जाता है। इस शब्द को शुद्ध रूप में “रश्क-ए-क़मर” लिखा जाता है जिसे यदि अलग अलग करके समझा जाए तो “रश्क” का अर्थ होता है “इर्ष्या” तथा “क़मर" का अर्थ होता है “चाँद” इस प्रकार इन दोनों शब्दों का सयुंक्त अर्थ “चाँद की इर्ष्या” निकलता है।

रश्के कमर शब्द का प्रयोग अक्सर प्रेमी अपनी प्रेमिका की सुन्दरता की ओर इशारा करने के लिए करते हैं। क्योंकि चाँद सुन्दरता और शीतलता का प्रतीक है और असंख्य तारों में सबसे अलग व सबसे सुन्दर दिखाई देता है सभी सितारों की सुन्दरता इसके सामने फीकी पड़ती है तथा यह पूरी दुनिया में सिर्फ एक ही है। इसलिए जब कोई आशिक अपनी चाहत को रश्क ए क़मर कहता है तो इसका अर्थ है कि वह उसे दुनिया की सबसे सुन्दर स्त्री बता रहा है व उस जैसा और कोई नहीं है बल्कि चाँद भी उससे इर्ष्या करने लगा है क्योंकि वह चाँद से भी ज्यादा खूबसूरत है। इस ग़ज़ल की पहली पंक्ति इस प्रकार है: “मेरे रश्के कमर... तूने पहली नज़र... जब नज़र से मिलाई... मजा आ गया...” रश्के कमर का इंग्लिश में अर्थ एनवी ऑफ़ द मून (Envy of the Moon) होता है।

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