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स्ट्रेस का अर्थ | Stress meaning in hindi

किसी भी वस्तु पर बाहरी दबाव डालने पर वह वस्तु उस दबाव का विरोध करती है वस्तु के इसी विरोध को स्ट्रेस कहा जाता है। अंग्रेजी शब्द स्ट्रेस का हिंदी में अर्थ होता है तनाव। स्ट्रेस अलग-अलग वस्तुओं में अलग-अलग तरीके से होता है। जैसे कि पदार्थ में होने वाली स्ट्रेस उसके अणुओं का प्रतिरोध होता है तथा मस्तिष्क में होने वाली स्ट्रेस बहुत से अनसुलझे प्रश्नों व परेशानियों के बढ़ते दबाव को कहते हैं। पहले मस्तिष्क के स्ट्रेस को समझते हैं। जब मस्तिष्क उलझन में होता है तथा उसके सुलझने से पहले ही एक और उलझन आ जाए तब मतिष्क का ध्यान बँट जाता है व जब दोनों उलझने सुलझने से पूर्व ही एक के बाद एक उलझने आती रहती हैं तो मस्तिष्क पर दबाव बढ़ने लगता है। जब मस्तिष्क की सहने की सीमा समाप्त हो जाती है तो वह समझ नही पाता की क्या किया जाए तथा कोई निर्णय लेने में स्वयं को असमर्थ पाता है इस स्थिति को दबाव या स्ट्रेस कहा जाता है। अगर पुनः पदार्थ की स्ट्रेस की बात की जाए तो बाहर से जितना अधिक बल हम लगाएंगे पदार्थ उतना अधिक विरोध करेगा तथा पदार्थ इस विरोध को तब तक जारी रखेगा जब तक वह टूट ना जाए। किसी भी पदार्थ के अणु सदैव एक प्राकृतिक दशा में होते हैं वे न तो दूर होना चाहते हैं ना ही पास होना चाहते हैं। इसलिए कोई पदार्थ अपनी प्राकृतिक स्थिति को छोड़ना नही चाहता जब बाहरी बल से इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया जाता है तो प्रत्येक पदार्थ आंतरिक बल लगता है यही आंतरिक बल स्ट्रेस कहलाता है। उदाहरण के तौर पर रबड़ को खींचने पर यह अपनी वास्तविक स्थिति में आने का प्रयास करती है यह प्रयास तब तक जारी रहता है जब तक रबड़ टूट न जाए तथा रबड़ द्वारा वास्तविक स्थिति में आने के लिए किया जाने वाला यह प्रयत्न इसके आंतरिक दबाव के कारण होता है यही दबाव स्ट्रेस नाम से जाना जाता है।
उदाहरण: 1). इतनी स्ट्रेस मत लो आराम से काम करो।
2). अगर तुम प्लासिटक की इस तार को आवश्यकता से अधिक खींचोगे तो यह स्ट्रेस के कारण टूट जाएगी।

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