(Guru) गुरू का अर्थ Meaning in Hindi

कोई श्रेष्ठ व्यक्ति जो कोई कला या विद्या सिखा रहा हो अर्थात जिससे हमने किसी न किसी रूप में कोई शिक्षा ग्रहण की हो को गुरु कह कर सम्बोधित किया जाता है। गुरु कला में पूर्णतः निपुण हो भी सकता है और नही भी। परन्तु यदि वह इतना ज्ञान रखता हो की आप को सीखा सके तो आपके लिए वह आप का गुरु होगा।

जैसे महाभारत काल में द्रोणाचार्य ने अर्जुन तथा अन्य कौरवों/ पांडवों को शस्त्र तथा शास्त्र की शिक्षा दी तथा इनके गुरु कहलाये। इसी तरह आपको आपके जीवन में कुछ सिखाने वाला आपका गुरु कहलाएगा। यह सीख कोई ज्ञान हो सकता है कोई कला हो सकती है या फिर कोई कार्य हो सकता है।

अन्य अर्थ:

बड़ा: गुरू का एक अर्थ बड़ा भी होता है सबसे बड़े आकार वाले को गुरु कहा जा जाता है जैसे "आकार के मामले में यह सबका गुरु है।"

महत्वपूर्ण: गुरू शब्द को महत्वपुर्ण के स्थान पर भी प्रयोग किया जा सकता है जैसे "इस कार्य को किसी अनुभवी को ही सौंपा जाए क्योंकि यह एक गुरु कार्य है।"

ब्रहस्पति:  ब्रहस्पति जो कि एक ग्रह व दिन का नाम है; भी गुरु शब्द का पर्याय है।

(Anubhav) अनुभव का अर्थ Meaning in Hindi

वह जानकारी जो किसी कार्य को करने से हमारे मस्तिष्क में एकत्रित होती है व पुनः इसी प्रकार के कार्य को करते समय इसे सरलता से करने में हमारी सहायता करती है अनुभव कहलाती है।

अनुभव हमारे मस्तिष्क की वह शक्ति है जो किसी कार्य या स्तिथि के पुनः आने पर जाग्रत हो जाती है तथा उस स्थिति को भौतिक रूप से महसूस किये बिना ही उसकी अनुभूति कर आगे का रास्ता निकालती है।

अन्य अर्थ:

तजुर्बा: मुझे यह काम करने का तजुर्बा है इसीलिए मैं इसे आपसे कम समय में कर सकता हूँ।

एहसास: मुझे एहसास है कि आप किन हालातो से गुजर रहे होंगे।

(Prashan) प्रश्न का अर्थ Meaning in Hindi

प्रश्न जिज्ञासा से युक्त एक वाक्य होता है। जो सदैव एक प्रतिउत्तर की मांग करता है। प्रश्न में निहित जिज्ञासा को जो अन्य वाक्य शांत करता है वह उत्तर कहलाता है। प्रश्न  वर्तमान में होने के बावजूद पूर्णता प्राप्ति व जिज्ञासा शांति के लिए भविष्य पर निर्भर करता है।

सभी प्रश्नों का उत्तर मिल पाना सम्भव नही होता इसी कारण कुछ प्रश्नों की जिज्ञासा बहस की प्रक्रिया से कुछ हद तक शांत की जा सकती है। जिसमें प्रश्न से प्रश्न टकराते है व हो सकता हैं इस बहस में कुछ प्रश्न अपना वजूद खो दें।

सरल शब्दों में किसी से जानकारी की मांग करने के लिय प्रयोग किये जाने वाले वाक्य प्रश्न कहलाते हैं।

उदाहरण:

इस अर्थ को पढ़ कर हमें क्या जानने को मिला?

उपरोक्त वाक्य एक प्रश्न है तथा एक जानकारी की मांग कर रहा है। यदि आप इस वाक्य में निहित जिज्ञासा को शांत करना चाहते हैं तो आपको इस अर्थ को पढ़ने के बाद प्राप्त हुई जानकारी सांझा करनी होगी जो अपने आप में एक सम्पूर्ण जानकारी होने के साथ साथ उपरोक्त प्रश्न को उत्तर भी देगा। प्रश्न को अंग्रेजी में क्वेश्चन कहा जाता है।

(Doha) दोहा का अर्थ Meaning in Hindi

दोहा लय में गाया जाने वाली चार चरणों की एक रचना होती है। जो छंद का ही एक अन्य रूप है। दोहे में लय इतनी सार्थक होती है कि इसे एक राग के रूप में भी अलापा जा सकता है।

व्याकरण की परिभाषा में एक दोहे के प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।

दोहा हिंदी साहित्य में बहुत ही ऊंचा दर्जा रखता है। जिसमें कबीर दास जी के दोहे प्रथम स्थान पर आते हैं। इसके अतिरिक्त तुलसीदास व अन्य बहुत से रचयिता ऐसे हैं जिन्होंने दोहा रचना की।

दोहा का एक उदाहरण:

चलती चक्की देख के, खड़ा कबीरा रोय।
दो पाटों के बीच मे, साबुत बचा ना कोय।

(Prachalit) प्रचलित का अर्थ Meaning in Hindi

प्रचलित एक विशेषता होती हैं किसी भी वस्तु या व्यवहार की जैसे यदि कोई वस्तु प्रचलन में है अर्थात जिसको बहुतयात तौर पर प्रयोग किया जा रहा है को प्रचलित कहा जाता हैं जैसे एक तरह के खास कपड़े जो अनेक लोगो द्वारा पहने जाते हैं को प्रचलित कपड़े कहा जाएगा।

इस तरह कपड़ो के स्थान पर सिक्के भी हो सकते है या किसी तरह का कोई खाना या व्यवहार भी। सरल शब्दों में  एक तरह का कुछ भी ऐसा जो अनेक लोगो द्वारा दोहराया जाता है प्रचलित शब्द को अर्थ देता है। उदाहरण के तौर पर कुछ वाक्य ले लीजिए जैसे:

1. अकबर के काल के सिक्के बहुत प्रचलित थे।
2. पीतल के बर्तन पुराने समय में बहुत प्रचलित थे।

(Kabir) कबीर का अर्थ Meaning in Hindi

कबीर एक नाम के तौर पर जाना जाने वाला शब्द है यह नाम विशेषकर मुस्लिम समुदाय में रखा जाता है। इसके अतिरिक्त कबीर शब्द सन्त कबीर दास जी के कारण बहुत प्रचलित हैं जो हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध संत और कवि थे।

इसके अतिरिक्त सम्मानित व्यक्ति को भी कबीर की संज्ञा दी जाती है। व भारत में मनाए जाने वाले एक त्यौहार होली में गाया जाने वाला एक गीत भी  "कबीर" नाम से जाना जाता है।

परन्तु विशेषकर यह शब्द केवल संत कबीर जी के कारण प्रचलित है जिन्होंने 15 वीं सदी में अनेकों दोहे लिखे जिनका हिंदी साहित्य पर बहुत अधिक प्रभाव है।

अन्य अर्थ:

महान: वह व्यक्ति जिसने अपने कार्य के कारण महानता को हासिल किया है कबीर कहलाता है।

बुजुर्ग: एक आयु के बाद वृद्धावस्था को भी कबीर शब्द से सम्बोधित किया जाता है।

सम्मानीय: वह व्यक्ति जिसे समाज मे सम्मान मिला है व जो सम्मानीय होता है कबीर कहलाता है।

(Sadhu Aisa Chahiye) साधु ऐसा चाहिए का अर्थ Meaning in Hindi

साधु ऐसा चाहिए: एक ऐसा सज्जन चाहिए
जैसा सूप सुभाय: जैसा अनाज साफ करने वाला सूप होता है
सार सार को गहि रहै: जो अनाज के दानों को छोड़ कर
थोथा देई उड़ाय: बाकी के कचरे को उड़ा देता है

कबीर जी कहते हैं हमें अपने जीवन में ऐसे सज्जन की आवश्यकता होती है जिसका स्वभाव अनाज को साफ करने वाले सूप जैसा हो। जिस प्रकार सूप अनाज को साफ करते हुए दानों को अलग रख लेता है तथा कचरे को उड़ा देता है। ठीक उसी प्रकार इस स्वभाव का सज्जन यदि हमारे साथ होगा तो वह हमारे सद्गुणों को तराशते हुए हमें सार्थक बना देगा तथा हमारे अवगुणों को अनाज के कचरे की भांति समाप्त कर देगा।

हमें अपने जीवन में ऐसे सज्जनों का साथ लेना चाहिए जो इस स्वभाव के हों। चाहे वे किसी भी रूप में हमारे साथ हों। ऐसे सज्जन हमारे मित्र भी हो सकते हैं और गुरु भी।

ऐसे सज्जनों का साथ हमारे सभी अवगुणों को दूर कर हमारे जीवन को अर्थहीन से अर्थपूर्ण बना देता है। ये ही इस दोहे का भाव है।

(Pothi Padhi Padhi Jag Mua) पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ का अर्थ Meaning in Hindi

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ: बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ कर ना जाने कितने चले गए
पंडित भया ना कोय: लेकिन कोई भी विद्वान ना बन सका
ढाई आखर प्रेम का: लेकिन कुछ शब्दों के प्रेम को
पढ़े सो पंडित होय: जिसने अपने हृदय से समझ लिया वो ही सबसे बड़ा विद्वान है

कबीर जी कहते हैं इस संसार में ग्रन्थों को पढ़ने वाले न जाने कितने ही मृत्यु को प्राप्त हो गए। किन्तु इतना ज्ञान होने के बाद भी यदि उन्हें प्रेम की समझ नही है तो उन्हें विद्वान नही माना जा सकता।

किताबों के ज्ञान से अलग वह व्यक्ति जिसने प्रेम को समझ लिया है वोही सबसे बड़ा ज्ञानी है। क्योंकि ऐसे व्यक्ति के मन में सभी के लिए प्रेम होता है उसका हृदय प्रेम की अनुभूति से अवगत होता है तथा उसका आचरण छल कपट से मुक्त होता है। ऐसे व्यक्ति को ही कबीर जी वास्तविक विद्वान मानते हैं।

संसार मे प्रेम की समझ रखने वाला व्यक्ति सबसे महान है इसीलिए हमें अपने हृदय में प्रेम को स्थान देना चाहिए। प्रेम के बिना सम्पूर्ण ज्ञान व्यर्थ है। ये ही इस दोहे का भाव है।

(Bura Jo Dekhan Mai Chala) बुरा जो देखन मैं चला का अर्थ Meaning in Hindi

बुरा जो देखन मैं चला: जब मैं दूसरों में बुराई देखने लगा
बुरा ना मिलिया कोय: तब मुझे किसी में बुराई नही दिखी
जो मन खोजा आपना: जब मैंने अपने मन के अंदर झाँका
मुझसे बुरा ना कोय: तो पाया कि मुझसे बुरा तो कोई नही है जो दूसरों के सद्गुणों को नकार कर उनके दोष मात्र ढूंढ रहा है

कबीर जी दूसरों में दोष ढूंढने की बात करते हुए कहते हैं कि जब मैं दूसरों में बुराई ढूंढता था तथा अपने विवेक से ये पता करना चाहता था कि कौन सबसे बड़ा दोषी है तब मैं दूसरों के दोष मात्र देखने का प्रयास करता था। तब मैंने पाया कि संसार मे कोई भी बुरा नही है सब किसी न किसी परिस्थिति में बंधे हुए हैं। तथा वे दोष जो मैंने उनमें ढूंढे हैं वे उन्ही परिस्थियों का नतीजा है इसलिए कोई भी मन से बुरा नही है कोई भी दोषी नही है।

तत्पश्चात कबीर जी कहते हैं कि मैं जो दूसरों के दोषों के कारण उनको बुरा कहता था जब मैंने अपने अंदर झाँका तो पाया कि मुझसे बुरा इस दुनिया में कोई नही है। क्योंकि जो व्यक्ति मात्र दोष ढूंढने के लिए प्रयत्न करता है भला उससे बड़ा दोषी संसार मे और कौन होगा। इसीलिए कबीर स्वयं को सबसे बड़ा दोषी मानते हुए कहते हैं कि दूसरों की सकारात्मकता को नकार कर उनमें दोष मात्र ढूंढने वाला व्यक्ति संसार मे सबसे बड़ा दोषी स्वयं है। जो बुरा खोजने में अपने मन को लगाए हुए है।

अत: हमें नकारात्मकता को छोड़ कर सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। तथा दूसरों को अवगुण भूल कर उनके गुणों को परखना चाहिए। ये ही इस दोहे का भाव है।

(Aisi Vani Boliye) ऐसी वाणी बोलिए का अर्थ Meaning in Hindi

ऐसी वाणी बोलिए: इस प्रकार के वचन बोलें
मन का आपा खोए: कि मन मन्त्र मुग्ध हो जाए
औरन को शीतल करै: औरों को भी शांति मिले
आपहुं शीतल होए: स्वयं का मन भी सुख का अनुभव करे

कबीर जी इस दोहे में अपने वचनों में नम्रता व शीतलता लाने को कहते हैं। उनके अनुसार व्यक्ति के बोल इतने नम्र व सुखदाई होने चाहिए कि सामने वाले का हृदय मंत्र मुग्ध हो जाए। आपके वचन सुनने वाले के मन को सुख देने वाले होने चाहिए।

ऐसे सुखदाई वचनों से सुनने वाले के मन को तो शांति मिलती ही है साथ ही हमारा अपना मन भी इसी प्रकार के सुख व शीतलता का अनुभव करता है।

ये नियम इस संसार के प्रत्येक व्यक्ति पर प्रभाव डालता है जब कोई व्यक्ति नम्रता पूर्वक बात करता है तब उसकी बात चाहे बुरी भी हो तब भी ध्यान से सुनी जाती है। इसके विपरीत कटु वचन दिल को दुख देते हैं व कटु वचन बोलने वाला व्यक्ति सामने वाले को दुखी करने के साथ साथ अपने मन की शांति भी खो देता है।

कहावत है कि कड़वा बोलने वाले का शहद तक नहीं बिकता व मीठा बोलने वाला ज़हर भी बड़ी सरलता से बेच देता है। इसलिए हमें वचनों की शक्ति समझते हुए अपनी वाणी में सार्थकता लानी चाहिए। ये ही इस दोहे का भाव है।

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