अक्ल का पुतला मुहावरा का अर्थ | Akal Ka Putla Muhavra meaning in hindi

अर्थ=(असाधारण बुद्धिमान होना)
अकल के पुतले का अर्थ है बहुत ज्यादा बुद्धिमान होना। जब कोई भी व्यक्ति बहुत ज़्यादा बुद्धिमान या उसके सोचने समझने की क्षमता अधिक होती है।
 तो उसके लिए इसका प्रयोग किया जाता है।यानि की यदि कोई व्यक्ति बहुत ज़्यादा समझदार है या बुद्धिमान या उसके सोचने समझने की क्षमता अधिक है या उसके द्वारा किए गए कार्यों में उसे सफलता प्राप्त होती है या उसके कार्य बहुत बढ़िया है तो दूसरे व्यक्ति द्वारा उसके लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण के लिए=राम तो अक्ल का पुतला है। उससे व्यर्थ में बहस मत करो। क्यूंकी राम बहुत बहुत होशियार है तो यहाँ पर इस शब्द का प्रयोग किया गया।


अक्ल का दुश्मन मुहावरा का अर्थ | Akal ka dushman muhavra meaning in hindi

अर्थ=(समझ का न रहना)
उदाहरण=श्याम,क्या तुम्हारी अक्ल घास चरने गयी है जो तुम उस जुआरी के साथ मित्रता करना चाहते हो?तुम तो अकल के दुश्मन हो।
यहाँ पर इस शब्द का प्रयोग इसलिए किया गाय क्योंकि क्योंकि वह जानते हुए भी जुआरी से मित्रता कर रह है जो की उसके लिए ठीक नहीं।
इसका अर्थ है कि कुछ भी समझ ना आना यानि कि समझ न रहना और समझ के बिना कुछ भी असंभव सा लगता है। हम अपने जीवन जो भी काम होते हैं वो हम सोच-समझ करते हैं और हमारी क्षमता पर निर्भर करता है और जब समझ न रहेगी तो हम काम कैसे करेंगे या फिर किसी चीज़ को करने से पहले सोचेंगे कैसे जिससे कि हमारे काम ठीक नहीं होंगे।  


                                  

आढ़ती का अर्थ | Aadti meaning in hindi

आढ़ती शब्द का अर्थ होता है-
कर्जदार या कृषि व्यापारी जिनसे किसान कर्ज़ लेकर अपनी फसल बोते हैं या बीजते हैं।ये किसानो के लिए बैंक की तरह काम करते हैं उन्हे ऋण देकर।
ऋण भी दो प्रकार के होते हैं-
1 ओपचारिक
2 अनोपचारिक
ओपचारिक ऋण वे होते हैं जो किसी सरकारी संस्था द्वारा चलाये जाने वाले बंकों से लिए जाते हैं। ये ऋण किसान को देखकर दिये जाते हैं यानि की उसकी क्षमता कितनी है वह कितना ऋण ले सकता है और कितने समय में दे सकता है। जिसके लिए उससे जमीन के कागजात गैरंटी के रूप में ले लिए जाते हैं। और यदि किसान ऋण वापस करणे करने में असफल रहता है। तो गारंटी के रूप में दी गयी जमीन को बैंक को नीलाम कर सकता है। इनकी ब्याज दर रेसर्वे बैंक ऑफ इंडिया निर्धारित करता है। और इनकी शर्ते अधिक सुगम और स्पष्ट होती हैं।
अनोपचारिक ऋण वे होते हैं जो किसी निजी संस्था द्वारा चलाये जाते हैं या किसी बड़े जमींदार से लिए जाते हैं जिसमे ऋण की कोई सीमा नहीं होती और किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार ऋण लेता है और उससे गारंटी के रूप में कागजात लिए जाते हैं। और यदि किसान किसान ऋण देने में असफल रेहता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती हैं। और कर्ज़ वापस ना कर सकने पर ब्याज लगता हैं और ब्याज पर भी ब्याज लगता है । और किसान कर्ज़ जाल में फंश जाता है। इनके द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की दर वे स्वयं निर्धारित करते हैं। इनकी ब्याज दर ऊंची होती हैं।
आढ़तियों का उदाहरण दूसरा है।
इससे इंग्लिश में lender कहते हैं। 

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