सशक्तिकरण का अर्थ | Sashaktikaran meaning in Hindi

वह क्रिया जिसके द्वारा किसी विशेष समुदाय को किसी विशेष क्षेत्र में शक्ति प्रदान की जाती है को सशक्तिकरण कहा जाता है। सशक्तिकरण उन समुदायों का किया जाता है जो किसी कारणवश समाज में पिछड़ चुके हैं चाहे वह गरीब वर्ग हो, शोषित वर्ग हो या फिर महिला वर्ग हो। सशक्तिकरण में सबसे अधिक जोर इस समय महिला सशक्तिकरण पर दिया जा रहा है पूरी दुनिया की जनसंख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी 50% है परंतु वही यदि दुनिया के विकास की बात की जाए तो महिलाओं की हिस्सेदारी 20% भी बड़ी मुश्किल से पार कर पाती है और कई देशों में तो महिलाओं के इतने बुरे हालात है कि उनका विकास में प्रतिशत 10% से भी कम आंका गया है और वही यदि गरीबों की बात की जाए तो उनका विकास में कोई अहम योगदान नहीं होता इसका कारण यह नहीं है कि उनके पास कोई प्रतिभा नहीं है इसका कारण यह है कि उन्हें अपनी प्रतिभा को दिखा पाने के मौके नहीं मिल पाते। इसलिए उन्हें सशक्त करके आगे लेकर आना ही सशक्तिकरण का मुख्य उद्देश्य है। ऐसा ही कुछ शोषित वर्ग के साथ भी होता है ऐसे वर्ग की प्रतिभा का प्रयोग सशक्त लोगों द्वारा पहले ही कर लिया जाता है। सशक्तिकरण क्रिया का मूल कारण यही है कि सभी समुदाय को एक ही पंक्ति में खड़ा कर देना जिससे सभी की प्रतिभा का पूर्ण प्रयोग हो सके और सभी को जीने के पूर्ण अधिकार मिले तथा सभी का विकास में बराबर का योगदान हो सके।  सशक्तिकरण एक हिंदी का शब्द है तथा हिंदी में ही इसका अर्थ होता है: 1. सशक्त करने की क्रिया अर्थात अधिकारों से परिपूर्ण करने की क्रिया। 2. समान हक दिलाने के लिए किए गए कार्यों की रूपरेखा। सशक्तिकरण को अंग्रेजी में  एंपावरमेंट कहा जाता है।

सशक्तिकरण शब्द का उदाहरण के रूप में वाक्य में प्रयोग इस प्रकार है:

1. महिला सशक्तिकरण की आवाज आज संसार के कोने-कोने तक गूंज रही है और जल्द ही यह अपना असर दिखाएगी जिस दिन महिलाओं की हिस्सेदारी विकास में बराबर होगी उस दिन विश्व की रफ्तार की दर दोगुनी हो जाएगी।

2. आज महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता पड़ रही है इसके लिए पुरुष समुदाय का वह वर्ग जिम्मेवार है जिसने महिलाओं को सदैव कमतर आंका है। आज यदि सामाजिक स्तर पर देखा जाए तो महिलाएं पीछे हैं, आर्थिक स्तर पर देखा जाए तो महिलाएं पीछे हैं, राजनीतिक स्तर पर देखा जाए तो महिलाएं पीछे हैं, कानूनी स्तर पर देखा जाए तो महिलाएं पीछे हैं और हजारों वर्ष के लंबे इस पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता ने ही महिलाओं को मानसिक स्तर पर इतना कमजोर बना दिया है कि उनमें इतना आत्मविश्वास नहीं छोड़ा कि वह अपनी सशक्त होने की आवाज को बुलंद कर सकें। परन्तु इसका अर्थ कदापि यह न समझा जाए कि वह चाहती ही नहीं हैं। इसलिए महिला सशक्तिकरण होना अनिवार्य है तथा आवश्यकता है तो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने की जिसे वे स्वयं सामने आए और सशक्त होकर देश के विकास में बराबर का सहयोग करें। हालांकि समय के साथ-साथ स्थितियां इसी ओर अग्रसर हो रही है जो कि एक शुभ लक्षण हैं।

3. इसके अतिरिक्त गरीब वर्ग को सशक्त करना है आर्थिक तौर पर और शोषित वर्ग को सशक्त करना है कानूनी तौर पर ताकि वे भी विकास में बराबर के सहयोगी बन सके। इसलिए इन सभी पिछड़े वर्गों के कल्याण हेतु सशक्तिकरण अनिवार्य है।

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