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समाजवाद का अर्थ | Samajvad Meaning in Hindi

समाजवाद आर्थिक और सामाजिक सामंजस्य से बनी एक व्यवस्था है जिसे हम आर्थिक सामाजिक दर्शन भी कहते हैं। समाजवाद व्यक्तिवाद और पूंजीवाद का विरोधी है यह एक ऐसे समाज की कल्पना करता है जिसमें सभी व्यक्ति आर्थिक व सामाजिक रूप से समान हों। समाजवाद चाहता है कि समाज में यह समानता राज्य अर्थात सरकार द्वारा प्रदान की जाए। राज्य नए नियम बनाए तथा नई-नई व्यवस्थाओं के जरिए समाज के सभी व्यक्तियों को बराबर स्थान दे। समाजवाद ऐसी व्यवस्था की कड़ी निंदा करता है जिसमें कोई एक व्यक्ति पूंजीपति बनता है समाजवाद चाहता है कि दुनिया में जो अमीरी और गरीबी के बीच की खाई है उसे भरा जा सके कोई भी अमीर-गरीब न हो। हर एक को उतना ही मूल्य ही मिले जितना वह कार्य करे।

उदाहरण के तौर पर हम देखते हैं कि कई पूंजीपति बैठे-बिठाए ही लाखों-करोड़ों की कमाई करते हैं लेकिन वहीं एक मजदूर जो दिन भर मेहनत करता है वह एक दिन में मात्र 250 या 500 रुपए ही कमा पाता है। समाजवाद इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहता है वह चाहता है कि यदि एक मजदूर एक पूंजीपति से ज्यादा कार्य कर रहा है तो मजदूर को ज्यादा वेतन मिलना चाहिए और उस पूंजीपति को कम और पूंजीपति भी मेहनत करें और उसे उसकी मेहनत के अनुसार ही वेतन मिलना चाहिए न की उसके द्वारा चलाए गए कारखानों या पूंजीवाद के जरिए।

समाजवाद कहता है कि दुनिया में जितने भी संसाधन हैं चाहे वह जमीन से उगने वाला अनाज हो, धरती पर बहता जल हो या जो भी हमें प्रकृति से या कार्य करने के पश्चात प्राप्त होता है उस पर सभी मनुष्यों का समान अधिकार होना चाहिए और वे संसाधन सभी मनुष्यों में समान रूप से बांटे जाने चाहिए। जो व्यक्ति जितनी अधिक मेहनत करता है उसे उतना ही अधिक फल मिलना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ज्यादा कार्य करता है तो उसे ज्यादा वेतन मिलना चाहिए और यदि कोई व्यक्ति कम काम करता है तो उसे कम वेतन मिलना चाहिए और जो भी धन संपत्ति व संसाधन पृथ्वी पर मौजूद है उन पर पूरे समाज का एक समान स्वामित्व होना चाहिए और इस स्वामित्व की रक्षा करने के लिए राज्य का निर्माण किया जाना चाहिए (जिसे हम सरकार कहते हैं) सरकार का निर्माण केवल सभी संसाधनों को बराबर बांटने व न्याय के लिए किया जाना चाहिए।

समाजवाद निजी संपत्ति का विरोध करता है और एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना हेतु प्रयासरत रहता है। समाजवाद कहता है कि जो भी संसाधन यहां पर मौजूद है उनका प्रयोग लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि उचित उपयोग के लिए किया जाना चाहिए क्योंकि संसाधनों पर किसी भी पूंजीपति का अधिकार नहीं है और निजी संपत्ति एकत्रित कर कोई भी व्यक्ति पूर्ण संसाधनों पर काबिज नहीं हो सकता और अपने लाभ के लिए इन संसाधनों का प्रयोग नहीं कर सकता। ये सभी संसाधन प्रकृति ने पूरे समाज को दिए हैं इसलिए इन्हें पूरे समाज में बराबर भागों में बांटा जाना चाहिए। ध्यान देने योग्य है कि समाजवाद साम्यवाद से अलग है जहां साम्यवाद समाज की असमानता को खत्म करने के लिए राज्य (सरकार) की जरूरत को नकारता है वहीं समाजवाद कहता है कि समाज में समानता लाने के लिए सरकार की आवश्यकता है और जहां साम्यवाद आवश्यकतानुसार वेतन देने की बात कहता है वहीं समाजवाद कार्य क्षमता के अनुसार वेतन देने को सही मानता है। समाजवाद का अंग्रेजी में मतलब सोशलिज्म (Socialism) होता है।

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