आउट ऑफ द बॉक्स का अर्थ | Out of the Box Meaning in Hindi

आउट ऑफ द बॉक्स एक अंग्रेजी भाषा का वाक्य है जिसका प्रयोग बहुत अधिक होता है यह पूरा वाक्य इस प्रकार है "आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग" इसका मतलब होता है किसी चीज को एक अलग ही नजरिए से देखना और सोचना। ऐसी सोच और नजरिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली सामान्य परेशानियों के लिए नए सुविधाजनक विकल्प खोजने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होता है। उदाहरण के तौर पर आज हम वायुयान बनाने में सक्षम नहीं हो पाते अगर कोई व्यक्ति यह नहीं सोचता कि इंसान उपकरणों की सहायता से कभी उड़ भी सकता है लेकिन यह आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग अर्थात एक सीमा के दायरे से बाहर की सोच ने ही संभव बनाया है कि आज हम हवाई जहाज ही नहीं बल्कि रॉकेटों के माध्यम से चन्द्रमा व दूसरे ग्रहों तक पर जाने में सफल हो पाए हैं।

इसी तरह आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग का एक दूसरा उदाहरण लेते हुए हम मोबाइल का उदाहरण ले सकते हैं आज से एक सदी पहले यह किसी ने सोचा तक नहीं होगा कि बिना किसी तार के कभी हम ऐसा उपकरण बना पाएंगे जिसके जरिए हम लाखों मीलों दूर बैठे हुए इंसान से बात कर पाएंगे। यह किसी समय एक असंभव सोच थी लेकिन आज सच है। कोई भी चीज पहले सोच ही होती है इसलिए आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग यानि कि एक सीमा से बाहर की हवाई बातें सोचना और फिर उन बातों पर बिना असफलता की परवाह किए पूरा मन लगाकर कार्य करना कभी-कभी ऐसे इनोवेशन का कारण बन जाता है जो पूरी इंसानियत की दिशा ही बदल कर रख देता है।

मुर्दा बोले कफन फाड़े का अर्थ | Murda Bole Kafan Phare Meaning in Hindi

यह एक कहावत है जो कि उत्तर भारत के हिंदी तथा पंजाबी भाषी इलाकों में बोली जाती है इस कहावत का अर्थ होता है कि जब भी कोई मूर्ख व्यक्ति बात करता है तो वह मूर्खता भरी बातें करता है और जब मूर्ख व्यक्ति कोई कार्य करता है तो वह मूर्खता भरा कार्य ही करता है। इसमें मूर्ख व्यक्ति को एक मृत/ मुर्दा व्यक्ति की संज्ञा देकर बताया गया है कि जब भी मुर्दा व्यक्ति बोलने की कोशिश करेगा तो वह सबसे पहले कफ़न ही फाड़ेगा। क्योंकि एक मुर्दा लाश को कफ़न में बांध रखा जाता है और यदि वह बोलने का कोई प्रयास करेगा तो वह कफन फाड़ने के बाद ही बोल सकेगा। यह पंक्ति एक कटाक्ष है तथा केवल कटाक्ष करने हेतु ही प्रयोग की जाती है।

आमतौर पर इस पंक्ति का प्रयोग उन व्यक्तियों के लिए किया जाता है जो समय की नजाकत को ना समझते हुए कहीं पर भी कुछ भी बोल देते हैं तथा उन्हें नहीं पता होता कि यह बात यहां बोलनी उचित होगी या नहीं। इसलिए यदि कोई स्थिति के विरोधाभास में कोई बात बोल देता है तो उसके लिए कहा जाता है कि "मुर्दा बोले कफन फाड़े"

डॉ. मनमोहन सिंह के तीन सुझाव

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री व दिग्गज अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हाल ही में बीबीसी से ईमेल के जरिए बातचीत की; जिसमें उन्होंने कोरोना के क...