दुर्लभ मानुष जन्म है दोहे का अर्थ | Durlabh Manush Janam Hai Meaning in Hindi

दुर्लभ मानुष जन्म है: मनुष्य का जन्म दुर्लभ (बहुत कम मिलने वाला) है
देह न बारम्बार: यह बार-बार नही मिलेगा
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े: ठीक वैसे ही जैसे वृक्ष का पत्ता एक बार झड़ जाने पर
बहुरि न लागे डार: दोबारा वृक्ष से नही जुड़ सकता

इस दोहे में कबीर जी कहते हैं कि मनुष्य को जो जन्म मिला है वह जन्म बहुत ही दुर्लभ है अर्थात बहुत ही भाग्यवान आत्माओं को यह जन्म मिलता है और एक बार तुम्हें यह जन्म मिल गया है इसका अर्थ यह नहीं है कि यह बार-बार तुम्हें मिलेगा। मनुष्य जाति हर किसी को बार-बार नहीं मिलती ठीक वैसे ही जैसे वृक्ष का पत्ता एक बार टूट जाता है तो पुनः अपनी जगह पर स्थापित नहीं हो सकता। इसी तरह एक बार मनुष्य जीवन समाप्त होने पर यह पुनः प्राप्त नहीं होगा इसलिए इस जीवन को व्यर्थ न जाने दो। इस जीवन में अच्छे कर्म करो और दूसरों को अच्छे कर्म करने हेतु प्रेरित करो। कबीर जी कहते हैं कि मनुष्य को जीवन में मानवता की भलाई के लिए अपना श्रेष्ठतम योगदान देना चाहिए।
व्याख्या: इस दोहे के माध्यम से कबीर जी हर व्यक्ति को प्रेरित करते हुए उसके बहुमूल्य मनुष्य जीवन का अर्थ समझाते हैं और कहते हैं कि अपने इस जीवन को सार्थक करो। हमें यह जीवन बड़ी ही दुर्बलता से मिला है मनुष्य की आत्मा को बहुत सी योनियों में भटकने के पश्चात मनुष्य योनि की प्राप्ति होती है जिसमें वह अपनी बौद्धिक क्षमता को प्राप्त करता है। हमें इस जीवन में अपना सर्वोत्तम योगदान देना चाहिए। हर कार्य को पूरी लगन से करना चाहिए, कभी भी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए, जितना अधिक हम मानवता की भलाई में अपना समय लगा सके हमें उतना अधिक समय मानवता की सेवा में व्यतीत करना चाहिए। अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए जीना चाहिए। क्योंकि यदि एक बार यह जीवन समाप्त हो गया तो पुनः नहीं मिलेगा। ठीक उसी प्रकार जैसे वृक्ष से टूटने के पश्चात पत्ता पुनः वृक्ष पर नही लग सकता उसी तरह एक बार मनुष्य जीवन से टूटने के पश्चात हमारी आत्मा पुनः मनुष्य योनि में नही आएगी।

दोस पराए देखि करि दोहे का अर्थ Dosh Paraye Dekh Kar Doha Meaning in Hindi

Dosh Paraye Dekh Kar Dohe Ka Matlab:
(English Meaning: Seeing Other's Mistake सीइंग अदर्ज मिस्टेक)

दोस पराए देखि करि: दूसरों के दोष देख देख कर
चला हसन्त हसन्त: हंस रहा है उनका मजाक बना रहा है
अपने याद न आवई: खुद के दोषों को भूल गया
जिनका आदि न अंत: जिनकी कोई गिनती ही नही है

इस दोहे में कबीर जी कहते हैं कि ए मनुष्य... तू दूसरों के दोष देख-देख कर हंसता है जब किसी से कोई गलती हो जाती है तो तू उस पर हंसता हुआ चलता है उसका मजाक बनाता है। लेकिन कभी दूसरों का मजाक बनाते हुए तुम्हारे मन में यह बात ध्यान नहीं आई कि तुमने जो दोष किए हैं उनकी भी तो कोई सीमा नही है। तू खुद के दोषों को भूल गया है क्या? कबीर जी की इस सीख को ध्यान में रखते हुए हमें दूसरों के दोष पर हंसने से पहले अपने मन के अंदर झांक लेना चाहिए और हमने जो अनगिनत गलतियां की हैं उनके बारे में सोचना चाहिए। इसलिए किसी के दोषों पर हंसने से अच्छा है कि हम उसे माफ कर खुद के दोषों को सही करने का प्रयास करें। ऐसा इंसान ही सही मायनों में अच्छा इंसान कहलाता है।

व्याख्या: मनुष्य की यह प्रवृति होती है कि वह कभी भी अपनी गलतियों को नहीं देखता। अपनी गलती को तो वह नजर अंदाज कर देता है और दूसरों की गलतियों को उछालता है और उनका मजाक बनाने का प्रयास करता है। कबीर जी के इस दोहे में हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों के दोषों की तरफ ध्यान देने से अच्छा है कि हम अपने खुद के दोष की तरफ ध्यान दें और देखें कि जो गलतियां हमने की हैं क्या वे सही की जा सकती हैं क्योंकि हमारे अपने ही दोष अनगिनत होते हैं तो हमारे पास दूसरों के दोषों के बारे में सोचने का समय होना ही नहीं चाहिए हमें अपनी गलतियों को सही करने में व्यस्त रहना चाहिए।

माला फेरत जुग भया दोहे का अर्थ | Mala Ferat Jug Bhaya Meaning in Hindi

माला फेरत जुग भया: माला फेरते फेरते युग बिता दिए
फिरा न मन का फेर: लेकिन अब तक मन शांत नही हुआ
कर का मनका डार दे: हाथ का मनका छोड़ दे
मन का मनका फेर: मन की माला फेरना शुरू कर

इस दोहे में कबीर जी कहते हैं कि भगवान का नाम लेते लेते, माला जपते-जपतेे तुमने युगों-युग बिता दिए। सारा जीवन तुमने माला के मनके घूमाने में लगा दिया। लेकिन अब तक तुम्हे अपने मन की शांति की प्राप्ति नहीं हुई। जिस मन की शांति के लिए तुम सदा भगवान की माला जपते रहते हो वह शांति तुम्हें आज तक नहीं मिली इसलिए इस हाथ में पकड़े मनके को जिसे तुम माला में डालकर घुमा रहे हो इन्हें छोड़ कर अपने मन के मनको का ध्यान करो। अपने मन को शुद्ध करो, अपने विचार में शुद्धता लाओ तभी तुम्हें मन की शांति की प्राप्त होगी।

व्याख्या: सिर्फ भगवान की स्तुति करना या माला जपते रहने से मन शांत हो जाएगा ऐसा सोचना गलत है। क्योंकि मन की शांति तभी मिलती है जब इंसान कर्म अच्छे करें और अपने मन और विचारों में शुद्धता लाए। किसी के भी प्रति ईर्ष्या की भावना न रखे। आज जिस जीवन में हम जी रहे हैं वहां पर सबसे कठिन कार्य है मन की शांति लाना और यह मन की शांति तभी आ सकती है जब मनुष्य का मन उसके नियंत्रण में हो। मनुष्य को अपने मन को नियंत्रण में रखना चाहिए। मन पर नियंत्रण होगा तो विचारों पर नियंत्रण होगा और विचारों पर नियंत्रण होने से ही हमें मन की शांति का अनुभव होगा। इसलिए भगवान की स्तुति अपनी जगह है और वह तब तक तुम्हारे काम नहीं आएगी जब तक तुम्हारा मन शुद्ध नहीं होगा। इसलिए हाथ में पकड़ीे माला फेरने से अच्छा है कि अपने मन को नियंत्रित करो और मन की माला फेरो।

धीरे-धीरे रे मना दोहे का अर्थ | Dheere Dheere Re Mana Meaning in Hindi

धीरे-धीरे रे मना: मेरे हृदय धैर्य रख
धीरे सब कुछ होय: सब कुछ धीरे धीरे होता है
माली सींचे सौ घड़ा: चाहे माली पौधे में 100 घड़े पानी क्यों न डाल लें कोई फायदा नहीं
ॠतु आए फल होय: क्योंकि पौधे पर फल तभी लगेंगे जब फलों का मौसम आएगा।

इस दोहे में कबीर जी अपने मन से बात करते हुए कहते हैं कि है ए मन तू धीरज रख। क्योंकि दुनिया में जो भी होता है वह धीरे-धीरे होता है धीरज के साथ होता है, समय के साथ ही सबकुछ परिपक्व होता है। जल्दबाजी करना उस माली की तरह है जो अपने पौधों में 100-100 खड़े पानी खींच देता है लेकिन उनका कोई लाभ नहीं होता। क्योंकि पौधे पर फल तभी लगेंगे जब फलों का मौसम आएगा। इसीलिए व्यर्थ का परिश्रम करने का कोई लाभ नहीं है जहां पर धैर्य काम आता है वहां पर परिश्रम काम नहीं आता। इसलिए धैर्य रखो धैर्य ही मनुष्य का परम धर्म है और धैर्यवान मनुष्य ही जीवन में सफलता प्राप्त करता है।

व्याख्या: धैर्यवान होकर कार्य करने से सफलता आपके कदम चूमती है जल्दबाजी में कोई भी कार्य करने से हमेशा नुकसान ही होता है और भविष्य में भी आपको इसका कोई लाभ नहीं होता। हो सकता है आपको क्षणिक लाभ दिखाई दे और आपको लगे कि आप जल्दी-जल्दी से सभी काम निपटा रहे हो। लेकिन हो सकता है बाद में वह काम बिगड़ने शुरू हो जाएं। उदाहरण के तौर पर यदि आप कोई मकान बना रहे हैं तो आप को बड़े ही धैर्य से उसकी नींव खोदनी होगी और उसको काफी गहराई से उठाना होगा। लेकिन इसके विपरीत यदि आप जल्दबाजी में कम गहरी नींव पर ही अपना मकान बनाना शुरु कर देंगे तो हो सकता है जल्द ही यह गिर जाए। इस प्रकार आपका सारा परिश्रम, धन और समय नष्ट हो जाएगा। इसलिए धैर्य से काम करें धैर्य से चलेंगे तो जब समय आएगा तब आपको सब कुछ अपने आप ही प्राप्त हो जाएगा यही इस दोहे का मूल है जिसे हमें अपने जीवन में उतारना चाहिए।

तिनका कबहुँ ना निन्दिये दोहे का अर्थ | Tinka Kabhu Na Nindiye Meaning in Hindi

तिनका कबहुँ ना निन्दिये: एक तिनके को कभी भी तुच्छ नही समझना चाहिए
जो पाँवन तर होय: जो हमेशा पाँव के नीचे रहता है
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े: लेकिन जब कभी उड़ कर आँखों में पड़ जाए
तो पीर घनेरी होय: तो बहुत अधिक पीड़ा देता है

इस दोहे में कबीर जी कभी भी किसी की निंदा न करने की सलाह देते हुए कहते हैं कि चाहे कोई कितना भी तुच्छ क्यों ना लगे। हमें कभी भी किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए और उदाहरण देते हुए कबीर जी कहते हैं कि जैसे एक तिनका जिसकी कीमत कुछ भी नहीं होती और जो सदैव पांव के नीचे पड़ा रहता है उसकी भी निंदा नहीं हमें करनी चाहिए क्योंकि जब कभी वह तिनका हवा में उड़कर आंख में चला जाता है तो असहनीय पीड़ा देता है। इसीलिए किसी को भी कम नहीं आंकना चाहिए और किसी की भी निंदा नहीं करनी चाहिए हर कोई अपनी जगह श्रेष्ठ है। आप अपनी जगह श्रेष्ठ हैं और सामने वाला अपनी जगह। बात समय की है समय आने पर कौन कितना प्रभावी हो जाएगी यह कोई नहीं बता सकता।

व्याख्या: इस दोहे के जरिए कबीर जी बताने का प्रयास करते हैं कि यदि हमें कोई व्यक्ति कमजोर लग रहा है तो इसका अर्थ यह नहीं कि हम उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दें या उसे कुछ भी ना समझे और तुच्छ समझने लगे। क्योंकि समय बहुत ही बलवान है और कुछ नहीं पता कि कौन कब और कैसे किस प्रकार से क्षति पहुँच दे। उदाहरण के तौर पर आपने एक शेर और चूहे की कहानी अवश्य सुनी होगी जिसमें शेर के शिकंजे में एक चूहा फंस जाता है और जान की गुहार लगाते हुए कहता है कि हे सिंह राज आज मुझे बख्श दीजिए और जब समय आएगा तो मैं आपकी सहायता करूंगा। शेर चूहे पर हँसने लगता है और कहता है कि तुम जैसा तुच्छ और निर्लज प्राणी मेरी क्या सहायता करेगा। लेकिन फिर भी शेर को उस चूहे पर तरस आ जाता है और वह उसे बख्श देता है। इसके पश्चात जब एक बार शेर शिकारी के जाल में फंस जाता है तो वही चूहा उस जाल को अपने दांतों से कुतरकर शेर को आजाद करवाता है और इस प्रकार वह असहाय और निर्लज दिखने वाला चूहा शेर की जान बचा देता हैं इसलिए कभी भी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए। समय आने पर हर कोई बलवान है हर कोई शक्तिशाली है।

Machli Jal Ki Rani Hai Meaning in Hindi मछली जल की रानी है का अर्थ

Machli Jal Ki Rani Hai Ka Matlab Aur Paribhasha:

मछली जल की रानी है एक हिंदी की प्रसिद्ध बाल कविता है। इस कविता का कोई विशेष अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह पूर्णतः सरल हिन्दी में रचित है। फिर भी आइए इसके बारे में थोड़ी जानकारी एकत्रित कर लेते हैं बच्चों के लिए मनोरंजन का मुख्य विषय बन चुकी यह कविता मूल रूप से वर्ष 1950 के दशक में रमेश भाई द्वारा लिखी गई थी जो कि अपने प्रसिद्ध लेखन सबंधित कार्य के लिए जाने जाते थे। कालांतर में यह चार लाइने बहुत अधिक प्रचलित हो गई और विशेषकर छोटे बच्चों के लिए शुरूआत की कुछ विशेष कविताओं में इस कविता ने मुख्य स्थान प्राप्त कर लिया। इसके अलावा कुछ अन्य प्रसिद्ध बाल कविताएं जैसे कि: मुर्गा बोला कुकड़ू कु, देखो छोटा सा खरगोश, क्यों रे बेटा मोहन लाल इत्यादि हास्य कविताएं बच्चों के मनोरंजन का मुख्य साधन बनती हैं और उन्हीं में से एक कविता है मछली जल की रानी है।

इसके अलावा आपको पता होना चाहिए कि वर्ष 2014 में "मछली जल की रानी है" नाम से एक फिल्म भी रिलीज की गई थी जिसमें स्वरा भास्कर जैसी प्रसिद्ध अभिनेत्रियों ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि यह बच्चों से सबंधित न होकर एक भूतिया फिल्म थी। आइए "मछली जल की रानी है" (English: Fish is the Queen of Water) कविता की चारों प्रसिद्ध पंक्तियां देखते हैं।

मछली जल की रानी है...
जीवन उसका पानी है...
हाथ लगाओ डर जाएगी...
बाहर निकालो मर जाएगी...

क्वोरा का अर्थ | Quora Meaning in Hindi

क्वोरा या जिसे कभी-कभी कोरा भी लिखा जाता है एक वेबसाइट है जिस पर कुछ उपयोगकर्ता अपने प्रश्न करते हैं तो कुछ उनका उत्तर देते हैं। इसकी विशेषता यह है कि इस पर कोई भी व्यक्ति प्रश्न कर सकता है और कोई भी व्यक्ति उत्तर दे सकता है और यदि आपको किसी व्यक्ति का उत्तर पसंद आता है तो आप उसे अपवोट देकर शीर्ष स्थान पर पहुँचने में सहायता कर सकते हैं और यदि कोई उत्तर पसंद नही आता तो डाउनवोट कर उस उत्तर से उसका शीर्ष स्थान छीन कर नीचे की तरफ धकेल सकते हैं। इस वेबसाइट पर पूछे जाने वाले प्रश्नों में बहुत से प्रश्न खुद क्वोरा से सबंधित होते हैं उन्ही में से एक प्रश्न है कि क्वोरा का हिन्दी में अर्थ क्या होता है। मूल रूप से क्वोरा नाम के दो अर्थ निकाले गए हैं पहले अर्थ के अनुसार क्वोरा तीन भागों से मिलकर बना शब्द है Qu+or+a = Quora अब इसमें Qa अर्थात क्वेश्चन (प्रश्न); or अर्थात "और या तथा" व a अर्थात आंसर (उत्तर); इस प्रकार इस शब्द का सयुंक्त अर्थ निकला (Question or Answer) प्रश्न और उत्तर। और बहुत से उपयोगकर्ता इस अर्थ को वैध भी मानते हैं। इसके अलावा कोरा की एक फुल फॉर्म भी निकाली गई है जिसके अनुसार Quora का अर्थ होता है Q-क्वेश्चन u-यूजर o-ऑब्जरवेशन r-रिसर्च a-आंसर। मतलब उपयोगकर्ता प्रश्न को देखते हैं ऑब्ज़र्व करके रिसर्च करते हैं और उत्तर देते हैं।

Quora हिन्दी में दो तरह लिखा जा सकता है:
1. क्वोरा
2. कोरा
लेकिन ध्यान देने योग्य है कि यह दोनों ही अर्थ इस वेबसाइट के अधिकारियों द्वारा प्रमाणित नहीं किए गए है जिस कारण यह माना जाता है कि क्वोरा का कोई हिंदी अर्थ नहीं है यह सिर्फ एक नाम है जैसे कि किसी भी व्यक्ति का नाम होता है, किसी भी वेबसाइट का नाम होता है या किसी भी एप्लीकेशन का नाम होता है। जरूरी नही कि हर English नाम का हिन्दी अर्थ हो। कुछ नाम ऐसे ही नाम रख दिए जाते हैं वैसा ही एक नाम है क्वोरा जिसका हिंदी में कोई अर्थ नहीं है। यदि आप क्वोरा का प्रयोग करते हैं तो अपने विचार टिप्पणी के माध्यम से दे सकते हैं आपकी सार्थक टिप्पणी प्रकाशित की जाएगी।

नाम प्रयोग किए जाने के उदाहरण:
1. क्या तुम मुझे जानकारियां लेने के लिए क्वोरा वेबसाइट का प्रयोग करते हो। अगर नहीं करते तो तुम्हें करना चाहिए क्योंकि वह है एक अब हिंदी में भी अवेलेबल है।
2. कोहरा एक बहुत अच्छा माध्यम है उन लोगों के लिए जो किसी विशेष क्षेत्र से जुड़ी जानकारियां उस क्षेत्र के श्रेष्ठतम लोगों से प्राप्त करना चाहते हैं।
3. क्वोरा का वास्तव में कोई हिन्दी अर्थ नहीं होता लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों सभी इसका हिंदी अर्थ खोजने हेतु प्रयासरत हैं।
4. अगर आप अपने प्रश्नों का सटीक और सरल भाषा में उत्तर पाना चाहते हैं तो आपको क्वोरा का प्रयोग करना चाहिए।
5. हालांकि क्वोरा से कोई भी विशेष आमदनी प्राप्त नहीं होती लेकिन फिर भी लोगों में अपना ज्ञान बांटने का उत्साह इतना अधिक है कि उन्हें गोरा की आदत लग चुकी है।

रफ्ता रफ्ता का अर्थ | Rafta Rafta Meaning in Hindi

Rafta Rafta Ka Matlab Aur Paribhasha:
(English Meaning: Slowly Slowly स्लोउली स्लोउली)

रफ्ता रफ्ता एक उर्दू का शब्द है जो कि लगातार दो बार क्रम में प्रयोग किया जाता है जैसे हिंदी में धीरे-धीरे शब्द का प्रयोग किया जाता है वसे ही उर्दू में रफ्ता-रफ्ता कहा जाता है। रफ्ता-रफ्ता शब्द का हिंदी में अर्थ होता है धीरे-धीरे। यह शब्द विशेषकर धीरे-धीरे लेकिन क्रम में घटित हो रही घटनाओं के लिए प्रयोग किया जाता है। एक के बाद एक धीरे-धीरे होने वाली घटनाओं को रफ्ता-रफ्ता शब्द से दर्शाया जाता है। यह शब्द "रफ्ता-रफ्ता देखो आंख मेरी लड़ी है" नामक गाने में प्रयोग किए जाने के कारण काफी प्रचलित हुआ है हालांकि उर्दू की शायरियों में इस शब्द का प्रयोग बहुतयात तौर पर पहले ही किया जाता था। आम बोलचाल में देखा जाए तो हिंदी भाषी क्षेत्र में यह शब्द प्रयोग नहीं किया जाता लेकिन फिर भी इस गाने के प्रसिद्ध होने के बाद यह शब्द हिंदी भाषियों द्वारा जाना जाने लगा है।

उदाहरण सहित वाक्य:

1. रफ्ता रफ्ता हम उनके इतने करीब आ गए।

2. रफ्ता-रफ्ता बढ़ते चलो मंजिल अब दूर नहीं।

3. चाहतों के सिलसिले रफ्ता रफ्ता चला करते हैं।

पर्यायवाची शब्द:

धीरे-धीरे, मंद-मंद, शनै: शनै:, इत्मीनान से, आहिस्ता-आहिस्ता, ढीला-ढीला, विलंब से

विलोम शब्द:

तीव्र, शीघ्र, तेजी से, उग्रता से, जल्दी-जल्दी, तेज-तेज, वेग से, फुर्ती से

खरी मजदूरी चोखा दाम का अर्थ | Khari Majdoori Chokha Daam Meaning in Hindi

खरी मजदूूरी चोखा दाम एक लोकोक्ति है जिसका प्रयोग आम बोलचाल में किया जाता है हालांकि कुछ जगह पर इसे "खरी मजूरी चोखा काम" भी बोला जाता है लेकिन इसका शुद्ध रूप "खरी मजदूरी चोखा दाम" है। इस लोकोक्ति का प्रयोग वहां पर किया जाता है जहां पर काम भी अच्छा किया जाए और उसके लिए भुगतान भी अच्छा मिले। इस लोकोक्ति के शब्दों को इस प्रकार समझ सकते हैं "खरी मजदूरी" अर्थात "पूरी लगन से काम करना" "चोखा दाम" अर्थात "अच्छा खासा पैसा मिलना" इस प्रकार अच्छी तरह से पूरी लगन से काम करने के पश्चात जब अच्छा मूल्य मिलता है तो इसके लिए यह लोकोक्ति प्रयोग की जाती है और कहा जाता है खरी मजूरी चोखा दाम। आइए कुछ वाक्य देखते हैं।

उदाहरण:
1. मोहन ने सारा दिन पूरी लगन से अपनी दिहाड़ी की और जाते हुए अपनी कमाई के रुपए मालिक से लिए। साथ ही मालिक ने उसके काम से खुश होकर खाने-पीने के लिए कुछ पैसे अतिरिक्त दे दिए। इसे कहते हैं खरी मजूरी चोखा दाम।
2. साहब तोल-भाव का काम हम नही करते। काम में कोई कमी हो तो बताना बस दाम में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। हमारा तो एक ही हिसाब है खरी मजदूरी चोखा दाम।

आरम्भ है प्रचंड लिरिक्स का अर्थ Aarambh Hai Prachand Lyrics Meaning in Hindi

शुद्ध हिंदी शब्दों का प्रयोग कर कुछेक जोश भरे गीतों में से एक असाधारण भव्य गीत है "आरंभ है प्रचंड" जिसका अर्थ होता है "शुरुआत भयंकर है" इस गीत के बोल (लिरिक्स) "पीयूष मिश्रा" ने लिखें हैं और वर्ष 2009 में रिलीज हुई फिल्म "गुलाल" में यह वीर रस से परिपूर्ण गीत प्रदर्शित किया गया था।

(English Meaning: Beginning is Frightful बिगनिंग इज़ फ्राइटफुल)

गीत का नाम: आरम्भ है प्रचंड
गीत के बोल: पीयूष मिश्रा
फ़िल्म: गुलाल
भाषा: हिन्दी

Aarambh Hai Prachand Lyrics & Translation in Hindi:

आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड...
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो...

शुरआत बड़ी भयंकर है, सभी मस्तक बोल रहे हैं...
आज इस जंग के क्षण की रक्षा तुम करो...

आन बान शान या कि जान का हो दान...
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो...

अपना गौरव, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, शान ओ शौकत यहाँ तक कि जान का भी दान देना पड़े...
तुम इन सब की ताकत अपने धनुष में चढ़े तीर पर केंद्रित कर दो...

मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले...
वही तो एक सर्वशक्तिमान है...

जो अपनी इच्छा से प्राण त्यागे और अपनी इच्छा से प्राण हरे...
वो ही सर्वशक्तिमान कहलाता है...

कृष्ण की पुकार है, ये भागवत का सार है...
कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है...

कृष्ण की पुकार और गीता का मूल ये ही कहता है...
कि युद्ध वीरता का प्रमाण है...

कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो...
जो लड़ सका है वो ही तो महान है...

चाहे कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का स्थान हो...
जिसमें लड़ने की हिम्मत है वोही महान कहलाता है...

जीत की हवस नहीं, किसी पे कोई वश नहीं...
क्या ज़िन्दगी है ठोकरों पे मार दो...

अगर जीत की हवस न हो, किसी पर नियंत्रण न रख सको...
तो ये कोई ज़िंदगी किस काम की इसे समाप्त कर दो...

मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें...
ये जा के आसमान में दहाड़ दो...

अगर मौत सफर का आखिर नही है तो उससे डरना ही क्यों...
ये बात सारे आसमान में गूंजा दो...

वो दया का भाव, या कि शौर्य का चुनाव...
या कि हार का वो घाव तुम ये सोच लो...

दया दिखानी है, या वीरता और पराक्रम दिखाना है ये तुम चुनो...
या सोच लो कि क्या तुम्हे हारने का दुख सहना है...

या कि पूरे भाल पे जला रहे विजय का लाल...
लाल यह गुलाल तुम ये सोच लो...

तुम्हारे तीर की नोक पर लाल रंग चढ़ा रहे...
सोच लो कि क्या तुन्हे ये लाल गुलाल चाहिए...

रंग केसरी हो या मृदंग केसरी हो या कि केसरी हो ताल तुम ये सोच लो...

तुम्हारा रंग केसरी हो, या जीत के नगाड़े केसरी हों या हथेली केसरी हो ये तुम सोचो...

जिस कवि की कल्पना में, ज़िन्दगी हो प्रेम गीत... उस कवि को आज तुम नकार दो...

जो कवि अपनी कविताओं में कहता है कि जीवन प्यार भरा गीत है उसे दरकिनार करो... (जीवन कड़े संघर्ष का नाम है)

भीगती मसों में आज, फूलती रगों में आज...
आग की लपट का तुम बघार दो...

भीगते - जोश से भरी नसों में आज तुम...
आग की लपटें फैला दो...

आरम्भ है प्रचंड…
शुरुआत भयंकर है...

अमोनियम नाइट्रेट का अर्थ | Ammonium Nitrate Meaning in Hindi

04 अगस्त 2020 को लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बड़ा विस्फोट हुआ। जिसमें 73 लोगों की मौत हुई तथा 4000 के करीब लोग घायल हो गए। इस हादसे के ब...