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अक्तूबर 15, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

साम्यवाद का अर्थ | Samyavad Meaning in Hindi

साम्यवाद एक ऐसी आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था या दर्शन है जो सभी संसाधनों पर संपूर्ण समाज के बराबर अधिकार का पक्ष लेता है। यह व्यक्तिवाद तथा पूंजीवाद का विरोधी है। साम्यवाद के अनुसार संसार प्रत्येक युग में सदैव दो भागों में बंटा रहा है एक शोषक और दूसरा शोषित। साम्यवाद शोषक वर्ग उसे मानता है जिसके पास संसार में मौजूद संसाधनों का स्वामित्व होता है। दुनिया में जितने भी संसाधन है चाहे वह धरती से उपजी फसल हो, प्राकृतिक संसाधनों में बहता जल हो या कोई ऐसी वस्तु जो हम पृथ्वी से प्राप्त करते हैं उन पर किसी के भी एकाधिकार का साम्यवाद विरोध करता है। साम्यवाद मानता है कि जिसका भी अधिकार इन संसाधनों पर होगा वह दूसरों का शोषण करेगा। इसलिए इन संसाधनों पर किसी का अधिपत्य नहीं होना चाहिए। साम्यवाद एक ऐसे समाज की कल्पना करता है जिसमें कोई सरकार ना हो किसी प्रकार के शोषक का समावेश ना हो। सिर्फ व्यक्ति ही अपनी आवश्यकतानुसार संसाधनों का प्रयोग करे और एक ऐसा जीवन जिए जिसमें संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा न करनी पड़े। साम्यवाद का मानना है कि राज्य (अर्थात सरकार) शोषकों को बल देती है इसलिए समाज में सरकार का कोई अस

समाजवाद का अर्थ | Samajvad Meaning in Hindi

समाजवाद आर्थिक और सामाजिक सामंजस्य से बनी एक व्यवस्था है जिसे हम आर्थिक सामाजिक दर्शन भी कहते हैं। समाजवाद व्यक्तिवाद और पूंजीवाद का विरोधी है यह एक ऐसे समाज की कल्पना करता है जिसमें सभी व्यक्ति आर्थिक व सामाजिक रूप से समान हों। समाजवाद चाहता है कि समाज में यह समानता राज्य अर्थात सरकार द्वारा प्रदान की जाए। राज्य नए नियम बनाए तथा नई-नई व्यवस्थाओं के जरिए समाज के सभी व्यक्तियों को बराबर स्थान दे। समाजवाद ऐसी व्यवस्था की कड़ी निंदा करता है जिसमें कोई एक व्यक्ति पूंजीपति बनता है समाजवाद चाहता है कि दुनिया में जो अमीरी और गरीबी के बीच की खाई है उसे भरा जा सके कोई भी अमीर-गरीब न हो। हर एक को उतना ही मूल्य ही मिले जितना वह कार्य करे। उदाहरण के तौर पर हम देखते हैं कि कई पूंजीपति बैठे-बिठाए ही लाखों-करोड़ों की कमाई करते हैं लेकिन वहीं एक मजदूर जो दिन भर मेहनत करता है वह एक दिन में मात्र 250 या 500 रुपए ही कमा पाता है। समाजवाद इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहता है वह चाहता है कि यदि एक मजदूर एक पूंजीपति से ज्यादा कार्य कर रहा है तो मजदूर को ज्यादा वेतन मिलना चाहिए और उस पूंजीपति को कम और पूंजीपत