आमंत्रण व निमंत्रण में अंतर | Difference Between Amantran and Nimntran

आमंत्रण व निमंत्रण दोनों शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची प्रतीत होते हैं लेकिन वास्तव में इन दोनों शब्दों में कुछ सूक्ष्म अंतर हैं जो इन्हें एक दूसरे से भिन्न बनाते हैं। हिंदी भाषा को गहराई से समझने के लिए इन दोनों शब्दों के बीच केे इन सूक्ष्म अंतरों को समझना अनिवार्य है। आमंत्रण व निमंत्रण शब्द में निम्न अंतर हैं।


1. आमंत्रण शब्द का प्रयोग उस समय किया जाता है जब सामने वाले व्यक्ति का आना उसकी अपनी स्वेच्छा पर निर्भर करता है यदि वह आना चाहे तो आ सकता है और यदि उसे कोई समस्या है तो वह नही भी आ सकता इसमें आने की कोई अनिवार्यता नही होती। उदाहरण के तौर पर जागरण इत्यादि के आयोजन में आमंत्रण भेजा जाता है जिसमें लोग स्वेच्छा से आते हैं यदि कोई व्यक्ति नही आना चाहे तो वह उसकी अपनी इच्छा होती है। वहीं किसी कवि या गायक को स्टेज पर बुलाने के लिए भी आमंत्रित ही किया जाता है।

वहीं निमंत्रण शब्द का प्रयोग उस समय किया जाता है जब सामने वाले व्यक्ति के आने में अनिवार्यता का भाव हो अर्थात उसका आना अनिवार्य हो। उदाहरण के तौर पर शादी-विवाह या किसी पारिवारिक कार्यक्रम में निमंत्रण भेजा जाता है जिसमें आने की अनिवार्यता का भाव निहित होता है।

2. आमंत्रण में भोजन इत्यादि के इंतजाम का भाव नही होता इसमें केवल औपचारिकता का भाव होता है।

निमंत्रण में भोजन इत्यादि के इंतजाम का भाव होता है और यह अनौपचारिक व भावनात्मक होता है।

3. आमंत्रण आमतौर पर मौखिक रूप में दिया जाता है जैसे किसी को कह देना कि "आप कल हो रही पूजा में आमंत्रित हैं"।

निमंत्रण को लिखित रूप में भेजा जाता है जो आने की अनिवार्यता को और सदृढ़ करता है। इसलिए आपको अपने रिश्तेदारों से निमंत्रण पत्र मिलता है न कि आमंत्रण पत्र।

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