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Union Budget Meaning in Hindi | आम बजट का अर्थ


भारत सरकार कई तरह के बजट पेश करती है जैसे आम बजट, रेलवे बजट, आंतरिक बजट इत्यादि तो इन सब बजट के अलग-अलग मायने होते हैं लेकिन जो बजट सबसे अधिक प्रचलित है और सरकार द्वारा सर्वाधिक बार पेश किया जाता है वह बजट है आम बजट। जिसे अंग्रेजी में हम Union Budget (यूनियन बजट) के नाम से जानते हैं. तो आज इस आर्टिकल हम जानेंगे कि आम बजट क्या है और यह अन्य बजट से किस प्रकार अलग होता है।

सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि भारत सरकार द्वारा जो पैसा टैक्स या अन्य माध्यमों से एकत्रित किया जाता है उसे सरकार द्वारा सीधा प्रयोग नहीं किया जा सकता है यहां सरकार से तात्पर्य कार्यपालिका से है। सरकार का वह तंत्र जो हमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों व नेताओं आदि के रूप में स्पष्ट दिखाई देता है उसे कार्यपालिका कहते हैं। सरकार द्वारा एकत्रित किया गया पैसा कार्यपालिका द्वारा सीधा प्रयोग नहीं किया जा सकता। इस पैसे का प्रयोग करने के लिए सरकार को संसद से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति लेने के लिए सरकार को संसद में एक बजट पेश करना पड़ता है। इसके बाद संसद में बजट पर बहस होती है तथा इस बात का निर्णय लिया जाता है कि सरकार को खर्च करने के लिए कितने पैसे दिए जाने चाहिए ताकि वह देश में अपनी नीतियां व कार्य चला सके।

इसलिए सरकार को एक बजट पेश करना पड़ता है। बजट सरकार द्वारा दिया जाने वाला आगामी वर्ष का लेखा-जोखा होता है जिसमें सरकार यह बताती है कि वह आने वाले वर्ष में किस प्रकार से कमाई करेगी, कितने नए टैक्स लगाएगी, कितनी नई नीतियां बनाएगी इत्यादि और साथ ही सरकार यह भी बताती है कि वह किस क्षेत्र में कितना खर्च करेगी। अब सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों में किए जाने वाले कुल खर्चे को जोड़कर जो कुल राशि बनती है सरकार उस राशि की मांग संसद से करती है और फिर संसद के दोनों सदनों में उस बजट के बारे में और उस राशि पर बहस की जाती है यदि दोनों सदनों को लगता है कि सरकार द्वारा मांगी जाने वाली राशि वाजिब है तो वह राशि सरकार को दे दी जाती है जिसके बाद सरकार अपने कार्यों के लिए संसद द्वारा दिए गए पैसे का प्रयोग करती है।

इस प्रकार सरल शब्दों में कहें तो प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला आगामी वर्ष के खर्च और आमदनी का ब्यौरा आम बजट के नाम से जाना जाता है और प्रत्येक वर्ष फरवरी के माह में सरकार आम बजट पेश करती है और यह फाइनेंशियल ईयर अर्थात वित्त वर्ष के लिए होता है। वित्त वर्ष की शुरुआत 01 अप्रैल से होती है जो कि अगले साल 31 मार्च को समाप्त होता है। इस प्रकार आने वाले वर्ष में खर्च चलाने के लिए सरकार को प्रत्येक वर्ष संसद से पैसा लेना पड़ता है और इसके लिए एक ब्यौरा देना पड़ता इसी ब्यौरे को बजट या आम बजट के नाम से जाना जाता है।

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