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जनवरी 27, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Mushtaq Meaning in Hindi +| मुश्ताक़ का अर्थ

मुश्ताक़ मूल रूप से अरबी/ उर्दू भाषा का शब्द है जिसका हिंदी में मतलब होता है "इच्छुक होना या आकांक्षा रखना" अर्थात यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु की इच्छा रखता है तो उसे कहा जा सकता है कि वह व्यक्ति उस वस्तु को पाने का आकांक्षी है उस वस्तु का मुश्ताक़ है। उदाहरण के तौर पर यदि कहा जाए कि "मैं तुम्हारा दीदार करने का मुश्ताक़ हूँ" तो इसका अर्थ होगा कि "मैं आपको देखने का इच्छुक हूँ"। मुश्ताक़ को English में Desirous (डिजायर्स) कहा जाता है। इस शब्द को स्पष्ट रुप में समझने के लिए हम सूफी गायक सरताज द्वारा गाए गए पंजाबी गाने मुश्ताक़ की कुछ पंक्तियों का उदाहरण ले सकते हैं यह पंक्तियां इस प्रकार हैं: मुश्ताक़ दीदारां दे... बुहे ते जवानी रोल्ल ती... तक्क जिगरे यारां दे... अर्थात दीदार करने की इतनी इच्छा है... कि इंतज़ार में हमने सारी उम्र गवां दी... देखो हमारा हौसला कितना ज्यादा है... यहाँ पर प्रथम पंक्ति में "इच्छा" शब्द "मुश्ताक़" का पर्यायवाची है।

Jazakallah Meaning in Hindi | जज़ाकल्लाह का अर्थ

जज़ाकल्लाह एक अरबी भाषा का शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है पहला शब्द है जज़ाक जिसका अर्थ होता है कल्याण करना तथा दूसरा शब्द है अल्लाह जिसका अर्थ होता है ईश्वर। जब अरबी में जज़ाकल्लाह बोला जाता है तो इसका मतलब होता है "अल्लाह तुम्हें खुश रखे" या "भगवान तुम्हारा कल्याण करे"। यहां पर ध्यान देने योग्य है कि जज़ाकल्लाह शब्द अपने आप में संपूर्ण नहीं है बल्कि जज़ाकल्लाह के साथ "खैर" शब्द लगाने के पश्चात ही यह शब्द पूर्ण होता है अर्थात यदि बोला जाए "जज़ाकल्लाह खैर" तब ही इसका संपूर्ण अर्थ "अल्लाह तुम्हे खुश रखे या अल्लाह तुम्हारी खैर करे" निकलता है। परंतु आम बोलचाल में अकेला "जज़ाकल्लाह" शब्द ही प्रचलित है।

Waju Meaning in Hindi | वजू का अर्थ

वजू शब्द मुस्लिम धर्म से जुड़ा हुआ है। जब मुस्लिम धर्म में नमाज पढ़ी जाती है तो उससे पूर्व शुद्धि के लिए हाथ पांव धोए जाते हैं तथा हाथ पाँव धोने की इसी शुद्धि क्रिया को "वजू" कहा जाता है। वजू करने के लिए मुस्लिम धर्म में कुछ नियम बनाए गए हैं जिसके अनुसार शरीर के जिस भाग को वजू किया जाता है उसका पूरी तरह भीगना अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर यदि हाथ में अंगूठी पहनी हो तो वजू करते समय पानी का अंगूठी के नीचे तक जाना अनिवार्य है तभी वजू संपूर्ण हुआ माना जाता है। वहीं यदि पाँव धोया है तो पूरे पाँव का भीगना अनिवार्य है यदि किसी जगह से पाँव सूखा रह जाता है तो वजू संपूर्ण हुआ नही माना जाता।

इन शब्दों के अर्थ भी जानें :