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भूमि पूजन का अर्थ | Bhumi Pujan Meaning in Hindi

05 अगस्त 2020 का दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए तय किया गया है। यह भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। तो ऐसे में हमारे सामने कुछ प्रश्न आते हैं जैसे कि भूमि पूजन क्या होता है, यह क्यों करवाया जाता है, हिंदू धर्म में इसके लिए क्या विधि बताई गई है साथ ही राम मंदिर के भूमि पूजन की पूरी रूपरेखा क्या है इत्यादि तो चलिए इन सब प्रश्नों के उत्तर तलाशने की कोशिश करते हैं।



दरअसल हिंदू धर्मग्रंथ में धरती को माता का दर्जा दिया गया है। धरती को सम्‍मान देने हेतु शास्‍त्रों में भूमि पर किसी भी कार्य की शुरूआत से पूर्व उसके पूजन का विधान रखा गया है।

शास्त्रों के अनुसार यदि किसी भूमि पर पूर्व में कोई दोष हो तो उस भूमि को खरीदने वाले व्‍यक्‍ति को दोष मुक्ति के लिए भूमि पूजन करवाना चाहिए।

ऐसा करने से उस भूमि की अपवित्रता व दोष समाप्त हो जाते हैं। साथ ही भविष्य में उस भूमि से जुड़ी आने वाली बाधाओं व परेशानियों से भी मुक्‍ति मिलती है।

ज्योतिषों के अनुसार पूजन के समय ब्राह्मण को उत्तर मुखी होकर पालथी मारकर बैठना चाहिए। वहीं जातक (जो पूजन करवा रहा है) को पूर्व की ओर मुख कर बैठना चाहिए। यदि जातक विवाहित है तो अपने बांयी तरफ अपनी पत्नी को बिठाना चाहिए।

इसके बाद मंत्रोच्चारण से शरीर, स्थान एवं आसन की शुद्धि की जाती है। तत्पश्चात भगवान श्री गणेश जी की आराधना की जाती है। भूमि पूजन में चांदी के नाग व कलश की पूजा की जाती है। वास्तु विज्ञान और शास्त्रों के अनुसार भूमि के नीचे पाताल लोक है जिसके स्वामी भगवान विष्णु के सेवक शेषनाग भगवान हैं।

मान्यता है कि भगवान शेषनाग ने अपने फन पर पृथ्वी को उठा रखा है। चांदी के सांप की पूजा का उद्देश्य भगवान शेषनाग की कृपा पाना है। माना जाता है कि जिस तरह भगवान शेषनाग पृथ्वी को संभाले हुए हैं वैसे ही वे बनने वाले भवन की देखभाल भी करेंगें।

कलश रखने के पिछे भी यही मान्यता है कि शेषनाग चूंकि क्षीर सागर में रहते हैं इसलिये कलश में दूध, दही, घी डालकर मंत्रों द्वारा शेषनाग का आह्वान किया जाता है ताकि शेषनाग भगवान का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिले।

कलश में सिक्का और सुपारी डालकर यह माना जाता है कि लक्ष्मी और गणेश की कृपा प्राप्त होगी। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और भगवान विष्णु का स्वरुप मानकर उनसे प्रार्थना की जाती है कि देवी लक्ष्मी सहित वे इस भूमि में विराजमान रहें और शेषनाग भूमि पर बने भवन को हमेशा सहारा देते रहें।
मान्यता है कि भूमि पूजन के बाद नींव की खुदाई ईशान कोण से शुरू की जानी चाहिए। ईशान कोण पूर्व तथा उत्तर के बीच की दिशा को कहा जाता है।

05 अगस्त 2020 को राम मंदिर भूमि पूजन के बाद शिलान्यास (नींव डालना) का कार्यक्रम है जिसके लिए 21 वेद के विद्वानों को चुना गया है।

इस पूरे कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूरदर्शन पर सुबह 6:00 बजे से किया जाएगा। वहीं अन्य न्यूज चैनल भी लाइव कवरेज प्रस्तुत करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी पहले से ही तय 12:15 बजे पवित्र अभिजित मुहूर्त में चांदी की ईंट से राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे।
अभिजीत मुहूर्त ऐसे समय को कहा जाता है जो अति शुभ माना गया हो तथा जिसमें किया गया कार्य विजय को प्राप्त होता है। आमतौर पर यह  11:45 am से 12:45 pm के बीच का समय माना जाता है।

इसके साथ ही वे परिजात वृक्ष लगाएंगे तथा इस अवसर पर अयोध्या वासियों में सवा लाख से अधिक लड्डू बांटे जाएंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस अवसर पर 175 लोगों को आमंत्रित किया गया है जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले 135 संत शामिल हैं।

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