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धार्मिक राष्ट्रवाद का अर्थ | Dharmik Rashtravad Meaning in Hindi

धार्मिक राष्ट्रवाद को समझने से पूर्व हमें राष्ट्रवाद को समझना होगा; दरअसल राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना को कहा जाता है जिसमें किसी साझी विरासत को केंद्र बिंदु मानकर लोगों का एक समुदाय आपस में जुड़ाव महसूस करता हो। जैसे भारत को देखा जाए तो भारत के लोग एक साझा इतिहास रखते हैं। अंग्रेजों के आने से पूर्व भारत बहुत से छोटे खंडों में विभाजित था लेकिन अंग्रेजों को निकाल बाहर करने के उद्देश्य से सभी खंडों के लोग आपस में मिले और एक राष्ट्रीय आंदोलन किया। फलस्वरूप हमें आजादी मिली।

तो वो जो एक साझा इतिहास है जिसमें सभी भारतीयों ने अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म सहे और फिर संघर्ष कर उनसे आजादी पाई उस इतिहास ने सभी भारतीयों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया और जुड़ाव की यही भावना भारतीय-राष्ट्रवाद कहलाती है।

भारतीय-राष्ट्रवाद की भावना सदैव भारत की विविधता पर हावी रही है जिस कारण हम एक दूसरे से इतने अलग होते हुए भी एक हैं अर्थात भारत में असंख्य भाषाएं, धर्म, जाति, संस्कृतियां होने के बावजूद भी एक ऐसी भावना है जो हमें एक बनाए रखती है और यही भावना भारतीय-राष्ट्रवाद कहलाती है। दुनिया में जितने भी देशों का एकीकरण हुआ है चाहे वो इटली हो, जर्मनी हो या तुर्की हो; वो राष्ट्रवाद के उदय के चलते ही हुआ है।

राष्ट्रवाद की भावना जब पूरे राष्ट्र से संबंधितयम। हो तो यह एकता का भाव जगाती है वहीं यदि यह धर्म से संबंधित हो तो यह धार्मिक एकता के भाव को जगाती है और धार्मिक राष्ट्रवाद का रूप धारण कर लेती है।

अब किसी ऐसे देश में जहां पूरा देश एक ही धर्म को मानता हो और वो धर्म आगे समुदायों में ना बंटा हो तो धार्मिक राष्ट्रवाद इसके नागरिकों में एक अटूट गठजोड़ बना देता है जो अनंतकाल तक चल सकता है लेकिन वहीं यदि किसी देश का एकीकरण धर्म के आधार पर ना हुआ तथा धर्म आगे समुदायों में बंटा हो तो किसी एक धर्म को राष्ट्रीय दर्जा मिलने से बाकी के धर्म व अल्पसंख्यक समुदाय खुद को देश से टूटा हुआ महसूस करने लगते हैं।

वहीं धार्मिक राष्ट्रवाद धार्मिक ताकतों को मुखर भी बना सकता है। धार्मिक ताकतों के मुखर होने पर तर्क वितर्क से ज्यादा आस्था को तरजीह दी जाने लगती है।

इसीलिए धार्मिक राष्ट्रवाद जहां देश को एकता के सूत्र में बांध सकता है तो वहीं धार्मिक आधार पर विभाजन का कारण भी बन सकता है। इस प्रकार स्थिति अनुसार धार्मिक राष्ट्रवाद के अलग-अलग परिणाम देखे जा सकते हैं।

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