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टाइम कैप्सूल का अर्थ | Time Capsule Meaning in Hindi

हाल ही में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर की नींव रखने से पूर्व 2000 फीट नीचे टाइम कैप्सूल रखे जाने का निर्णय लिया गया है। इस टाइम कैप्सूल में राम जन्मभूमि का संपूर्ण ज्ञात इतिहास दर्ज होगा। तो प्रश्न यहां पर यह उठता है कि टाइम कैप्सूल आखिर होता क्या है, इसे जमीन में क्यों दबाया जाता है और क्या यह हमारे देश में टाइम कैप्सूल दबाए जाने का पहला अवसर है; आइए इन सब प्रश्नों का उत्तर पाने की कोशिश करते हैं।


दरअसल टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है जिसे खास तरह की सामग्री से बनाया जाता है यह जमीन के नीचे सैंकड़ों या हजारों वर्षों तक दबा होने के बावजूद भी गलता-सड़ता नही है। इसलिए इसका प्रयोग हम ऐसे दस्तावेज या सामान को हजारों वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए करते हैं जिसके माध्यम से भविष्य में आने वाली हमारी पीढ़ियों को हमारे मौजूदा समय के बारे में जानकारी दी जा सके।

उदाहरण के तौर पर आज हम 2020 में जी रहे हैं यदि हम कोई जानकारी 3020 में भेजना चाहें तो हम टाइम कैप्सूल की मदद से ऐसा कर सकते हैं; यदि हम आज कोई जानकारी लिखकर टाइम कैप्सूल में डाल कर दबा देते हैं तो 3020 तक अर्थात आज से 1000 साल बाद तक भी वो जानकारी ऐसे ही सुरक्षित रहेगी।

इस जानकारी के माध्यम से 3020 के लोग यह जान पाएंगे कि 2020 की दुनिया कैसी थी, समाज कैसा था, संस्कृति कैसी थी इत्यादि। ठीक वैसे ही जैसे राजाओं-महाराजाओं ने अपने समय की जानकारी हम तक पहुँचाने के लिए शिलालेखों का सहारा लिया है और आज हमें उस समय के समाज व संस्कृति के बारे में बहुत कुछ ज्ञात है।

तो इस प्रकार वो विशिष्ट सामग्री से बने वो कंटेनर जो किसी विशेष समय की जानकारी को खुद में समेट उसे हजारों वर्ष आगे ले जाने में सक्षम हो; टाइम कैप्सूल कहलाते हैं। आमतौर पर इन्हें किसी भवन इत्यादि की नींव में दबाया जाता है तथा इनमें या तो उस भवन विशेष से जुड़ी जानकारियां होती हैं या उस समयकाल के समाज, अर्थव्यवस्था, शासनव्यवस्था या संस्कृति इत्यादि से जुड़ी जानकारियां होती हैं।

टाइम कैप्सूल पुरातत्वविदों, मानवविज्ञानियों तथा इतिहासकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं; ये इतिहास को जानने का सबसे सरल, सटीक व सस्ता माध्यम है।

आज हम अपने इतिहास के बारे में इतना कुछ जानते हैं वो इसीलिए क्योंकि पुराने समय में हमारे पूर्वजों द्वारा बहुत से स्थानों पर शिलालेख तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सरंक्षित रखे गए थे।

समय के साथ हमने कुछ ऐसे कंटेनर्स तैयार कर लिए हैं जो स्टेनलेस स्टील या विशेष प्रकार के तांबे जैसी धातुओं से बने होते हैं तथा हजारों वर्षों तक सुरक्षित रह सकते हैं। इन कंटेनर्स के ऊपर कुछ नही लिखा होता बल्कि इनके अंदर लिखित दस्तावेजों को डाल कर दबा दिया जाता है।

ऐसे कंटेनर की सहायता से हम समय के साथ नष्ट हो सकने वाले दस्तावेजों को भी हजारों वर्षों तक सुरक्षित रख सकते हैं।

राम मंदिर में इसी प्रकार का कंटेनर (विशेष तांबे से बना) के आकार का टाइम कैप्सूल रखा जाएगा जिसमें अयोध्या, भगवान राम तथा राम मंदिर के बनाए जाने का पूरा इतिहास दर्ज होगा तथा यह इतिहास संस्कृत भाषा में लिखा जाएगा।

ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में स्पेन में 400 वर्ष पुराना टाइम कैप्सूल मिला था जो कंटेनर की शक्ल में नही बल्कि यीशु की मूर्ति के आकार में था। इस मूर्ति के अंदर कुछ दस्तावेज रखे गए थे जिनमें 400 वर्ष पहले की आर्थिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक सूचनाएं दर्ज थी।

आइए अब सिलसिलेवार तरीके से विभिन्न अवसरों पर स्थापित किए गए महत्वपूर्ण टाइम कैप्सूल के बारे में जानते हैं।
1. 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लाल किले के गेट पर "कालपात्र" नामक टाइम कैप्सूल दबाया गया था जिसमें भारत की आजादी के इतिहास से सबंधित जानकारी दर्ज की गई थी।

2. इसके बाद वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल की उपस्थिति में IIT कानपुर के ऑडिटोरियम में टाइम कैप्सूल दबाया गया था।

3. वहीं वर्ष 2010 में महात्मा मंदिर (गांधीनगर, गुजरात) में मंदिर स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर टाइम कैप्सूल दबाया गया था।

4. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भी मौजूदा समय टेक्नोलॉजी से सबंधित जानकारी के साथ टाइम कैप्सूल दबाया जा चुका है।

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