बन्दे उत्कल जननी का अर्थ | Bande Utakal Janani Meaning in Hindi

हाल ही में 07 जून 2020 को बन्दे उत्कल जननी को ओडिशा के राज्य गान का दर्जा दिया गया है। इस गाने को बहुत समय से ओडिशा का राज्य गान बनाए जाने की माँग उठ रही थी। इस बारे में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर जानकारी दी। आइए जानते हैं ओडिशा के इस नए राज्य गान के बारे में...

दरअसल बन्दे उत्कल जननी उड़िया भाषा में लिखित एक देशभक्ति कविता है जिसे कांतकबि लक्ष्मीकांत महापात्रा ने लिखा है।

बन्दे उत्कल जननी का हिंदी में अर्थ होता है "मैं माता उत्कल को नमन करता हूँ" यहाँ पर उपयोग किया गया उत्कल शब्द ओडिशा का प्राचीन नाम है।

बंदे उत्कल जननी ओडिशा की भावना को रेखांकित करता है। यह गीत ओडिशा की शानदार प्राकृतिक सुंदरता, गौरव व इसके पवित्र मंदिरों को चित्रित करता है। इस गीत में ओडिशा की कला, शिल्प और विरासत का बखान है। इसके अलावा ओडिशा के गौरवमयी इतिहास, सुंदर संस्कृति और श्रेष्ठ साहित्य के को इस गीत में संजोया गया है।

ओडिशा की समृद्ध परंपरा व शांत सामाजिक जीवन को तरजीह देने वाले इस भव्य गीत ने कोरोना महामारी के समय में राज्य के लोगों में आत्मविश्वास की भावना भरने का काम भी किया है।

अतः लोगों की भावना से जुड़े इस गीत को राज्य गान का दर्जा देकर ओडिशा सरकार ने लोगों की भावनाओं को सम्मानित किया है।

लाल सलाम और कॉमरेड का अर्थ | Red Salute & Comrade Meaning in Hindi

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को सोशल मीडिया पर कॉमरेड और लाल सलाम कहकर संबोधित किया जा रहा है फेसबुक से लेकर ट्विटर तक वामपंथियों द्वारा इन दो शब्दों का इतना ज्यादा प्रयोग किया गया कि ये शब्द ट्रेंड करने लगे। दरअसल NIA (नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) ने किसान नेता अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था जिसमें यह कहा गया कि "कॉमरेड" और "लाल सलाम" के संबोधन से यह जाहिर होता है कि अखिल गोगोई और उनके सहयोगी देशद्रोह व आंतकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इसके बाद से सोशल मीडिया पर वामपंथी समर्थक सीएम सर्वानंद सोनोवाल को कॉमरेड और लाल सलाम कहकर संबोधित करने लगे। लेकिन प्रश्न यहाँ पर यह उठता है कि इन दो शब्दों में ऐसा क्या है कि इनका इतना ज्यादा विरोध होता है और क्यों इनका प्रयोग देशद्रोह के बराबर माना जाता है।

दरअसल लाल सलाम एक सैल्यूट है जो वामपंथी समर्थक अपने साथियों को देते हैं। लाल सलाम शब्द दक्षिण एशियाई देशों में प्रचलित है भारत में यह शब्द नक्सलवाद, माओवाद व वामपंथ से जुड़े लोगों द्वारा प्रयोग किया जाता है। इसे कभी-कभी सुर्ख सलाम भी कहा जाता है। वहीं इन समूहों से जुड़े लोगों को कॉमरेड कहा जाता है। कॉमरेड का हिंदी में अर्थ होता है साथी।

नक्सलवाद व माओवाद जैसी विचारधाराओं से प्रेरित लोगों को देश के विरूद्ध समझा जाता है क्योंकि ये लोग सरकार का सीधा विरोध करते हैं। वामपंथी विचारधारा में वर्ग संघर्ष की बात कही गई है तथा इसी संघर्ष के आधार पर इन विचारधाराओं से प्रेरित लोगों को हथियार उठाने हेतु प्रेरित किया जाता है।

वामपंथ से जुड़े ज्यादातर शब्दों में "लाल" शब्द का जिक्र आता है। लाल शब्द को खून से जोड़ा जाता है इसलिए यह संघर्ष को परिभाषित करता है। वामपंथी सेना को "रेड आर्मी" कहा जाता है वहीं भारत में वामपंथ से प्रभावित क्षेत्रों को सयुंक्त रूप से "रेड कॉरिडोर" कहा जाता है।

वामपंथ पूंजीवाद का कट्टर विरोधी है इसलिए पूंजीवादी देशों में वामपंथ से जुड़ी मुहिम (विशेषकर जो उग्रवाद को बढ़ावा देती हो) को देशद्रोह से जोड़ कर देखा जाता है।

राजनीतिक चिंतन का अर्थ | Rajnitik Chintan Meaning in Hindi

मूल रूप से सोचने-विचारने की प्रक्रिया को चिंतन कहा जाता है जब भी हम किसी विषय पर सोच-विचार करते हैं तो हम चिंतन कर रहे होते हैं। चिंतन किया जाना भारत के इतिहास का अहम अंग रहा है हालांकि भारतीय चिंतन का झुकाव सदैव धर्म की ओर रहा है। जिस कारण लंबे समय तक लोगों के आदर्श, मूल्य व अधिकार क्या होने चाहिएं इन प्रश्नों का उत्तर केवल धार्मिक दृष्टि से ही दिया गया तथा एक आदर्श राज्य कैसा होना चाहिए इसका उत्तर भी धार्मिक चिंतन से ही खोजने का प्रयास किया गया।

परंतु समय के साथ यह महसूस किया जाने लगा कि धार्मिक चिंतन को राज्य से अलग किया जाना चाहिए क्योंकि धार्मिक चिंतन मौलिकता प्रधान नही कर पा रहा है एक राज्य के क्या कार्य होने चाहिएं इसका उत्तर राज्य का अध्ययन करने के पश्चात दिया जाना चाहिए न कि धर्म का। ताकि चिंतन का स्वरूप मौलिक हो सके और यहीं से राजनीतिक चिंतन की अवधारणा सामने आई।

राजनीतिक चिंतन की परिभाषा के अनुसार "राज्य के कार्य, उत्पति, प्रकृति, लक्ष्य, कानून, अधिकार, शक्ति, सरंचना व राज्य के किसी भी घटक पर सोच-विचार करने की प्रक्रिया को राजनीतिक चिंतन कहा जाता है"

सामान्य तौर पर प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग विषयों पर चिंतन करता है किंतु हमारा चिंतन उस समय राजनीतिक चिंतन बन जाता है जब हम राज्य के किसी घटक पर विचार करते हैं जैसे कि : राज्य सरकार, पंचायत, नगर पालिका इत्यादि। राजनीतिक चिंतन में प्रत्येक व्यक्ति के अपने विचार होते हैं समाज इन्हें मानने या न मानने हेतु स्वतंत्र होता है।

मुख्य भारतीय राजनीतिक चिंतकों में हम मनु और कौटिल्य से लेकर राजा राम मोहन राय और भीमराव अंबेडकर जैसे लोगों का नाम ले सकते हैं।

बहुत बार हम राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक सिद्धांत व राजनीतिक दर्शन में अंतर नहीं समझ पाते क्योंकि ये तीनों शब्द एक जैसे ही प्रतीत होते हैं।

दरअसल राजनीतिक चिंतन से अभिप्रायः राज्य व इसके खड़ों का विचार करने से है। आम व्यक्ति भी जब राज्य के बारे में विचार करता है तो उसे राजनीतिक चिंतक कहा जा सकता है। चिंतन करने के बाद बनाए गए वे विचार जिन पर आधारित होकर कोई व्यवस्था चलती है और जिन्हें वास्तविक जीवन में लागू किया जा सकता है उन्हें राजनीतिक सिद्धांत कहा जाता है। वहीं जब चिंतन करने का उद्देश्य राज्य की स्थापना के अंतिम सत्य को प्राप्त करना हो तो उसे राजनीतिक दर्शन की संज्ञा दी जाती है।

उदाहरण के तौर पर : यह सोचना कि राज्य कैसा है राजनीतिक चिंतन कहलाता है; और राज्य के सभी तत्वों का अध्ययन कर यह विचार बनाना कि राज्य कैसा होना चाहिए यह राजनीतिक सिद्धांत कहलाता है और वहीं पूर्णतः गंभीर होकर यह ज्ञात करने का अंनत प्रयास करना कि वास्तव में राज्य कैसा होना चाहिए? यह राजनीतिक दर्शन कहलाता है।

इस प्रकार चिंतन साधारण विचारों को कहा जाता है; सिद्धांत लागू किए जा सकने वाले विचारों को कहा जाता है तथा दर्शन अंतिम सत्य की खोज करने वाले गंभीर विचारों को कहा जाता है।

राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ | Political Theory Meaning in Hindi

परिचय :

किसी भी विषय को समझने के लिए उसके सिद्धांत को समझना आवश्यक होता है जैसे यदि हमें न्याय को समझना है तो हमें इसके सिद्धांत का अध्ययन करना होगा। अर्थात हमें जानना होगा कि न्याय की परिभाषा क्या है, न्याय क्यों आवश्यक है, न्याय से समाज को क्या लाभ है और न्याय न मिलने से समाज को क्या हानि होती है। इन सब का अध्ययन न्याय के सिद्धांत का अध्ययन कहलाता है। तो इस प्रकार प्रत्येक विषय की जड़ को समझने के लिए उसके सिद्धांत को जानना आवश्यक होता है। सिद्धांत जिसे अंग्रेजी में थ्योरी कहा जाता है एक विचारात्मक उपकरण है और एक ऐसी बौद्धिक रचना है जिसे वास्तविक जीवन में लागू किया जा सकता है।

नामकरण :

जिस विषय के सिद्धांत के बारे में बात की जाती है उस विषय का नाम सिद्धांत से जोड़ दिया जाता है जैसे न्याय का सिद्धांत, स्वतंत्रता का सिद्धांत, समानता का सिद्धांत इत्यादि। इसी प्रकार राजनीति को समझने के लिए जिस सिद्धांत का अध्ययन किया जाता है उसे राजनीतिक सिद्धांत कहा जाता है और इसके अंतर्गत राज्य व इसके सभी खंडों का अध्ययन किया जाता है।

परिभाषा :

राजनीतिक सिद्धांत की परिभाषा के अनुसार "दार्शनिक व व्यवहारिक रूप से राज्य का अध्ययन कर बनाए गए विचार या विचारों के समूह को राजनीतिक सिद्धांत कहा जाता है और इसका मूल कार्य मानव व्यवहार की सभी समस्याओं को समाप्त करना होता है"

उदारवादी सिद्धांत, मार्क्सवादी सिद्धांत, नारीवादी सिद्धांत इत्यादि ये सब राजनीतिक सिद्धांत के उदाहरण हैं। प्रत्येक सिद्धांत का एक मूल होता है जिसे केंद्र बिंदु मानकर वो पूरा सिद्धांत गढ़ा जाता है। जैसे उदारवादी सिद्धांत का मूल स्वतंत्रता है, मार्क्सवादी सिद्धांत का मूल वर्ग-संघर्ष है और ऐसे ही नारीवादी सिद्धांत का मूल महिला सशक्तिकरण है।

राजनीतिक सिद्धांत का सफर :

राजनीतिक सिद्धांत समय के साथ बदलता रहा है प्राचीन काल में केवल राजा के कर्मों को केंद्र में रखकर आदर्शवादी सिद्धांतो की रचना की जाती थी जिसमें इस बात पर चिंतन किया जाता था कि राजा को किस प्रकार न्याय करना चाहिए, राजा का जनता के प्रति क्या कर्तव्य है, राजा द्वारा किन परिस्थियों में किसी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है इत्यादि इत्यादि।

उससे आगे चलकर राजनीतिक सिद्धांत में राजा के साथ-साथ राज्य और राज्य की संस्थाओं का अध्ययन भी किया जाने लगा। जिससे राजनीतिक सिद्धांत के अंतर्गत विचारात्मक विषयों का दायरा बढ़ गया।

उसके बाद आधुनिक युग में जनता की स्वतंत्रता के मायने भी विचारकों को समझ आने लगे और उदारवादी दृष्टिकोण के अनुसार राजनीतिक सिद्धांत बनाए जाने लगे। लेकिन कुछ समय बाद यह महसूस किया जाने लगा कि केवल स्वतंत्रता के पक्ष में सिद्धांत बनाने से सभी समस्याओं का हल नही हो सकता इसलिए हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र इत्यादि विषयों पर भी अध्ययन करना होगा। इस प्रकार इन विषयों को सयुंक्त रूप से उदारवादी सिद्धांत में जोड़ दिया गया और व्यक्ति को केंद्र में रख कर राजनीतिक सिद्धांत बनाए जाने लगे इसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों पर बल दिया जाने लगा और विचारकों द्वारा सरकार की शक्तियों पर कुछ अंकुश लगाने की वकालत की जाने लगी।

जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा लोगों द्वारा की जाने वाली माँग, हड़ताल, धरना प्रदर्शन इत्यादि को भी विचारकों ने अध्ययन का विषय बना लिया और व्यवहारवादी सिद्धांतों की रचना की। व्यवहारवादी विचारकों का मत था कि यदि वास्तव में राजनीतिक सिद्धांतों को व्यवहार में लाने हेतु अनुकूल बनाना है तो हमें लोगों के व्यवहार का अध्ययन करना होगा जिसके चलते इन बातों पर तथ्य आधारित चिंतन होने लगा कि लोग माँग क्यों उठाते हैं, सरकार क्यों गिराते हैं और सरकार का विरोध क्यों करते हैं इत्यादि।

थोड़ा आगे चलकर पर्यावरण को भी राजनीतिक विषयों में शामिल किया जाने लगा ताकि गलत राजनीति, संसाधनों के खनन और अंधाधुंध अर्थव्यवस्था के चलते प्राकृतिक नुकसान को भरा जा सके। अंतः यह निष्कर्ष निकाला गया कि राजनीतिक सिद्धांत बनाते हुए उस प्रत्येक विषय का अध्ययन किया जाना अनिवार्य है जो मानवीय क्रिया कलापों के चलते प्रभावित होते हैं।

नारीवादी सिद्धांत का उदय :

आधुनिक युग में विचारकों के समक्ष एक ऐसा विषय आया जिसे प्राचीन समय से लेकर आज तक राजनीतिक विचारकों द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था और वह विषय था नारी के अधिकार। प्राचीन विचारकों ने जब भी कोई राजनीतिक सिद्धांत बनाया तो उसे पुरुष दृष्टि से बनाया। उसमें कभी भी नारी को तरजीह नही दी गई। इसलिए नारीवादी विचारकों ने प्राचीन में बने सभी सिद्धातों को खारिज करते हुए नारीवाद का सिद्धांत दिया। ताकि प्राचीन काल से प्रत्येक स्तर पर पिछड़ी महिला जाति को सशक्त किया जा सके और इस प्रश्न का उत्तर खोजा जा सके कि क्यों समाज ने नारी सदैव नजरअंदाज करते हुए सामाजिक कार्यों के लिए अयोग्य मान लिया। इस प्रकार समय के साथ राजनीतिक सिद्धांतों के अध्ययन में असंख्य विषय जुड़ते चले गए जिनमें नारीवाद उभर कर सामने आया।

राजनीतिक सिद्धांत कैसे बनाया जाता है :

नए राजनीतिक सिद्धांत की रचना करने के लिए सर्वप्रथम मौजूदा स्थिति में लागू राजनीतिक सिद्धातों की तथ्यों व वास्तविकता के आधार पर व्याख्या की जाती है। इसके बाद उस सिद्धांत के गुणों व दोषों पर नैतिक चिंतन किया जाता है इस प्रक्रिया को समालोचना कहा जाता है। ततपश्चात मूल्यों व आदर्शों को ध्यान में रखते हुए नए राजनीतिक सिद्धांत की रचना की जाती है इस प्रक्रिया को पुनः निर्माण कहा जाता है। पुनः निर्मित सिद्धांत में पुराने सिद्धातों के सभी दोष समाप्त करने की कोशिश की जाती है तथा नए गुण डाले जाने का प्रयास किया जाता है।

अनुच्छेद 30 का अर्थ | Article 30 Meaning in Hindi

हाल ही में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 का यह बात कहते हुए विरोध किया जा रहा है कि यह अनुच्छेद हिन्दू धर्म ग्रन्थों को शिक्षण संस्थानों में पढ़ाए जाने से रोकता है और वहीं अन्य धर्मों (जो कि अल्पसंख्यक श्रेणी में सूचीबद्ध हैं) को अपना धार्मिक साहित्य पढ़ाने हेतु प्रोत्साहित करता है।

इसी तथ्य को आधार बनाते हुए सोशल मीडिया पर अनुच्छेद 30 का लगातार विरोध किया जा रहा है तथा इसे हटाए जाने की माँग की जा रही है। तो चलिए जानते हैं भारतीय संविधान का यह अनुच्छेद वास्तव में क्या कहता है।

दरअसल 12 से 35 तक के सभी अनुच्छेद भारतीय संविधान के भाग 3 "मूलभूत अधिकार" का हिस्सा हैं। इसलिए अनुच्छेद 30 भी मूलभूत अधिकारों के दायरे में आता है। अनुच्छेद 30 का शीर्षक है (शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक-वर्गों का अधिकार)

अनुच्छेद 30 दो खंडों से मिलकर बना है इस अनुच्छेद का खंड (1) कहता है :

(1) धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

इसके बाद इस अनुच्छेद का (1क) कहता है :

[(1क) खंड (1) में निर्दिष्ट किसी अल्पसंख्यक-वर्ग द्वारा स्थापित और प्रशासित शिक्षा संस्था की संपत्ति के अनिवार्य अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधि बनाते समय, राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी संपत्ति के अर्जन के लिए ऐसी विधि द्वारा नियत या उसके अधीन अवधारित रकम इतनी हो कि उस खंड के अधीन प्रत्याभूत अधिकार निर्बन्धित या निराकृत न हो जाए।]

इसके बाद अनुच्छेद 30 का खण्ड (2) कहता है :

शिक्षा संस्थाओं को सहायता देने में राज्य किसी शिक्षा संस्था के विरुद्ध इस आधार पर विभेद नहीं करेगा कि वह धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक-वर्ग के प्रबंध में है।

इस अनुच्छेद की लिखित सरंचना में स्पष्ट है कि यह अनुच्छेद समानता को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

साथ ही धर्म और भाषा के आधार पर सभी अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति के अनुसार शिक्षा संस्था स्थापित करने व उनका स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने का संवैधानिक अधिकार भी देता है और किसी संस्था का सरकार द्वारा अधिग्रहण किए जाने के मामले में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को नाममात्र भी हानि न पहुँचाने की बात स्पष्ट करता है।

इसके अलावा अनुच्छेद 30 यह भी सुनिश्चित करता है कि शैक्षणिक संस्थाओं को मिलने वाली सरकारी सहायता में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो सके।

यद्द्पि उपरोक्त सभी तथ्य अनुच्छेद 30 के पक्ष में जाते हैं लेकिन ये ही तथ्य इसके विरोध का कारण भी हैं।

दरअसल अनुच्छेद 30 से मिली स्वतंत्रता के आधार पर अल्पसंख्यकों द्वारा स्थापित की गई शैक्षिण संस्था पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने हेतु बाध्य नही हैं जो कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों का हनन है।

और क्योंकि ये संस्थाएं सरकारी हस्तक्षेप से पूर्णतः स्वतंत्र हैं इसलिए इनके आंतरिक मामलों में होने वाले भ्र्ष्टाचार के मामले में सरकार को मूकदर्शक बनना पड़ता है।

इसके अलावा गैर-अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों में (हिन्दू शैक्षणिक संस्थान) सरकार को हस्तक्षेप करने की छूट है लेकिन अल्पसंख्यकों के शिक्षा संस्थानों में वह हस्तक्षेप नही कर सकती। यह बिंदु गैर-अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक क्षेत्र में मिलने वाले समान अधिकारों से वंचित करता है। यही कारण है कि अनुच्छेद 30 को समय-समय पर आलोचना व विरोध का सामना करना पड़ता है।

नस्लवाद का अर्थ | Racism Meaning in Hindi

दोस्तों मौजूदा समय में दुनिया में 7 अरब से अधिक लोग रहते हैं और प्रत्येक व्यक्ति के आसपास का माहौल अलग होता है। एक जैसे भौगोलिक वातावरण में रहते हुए हमारे अंदर कुछ समानताएं आ जाती है वहीं अलग-अलग भौगोलिक वातावरण में रहते हुए हमारे अंदर कुछ असमानताएं भी आ जाती हैं। जैसे कि त्वचा का रंग, शरीर का कद, मुख की बनावट, बालों की बनावट और रंग तथा नाक की बनावट इत्यादि।

पृथ्वी के कुछ स्थानों का भौगोलिक वातावरण इतना अलग होता है कि इनमें रहने वाले लोगों में भारी असमानता दिखाई देने लगती है जैसे अफ्रीकी लोगों का रंग काला होता है तो वहीं यूरोपीय लोगों का रंग सफेद होता है।

इन्ही असमानताओं के आधार पर मनुष्य की प्रजातियों को नस्लों में बांट दिया जाता है किंतु यहाँ यह बात याद रखी जाती है कि देखने मात्र में अलग दिखने वाले सभी मनुष्य मूल रूप से समान हैं मनुष्य को मनुष्य बनाने वाली भावनाएं व संवेदनाएंं तथा उन्हें अभिव्यक्त करने की क्षमता जहाँ हमें अन्य जीवों से अलग बनाती हैं वहीं आपस में सभी मनुष्यों को जोड़ती भी हैं।

लेकिन समय बीतने के साथ-साथ कुछ सामाजिक घटनाएं ऐसी घट जाती हैं जो मनुष्य की आभासी प्रजातियों के बीच की खाई को गहरा कर देती हैं और यहीं से रेसिज्म अर्थात नस्लवाद जन्म लेता है।

उदाहरण के तौर पर मानव स्वभाव ऐसा है कि वह एक दूसरे से आगे बढ़ना चाहता है जिस कारण बहुत बार मनुष्यों के समूहों में संघर्ष होता है और उस संघर्ष में तकत्कालीन परिस्थितियों के चलते जो मानवीय नस्ल जीत जाती है वो खुद को दूसरे से बेहतर मानने लगती है और दूसरी को निम्नतर मानने लगती है।

और आगे चलकर दोनों नस्लों की पीढयों में यह बात घर कर जाती है कि वे एक दूसरे के बराबर नही हैं और यह विश्वास करने लगती हैं कि हर नस्ल के लोगों में कुछ खास खूबियां होती हैं, जो उसे दूसरी नस्लों से कमतर या बेहतर बनाती है और इसी विश्वास को हम नस्लवाद के रूप में देखते हैं यद्द्पि वैज्ञानिक रूप से यह स्पष्ट है कि मनुष्य की कोई भी प्रजाति कमतर नही है।

उदाहरण के तौर पर औपनिवेशिक ताकतों में गौरों का वर्चस्व था इसलिए उन्होंने स्वयं को श्रेष्ठतम दिखाने की भरपूर कोशिश की इसी का प्रभाव है कि आज भी हम किसी वैज्ञानिक तथ्य की पुष्टि को लेकर या किसी नए अविष्कार की आस में पश्चिम देशों की ओर झाँकते हैं।

हमारे देश के अंदर बात की जाए तो गोरा होने के लिए उपयोग होने वाले उत्पादों की बिक्री सदैव अपने चरम पर रहती है जो हमें काले लोगों के प्रति रेसिस्ट घोषित करती है। उत्तरी भारतीय और दक्षिणी भारतीयों के बीच नस्लभेदी विचारधारा बहुत बार सामने आती है यद्द्पि मिली जुली जनसँख्या होने के चलते हमारा देश कम से कम रंग के आधार पर भेदभाव करने से काफी हद तक बचा हुआ है। हालांकि जातिवाद का डंक हमें नस्लवाद से बचे होने का एहसास नही होने देता।

नस्लवाद को स्पष्ट रूप से देखना है तो अमेरिका इसका सबसे बेहतर उदाहरण रहेगा जहाँ पर अफ्रीकी मूल के अमेरिकियों के साथ पूरा तंत्र भेदभाव करता है। वहाँ की कॉलेज डिग्रियों से लेकर बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन तक में काले लोगों के प्रति नस्लवाद साफ दिखाई देता है।

जी 7 का अर्थ | G7 Meaning in Hindi

हाल ही में अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रम्प ने G7 के 46 वें सम्मेलन को यह कहते हुए टाल दिया कि मुझे नही लगता अब G7 समूह दुनिया के उस भाग का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें दुनिया की नई घटनाएं घट रही हैं। इसके साथ ही ट्रम्प ने भारत सहित रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी कोरिया को G7 का सदस्य बनने के लिए आमंत्रित किया हालांकि नए देशों की यह सदस्यता स्थाई होगी या अस्थाई इस पर अभी असमंजस बना हुआ है।

लेकिन प्रश्न यहाँ पर यह उठता है कि ये G7 क्या बला है और क्यों अब इसमें भारत सहित रूस जैसे देशों को शामिल किया जाना आवश्यक हो गया है।

दरअसल ग्रुप ऑफ सेवन अर्थात G7 सात देशों का एक समूह है ये देश हैं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और यूएसए। वहीं कभी-कभी यूरोपीय संघ को भी इसका आठवां सदस्य मान लिया जाता है क्योंकि यह संघ एक सदस्य होने के सभी अधिकार रखता है। यद्द्पि ज्यादातर समय यूरोपीय संघ को एक अलग सदस्य के रूप में नही गिना जाता।

ये सातों देश अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष जिसे व्यवहारिक रूप से IMF कहा जाता है के द्वारा एडवांस इकॉनमी यानी कि उन्नत अर्थव्यवस्था घोषित हैं।

प्रत्येक वर्ष G7 के सदस्य देशों की सरकार के नेता एक मीटिंग करते हैं जिसे आम बोलचाल में शिखर सम्मेलन कहा जाता है इस सम्मेलन में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। दो दिन चलने वाली इस मीटिंग में वैश्विक समस्याओं के बारे में बात की जाती है तथा उनके हल ढूंढे जाने का प्रयास किया जाता है।

G7 की मीटिंग का फोकस मुख्य रूप से आर्थिक गतिविधियों पर होता है। वैश्विक स्तर पर आए किसी तरह के वित्तीय संकट की चर्चा G7 सम्मेलन में की जाती है जैसे कि कच्चे तेल के उत्पादन में आई कमी पर बात करना या मौद्रिक प्रणाली की सरंचना की मौजूदा स्थिति पर ध्यान देना इत्यादि।

सभी सदस्य देशों के पास एक-एक कर G7 की अध्यक्षता आती है। जहाँ पर आवश्यकता होती है ये सभी देश एक साथ मिलकर किसी वैश्विक समस्या को सुलझाने की पहल भी करते हैं।

शुरुआती तौर पर स्थापना के समय वर्ष 1975 में इस समूह का नाम G6 था लेकिन अगले वर्ष 1976 में कनाडा भी इस समूह का हिस्सा बना और इसका नाम G7 पड़ा। इसके बाद वर्ष 1998 में रूस भी इस समूह में शामिल हुआ और इसे G8 का दर्जा दिया गया लेकिन वर्ष 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर किए गए कब्जे के बाद रूस को G7 से बर्खास्त कर दिया गया और यह समूह फिर से G7 में तब्दील हो गया।

अब यदि भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया इस समूह का सदस्य बनते हैं तो यह समूह G11 के नाम से जाना जाएगा।

अमोनियम नाइट्रेट का अर्थ | Ammonium Nitrate Meaning in Hindi

04 अगस्त 2020 को लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बड़ा विस्फोट हुआ। जिसमें 73 लोगों की मौत हुई तथा 4000 के करीब लोग घायल हो गए। इस हादसे के ब...