वन नेशन वन राशन कार्ड योजना का अर्थ | One Nation One Ration Card Scheme Meaning in Hindi

हाल ही में जम्मू कश्मीर, नागालैंड, मणिपुर तथा उत्तराखंड के वन नेशन वन राशन कार्ड योजना में शामिल होने के बाद इस योजना में शामिल होने वाले राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या 24 हो गई है और जल्द ही यह योजना बचे हुए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू कर दी जाएगी। तो ऐसे में यह जानना आवश्यक हो जाता है कि वन नेशन वन राशन कार्ड योजना आखिर है क्या और इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार के क्या उद्देश्य हैं? तो चलिए इस योजना को समझने की कोशिश करते हैं।


दरअसल वन नेशन वन राशन कार्ड वह योजना है जिसके जरिए केंद्र सरकार सभी राज्यों में फैले PDS (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम; सार्वजनिक वितरण प्रणाली) को एक ही छत के नीचे लाने हेतु कार्यरत है। ताकि किसी भी राज्य का नागरिक दूसरे राज्य से अपने राशन कार्ड का प्रयोग कर सरकारी सब्सिडी वाले सस्ते राशन को प्राप्त कर सके जिसमें मुख्यतः अनाज व चावल शामिल हैं।

PDS (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) से अभिप्रायः राशन की उन सस्ती दुकानों से है जिनके माध्यम से सरकार गरीबों तक कम दाम में राशन पहुँचाती है; गाँव देहात में इन दुकानों को कोटा नाम से जाना जाता है।

सरकार द्वारा इन सभी पीडीएस को जोड़ने का काम मार्च 2021 तक समाप्त किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
100 प्रतिशत पीडीएस के आपस में जुड़ने के बाद देश के सभी नागरिक अपने राशन कार्ड की मदद से देश के किसी भी कोने में रहते हुए वहां के स्थानीय पीडीएस से सस्ता राशन प्राप्त कर सकेंगे।

हालांकि यदि कोई राज्य विशेष केवल अपने नागरिकों के लिए कोई खाद्य सुरक्षा योजना चला रहा है तो इसका लाभ अन्य राज्यों के नागरिकों को नही मिलेगा।
किसी भी प्रकार के भ्र्ष्टाचार को रोकने के लिए इस योजना के अंतर्गत सभी पीडीएस को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा ताकि आवश्यक्तानुसार फिंगर प्रिंट के माध्यम से किसी भी पीडीएस से राशन लिया जा सके।

सभी पीडीएस पर PoS (पॉइंट ऑफ सेल) डिवाइस लगाए जाएंगे जिससे जुड़े आधार कार्ड के जरिए राशन लेने वाले की पहचान को सत्यापित किया जाएगा।

वहीं ऐसे लोग जो अलग-अलग राज्यों में जाकर एक से अधिक राशन कार्ड बनवा लेते थे उन पर भी लगाम लगाई जा सकेगी।

शुरू में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह योजना एक दूसरे से सट्टे आंध्रप्रदेश-तेलंगाना तथा गुजरात-महाराष्ट्र में लागू की गई थी। जिसके बाद तेलंगाना के लोग आंध्रप्रदेश तथा आंध्रप्रदेश के लोग तेलंगाना के पीडीएस से राशन लेने में सक्षम हुए। ठीक ऐसे ही महाराष्ट्र तथा गुजरात राज्यों में किया गया। इसके बाद इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का कार्य शुरू कर दिया गया।

इस योजना से प्रवासी मजदूरों को सबसे अधिक लाभ होगा। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं जो रोजगार हेतु अन्य राज्यों में काम कर रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर पहले यदि कोई बिहार का मजदूर हरियाणा में काम कर रहा होता था तो उसे सस्ता राशन प्राप्त नही होता था क्योंकि उसका राशन कार्ड बिहार का होता था; वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू होने के बाद मजदूरों को इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा और वे किसी भी राज्य में रहते हुए वहां के स्थानीय पीडीएस से सस्ता राशन प्राप्त कर सकेंगे।

01 जनवरी 2020 से इस योजना को लागू किए जाने की शुरुआत आध्र प्रदेश ,तेलंगाना गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, पंजाब, कर्नाटक, केरल, त्रिपुरा तथा राजस्थान राज्यों से की गई थी। जिसे मार्च 2021 तक पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

इसके अलावा पहले जो राशन कार्ड के फॉर्मेट थे वो राज्यों के अनुसार अलग-अलग थे लेकिन अब पूरे देश में एक ही तरह के राशन कार्ड आबंटित किए जाएंगे।

नए राशन कार्ड के लिए किसी भी नागरिक को आवेदन करने की जरूरत नही है बल्कि सरकार पीडीएस के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ो के आधार पर स्वयं लोगों को इस योजना से जोड़ने का काम करेगी।

इस योजना के अंतर्गत शुरुआती मूल्य के रूप में गेहूँ 3 रुपए प्रति किलोग्राम तथा चावल 2 रुपए प्रति किलोग्राम के मूल्य पर आबंटित किए जाएंगे।

टाइम कैप्सूल का अर्थ | Time Capsule Meaning in Hindi

हाल ही में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर की नींव रखने से पूर्व 2000 फीट नीचे टाइम कैप्सूल रखे जाने का निर्णय लिया गया है। इस टाइम कैप्सूल में राम जन्मभूमि का संपूर्ण ज्ञात इतिहास दर्ज होगा। तो प्रश्न यहां पर यह उठता है कि टाइम कैप्सूल आखिर होता क्या है, इसे जमीन में क्यों दबाया जाता है और क्या यह हमारे देश में टाइम कैप्सूल दबाए जाने का पहला अवसर है; आइए इन सब प्रश्नों का उत्तर पाने की कोशिश करते हैं।


दरअसल टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है जिसे खास तरह की सामग्री से बनाया जाता है यह जमीन के नीचे सैंकड़ों या हजारों वर्षों तक दबा होने के बावजूद भी गलता-सड़ता नही है। इसलिए इसका प्रयोग हम ऐसे दस्तावेज या सामान को हजारों वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए करते हैं जिसके माध्यम से भविष्य में आने वाली हमारी पीढ़ियों को हमारे मौजूदा समय के बारे में जानकारी दी जा सके।

उदाहरण के तौर पर आज हम 2020 में जी रहे हैं यदि हम कोई जानकारी 3020 में भेजना चाहें तो हम टाइम कैप्सूल की मदद से ऐसा कर सकते हैं; यदि हम आज कोई जानकारी लिखकर टाइम कैप्सूल में डाल कर दबा देते हैं तो 3020 तक अर्थात आज से 1000 साल बाद तक भी वो जानकारी ऐसे ही सुरक्षित रहेगी।

इस जानकारी के माध्यम से 3020 के लोग यह जान पाएंगे कि 2020 की दुनिया कैसी थी, समाज कैसा था, संस्कृति कैसी थी इत्यादि। ठीक वैसे ही जैसे राजाओं-महाराजाओं ने अपने समय की जानकारी हम तक पहुँचाने के लिए शिलालेखों का सहारा लिया है और आज हमें उस समय के समाज व संस्कृति के बारे में बहुत कुछ ज्ञात है।

तो इस प्रकार वो विशिष्ट सामग्री से बने वो कंटेनर जो किसी विशेष समय की जानकारी को खुद में समेट उसे हजारों वर्ष आगे ले जाने में सक्षम हो; टाइम कैप्सूल कहलाते हैं। आमतौर पर इन्हें किसी भवन इत्यादि की नींव में दबाया जाता है तथा इनमें या तो उस भवन विशेष से जुड़ी जानकारियां होती हैं या उस समयकाल के समाज, अर्थव्यवस्था, शासनव्यवस्था या संस्कृति इत्यादि से जुड़ी जानकारियां होती हैं।

टाइम कैप्सूल पुरातत्वविदों, मानवविज्ञानियों तथा इतिहासकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं; ये इतिहास को जानने का सबसे सरल, सटीक व सस्ता माध्यम है।

आज हम अपने इतिहास के बारे में इतना कुछ जानते हैं वो इसीलिए क्योंकि पुराने समय में हमारे पूर्वजों द्वारा बहुत से स्थानों पर शिलालेख तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सरंक्षित रखे गए थे।

समय के साथ हमने कुछ ऐसे कंटेनर्स तैयार कर लिए हैं जो स्टेनलेस स्टील या विशेष प्रकार के तांबे जैसी धातुओं से बने होते हैं तथा हजारों वर्षों तक सुरक्षित रह सकते हैं। इन कंटेनर्स के ऊपर कुछ नही लिखा होता बल्कि इनके अंदर लिखित दस्तावेजों को डाल कर दबा दिया जाता है।

ऐसे कंटेनर की सहायता से हम समय के साथ नष्ट हो सकने वाले दस्तावेजों को भी हजारों वर्षों तक सुरक्षित रख सकते हैं।

राम मंदिर में इसी प्रकार का कंटेनर (विशेष तांबे से बना) के आकार का टाइम कैप्सूल रखा जाएगा जिसमें अयोध्या, भगवान राम तथा राम मंदिर के बनाए जाने का पूरा इतिहास दर्ज होगा तथा यह इतिहास संस्कृत भाषा में लिखा जाएगा।

ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में स्पेन में 400 वर्ष पुराना टाइम कैप्सूल मिला था जो कंटेनर की शक्ल में नही बल्कि यीशु की मूर्ति के आकार में था। इस मूर्ति के अंदर कुछ दस्तावेज रखे गए थे जिनमें 400 वर्ष पहले की आर्थिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक सूचनाएं दर्ज थी।

आइए अब सिलसिलेवार तरीके से विभिन्न अवसरों पर स्थापित किए गए महत्वपूर्ण टाइम कैप्सूल के बारे में जानते हैं।
1. 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लाल किले के गेट पर "कालपात्र" नामक टाइम कैप्सूल दबाया गया था जिसमें भारत की आजादी के इतिहास से सबंधित जानकारी दर्ज की गई थी।

2. इसके बाद वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल की उपस्थिति में IIT कानपुर के ऑडिटोरियम में टाइम कैप्सूल दबाया गया था।

3. वहीं वर्ष 2010 में महात्मा मंदिर (गांधीनगर, गुजरात) में मंदिर स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर टाइम कैप्सूल दबाया गया था।

4. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भी मौजूदा समय टेक्नोलॉजी से सबंधित जानकारी के साथ टाइम कैप्सूल दबाया जा चुका है।

बीएस 4 का अर्थ | BS4 Meaning in Hindi

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक BS4 वाहनों की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कोरोना लॉकडाउन के समय मार्च महीने में बड़ी संख्या में BS4 वाहनों की बिक्री पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही कहा है कि 31 मार्च 2020 के बाद बिके BS4 वाहनों का रजिस्ट्रेशन नही किया जाएगा। लेकिन ये BS4 वाहन आखिर होते क्या हैं आइए समझने की कोशिश करते हैं।


दरअसल BS 4 में प्रयुक्त संक्षिप्त शब्द BS की फुल फॉर्म है भारत स्टेज (Bharat Stage)

BS एक मानदंड है जो वाहनों के धुएं के माध्यम से निकलने वाले प्रदूषकों के लिए एक सीमा का निर्धारण करता है। ताकि वातावरण में फैले प्रदूषण को कम किया जा सके।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण प्रत्येक वर्ष पांच वर्ष से कम आयु के एक लाख बच्चों की मृत्यु का कारण बन रहा है वहीं देश में होने वाली मौतों के 12.5% ​​के लिए जिम्मेदार है।

इसीलिए सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए बहुत से कदम उठा रही है जिनमें से गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण की सीमा को तय करना भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

BS के बाद लगी संख्या इसकी स्टेज (चरण) को प्रदर्शित करती है स्टेज जितनी ज्यादा होगी गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषकों की मात्रा उतनी ही कम होगी।

उदाहरण के लिए BS 4 इंजन वाला वाहन प्रदूषण उत्सर्जन के मामले में BS 3 से बेहतर होगा।

BS मानदंड के मानक यूरोपियन नियमों के आधार पर बनाए गए हैं। इन मानकों को वर्ष 2000 में लागू किया गया था तब से ऑटोमोबाइल कंपनियों को सख्त हिदायत है कि वे इन्ही मानकों के अनुसार गाड़ी के इंजन तैयार करे।

BS मानदंड आंतरिक दहन इंजनों का उपयोग करने वाले वाहनों से नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) और सल्फर ऑक्साइड जैसे वायु प्रदूषकों की मात्रा की अधिक्तम सीमा को तय करता है।

अक्टूबर 2010 से पूरे देश में सभी वाहनों के लिए BS 3 मानदंड लागू कर दिए गए थे।

वहीं BS 4 को पूरे देश में अप्रैल 2017 से लागू किया गया था।

इसके बाद सरकार ने BS 5 को स्किप करते हुए सीधा BS 6 मानदंडों को लागू कर दिया है जो कि 01 अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू हैं।

इसीलिए अब BS 4 वाहनों की बिक्री आधिकारिक रूप से बैन कर दी गई है।

BS 4 वाहनों में सल्फर उत्सर्जन की मात्रा 50 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) थी जिसे BS 6 में घटाकर 10 पीपीएम कर दिया गया है।

वहीं BS 6 में पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा BS 4 से 80% कम है।

ठीक ऐसे ही डीजल इंजन के BS 6 मानदंड में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा BS 4 के मुकाबले 70% कम है।
इस प्रकार स्वास्थ्य व वातावरण पर प्रभाव डालने वाले प्रदूषकों की सीमा को BS 4 के मुकाबले BS 6 में घटाया गया है।

वोकेशनल एजुकेशन का अर्थ | Vocational Education Meaning in Hindi

परिभाषा : व्यावसायिक शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों को उन नौकरियों के लिए तैयार किया जाता है जो हस्तचालित या प्रयोगात्मक गतिविधियों पर आधारित हैं और जो परंपरागत रूप से गैर एकेडमिक और किसी विशेष व्यापार, व्यवसाय या पेशे से पूरी तरह संबंधित है इसमें सीखने वाला सीधे ही तकनीकी या प्रौद्योगिकी के एक विशेष समूह में विशेषज्ञता हासिल करता है।

अन्य नाम : व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण, पेशेवर या तकनीकी शिक्षा

कोर्स : ऑटोमोबाइल, मैकेनिकल, फैशन, टेलीकम्युनिकेशन, टूरिज्म, होटल मैनेजमेंट, वेब या ग्राफिक डिज़ाइन, एक्टिंग, फूड इत्यादि।

लाभ :

1. नौकरी मिलने के ज्यादा अवसर
2. उच्च वेतन
3. कार्य संतुष्टि
4. आजीवन कमाई का साधन
5. उद्योगों के लिए कुशल कर्मी
6. शिक्षा और रोजगार के बीच कम अंतर
7. व्यक्तिगत उत्पादन क्षमता का बढ़ना

विशेषताएं :

1. प्रैक्टिकल आधारित पाठ्यक्रम
2. प्रैक्टिकल प्रदर्शन
3. प्रोजेक्ट का दौरा
4. समूह-आधारित परियोजना निर्माण
5. कुशल व्यापार ज्ञान
6. औद्योगिक प्रशिक्षण
7. नौकरी के स्तर पर प्रशिक्षण

जैविक हथियार का अर्थ | Jaivik Hathiyar Meaning in Hindi

परिभाषा : जैव‍िक हथियार ऐसे सूक्ष्‍मजीवी (वायरस, बैक्‍टीरिया, फंगस और अन्‍य हानिकारक तत्‍व) हैं जिन्हें लैब्स में पैदा किया जाता है और जानबूझकर फैलाया जाता है। इसका उद्देश्‍य इंसानों की बड़े स्तर पर हत्‍या करना या उनमें बीमारी पैदा करना होता है। इस कार्य के लिए बायोलॉजिकल एजेंट्स का प्रयोग किया जाता है। जैविक हथियार से बहुत कम समय में बहुत ज्‍यादा लोगों की मौत हो सकती है। इन हथियारों से किसी खास टारगेट या व्‍यापक जनसमुदाय को निशाना बनाया जा सकता है।

जैविक हथियार को अंग्रेजी में Biological Weapon (बायोलॉजिकल वेपन) कहा जाता है।

बॉयोलॉजिकल एजेंट (जैविक प्रतिनिधि) : कुछ विशेष वायरस, बैक्‍टीरिया, फंगस या अन्‍य हानिकारक तत्‍व विशेष बीमारियों के लिए उत्तरदायी होते हैं। उदाहरण के रूप में हम Bacillus Anthracis को देख सकते हैं जो कि Anthrax नामक बीमारी के लिए उत्तरदायी है। इस बीमारी का इलाज ना मिले तो 20 से 80% लोगों की मृत्यु हो जाती है।

इसके अन्य उदाहरणों में एंथ्रेक्स, प्लेग, बोटूलिज्म, टूलेरीमिया, ग्लैन्डर, जैसे खतरनाक जैविक हमले जैविक हथियारों में शामिल हैं।

बायोलॉजिकल वारफेयर (जैविक युद्ध) : जब पारंपरिक हथियारों का प्रयोग ना कर जैविक हथियारों की मदद से दूसरे देशों को नुकसान पहुँचाया जाता है तो इसे बायोलॉजिकल वारफेयर कहा जाता है। इस तरह के युद्ध को जर्म वारफेयर (रोगाणु युद्ध) के नाम से भी जाना जाता है।

बायोटेररिज्म (जैव आंतकवाद) : बायोटेरोरिज्म वो आतंकवाद है जिसमें आतंक फैलाने के लिए जैविक एजेंटों का जानबूझकर प्रसार किया जाता है।

बायोलॉजिकल अटैक के उदाहरण :

1. छठी शताब्दी ईसा पूर्व मेसोपोटामिया के अस्सूर साम्राज्य द्वारा दुश्मनों के पानी पीने के कुओं में एक विषाक्त पदार्थ डाल दिया गया था जिसकी वजह से दुश्मन समुदाय के बहुत से लोगों की मृत्यु हो गई थी।

2. चौथी शताब्दी ईसा पूर्व साइबेरिया के स्केथियन नामक कबीले के लोग मरे हुए लोगों के खून में सने तीरों का प्रयोग करते थे।

3. यूरोपीय इतिहास में इस बात के प्रमाण हैं कि वे दुश्मनों के कुओं में मरे हुए जानवरों के मृत शरीर डाल दिया करते थे; जिससे आसपास के लोगों संक्रमण का शिकार हो जाते थे।

4. माना जाता है कि ब्लैक डेथ (प्लेग) की महामारी को यूरोप के क्षेत्र में फैलने का कारण तुर्की तथा मंगोल के सैनिकों द्वारा संक्रमित जानवरों के मृत शरीरों को नगरों में फिंकवाया जाना था।

5. प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी द्वारा जैविक हथियारों (एंथ्रेक्स तथा ग्लैंडर्स के एजेंट्स) का इस्तेमाल किया गया था।

6. द्वितीय विश्व युद्ध में जापान द्वारा दुश्मन देशों खिलाफ जैविक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

7. वर्ष 2001 में अमेरिका में छोटे स्तर पर लेकिन कई स्थानों पर एंथ्रेक्स हमला हुआ था।

जैविक अटैक के कारण :

1. पाउडर या तरल अवस्था में फेंकना आसान

2. कम समय में बड़े स्तर पर नरसंहार

3. दर्दनाक मृत्यु (भय का कारण)

4. लंबे समय तक प्रभावी

5. कम खर्च तथा आसान उपलब्धता

जैविक हथियारों की रोकथाम : वर्ष 1972 में बायोलॉजिकल वेपन कन्वेंशन (BWC) की स्थापना हुई थी जो जैविक हथियारों से पनपते खतरों को देखते हुए इनकी वैश्विक स्तर पर रोकथाम हेतु प्रयासरत है। आज भारत सहित 183 देश इसके सदस्य हैं।

द्विध्रुवी विकार का अर्थ | Bipolar Disorder Meaning in Hindi

हाल ही में फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के तथाकथित आत्महत्या मामले में एक नया मोड़ आया है।

अभिनेता की थेरेपिस्ट रही सुसान वॉकर के अनुसार सुशांत आत्महत्या से पहले बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। लेकिन ये बाइपोलर डिसऑर्डर होता क्या है आइए जानते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर को हिंदी में द्वीध्रुवी विकार कहा जाता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर एक गंभीर प्रकार का मानसिक रोग है जो मनोदशा में विकार उतपन्न करता है। इस रोग से ग्रसित रोगी की मनोदशा बारी-बारी से दो विपरीत अवस्थाओं में जाती रहती है।

एक मनोदशा को सनक (Mania) और दूसरी मनोदशा को अवसाद (Depression) कहते हैं। हालांकि इन दोनों अवस्थाओं के बीच व्यक्ति कुछ समय के लिए सामान्य भी हो सकता है।

पहले देखते हैं पहली अवस्था यानी कि सनक/ Mania को : सनक की मनोदशा में रोगी अति-आशावादी हो जाता है और अपने बारे मे बढ़ी-चढ़ी धारणाएं रखने लगता है (जैसे मैं बहुत धनी, क्रिएटिव या शक्तिशाली हूँ इत्यादि) तथा बिना सोचे समझे कोई भी बड़ा निर्णय ले सकता है।

इस अवस्था में व्यक्ति अति-क्रियाशील हो जाता है तथा आवश्यकता से अधिक बात करने लगता है तथा उसके विचार तेज गति से बदलने लगते हैं। रोगी सोना नहीं चाहता या सोने की आवश्यकता महसूस नही करता। हालांकि अलग-अलग व्यक्तियों में दिखने वाले लक्षणों में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है।

अब देखते हैं दूसरी अवस्था यानी कि (अवसाद/ Depression) को : अवसाद की मनोदशा में रोगी उदास रहता है उसको थकान महसूस होती रहती है। वो बिना किसी बात के ही सभी बुरी परिस्थितियों के लिए अपने आप को दोषी मानने लगता है तथा जीवन को लेकर आशाहीन हो जाता है।

उसका रोने का मन करता है तथा वो लोगों से नजरें मिलने में संकोच महसूस करने लगता है। इस अवस्था में आत्महत्या के ख्याल आना भी शामिल है तथा स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर व्यक्ति स्वयं को हानि भी पहुँचा सकता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर बीमारी वैश्विक आबादी के लगभग 0.8% भाग को प्रभावित करती है। इसे मैनिक-डिप्रेसिव बीमारी के रूप में भी जाना जाता है।

इस बीमारी से ग्रसित होने का कारण आसपास के माहौल, अनुवांशिकी तथा मस्तिष्क से सबंधित अन्य समस्याओं को माना जाता है।

जेईई मेन का अर्थ | JEE Main Meaning in Hindi

JEE MAIN एक इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा है; भारत के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए राजकीय स्तर पर कई प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की ज...