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अगस्त 4, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

त्रिभाषा सूत्र का अर्थ | Three Language Formula Meaning in Hindi

हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी ने नई शिक्षा नीति 2020 में प्रस्तावित त्रिभाषा नीति (थ्री लैंगुएज पॉलिसी) का विरोध करते हुए कहा है कि तमिलनाडु में नई त्रिभाषा नीति लागू नही की जाएगी राज्य में द्विभाषा नीति ही लागू रहेगी। इसलिए उन्होंने केंद्र सरकार से नई भाषा नीति पर पुनः विचार करने का आग्रह किया। यह नई पॉलिसी उस थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले का लचीला रूप है जिसमें हिंदी को पूरे भारत में पढ़ाया जाना अनिवार्य बनाने को लेकर प्रयास किए जा चुके हैं; आइए समझने की कोशिश करते हैं कि थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला क्या है और क्यों दक्षिण भारतीय राज्य इसका पिछले कई दशकों से लगातार विरोध कर रहे हैं। इस फॉर्मूले को समझने से पूर्व हमें संविधान के अनुच्छेद 351 को पढ़ना होगा जो हिंदी भाषा के संबंध में है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 का शीर्षक है "हिन्दी भाषा के विकास के लिए निदेश" यह अनुच्छेद कहता है कि "संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिन्दी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे जिससे वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी

भूमि पूजन का अर्थ | Bhumi Pujan Meaning in Hindi

05 अगस्त 2020 का दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए तय किया गया है। यह भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। तो ऐसे में हमारे सामने कुछ प्रश्न आते हैं जैसे कि भूमि पूजन क्या होता है, यह क्यों करवाया जाता है, हिंदू धर्म में इसके लिए क्या विधि बताई गई है साथ ही राम मंदिर के भूमि पूजन की पूरी रूपरेखा क्या है इत्यादि तो चलिए इन सब प्रश्नों के उत्तर तलाशने की कोशिश करते हैं। दरअसल हिंदू धर्मग्रंथ में धरती को माता का दर्जा दिया गया है। धरती को सम्‍मान देने हेतु शास्‍त्रों में भूमि पर किसी भी कार्य की शुरूआत से पूर्व उसके पूजन का विधान रखा गया है। शास्त्रों के अनुसार यदि किसी भूमि पर पूर्व में कोई दोष हो तो उस भूमि को खरीदने वाले व्‍यक्‍ति को दोष मुक्ति के लिए भूमि पूजन करवाना चाहिए। ऐसा करने से उस भूमि की अपवित्रता व दोष समाप्त हो जाते ह