एम्बार्गो का अर्थ | Embargo Meaning in Hindi

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर भारत को ओर कदम बढ़ाते हुए 101 सैन्य उपकरणों के आयात पर Embargo लागू की है। जिसके बाद इन 101 उपकरणों का आयात अब प्रतिबंधित हो जाएगा। जिनमें आर्टिलरी गन, राडार, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, असाल्ट राइफल तथा सोनार सिस्टम शामिल हैं। इस वीडियो में हैं समझने की कोशिश करेंगे कि Embargo क्या होता है तथा 101 उपकरणों में से वो कौन से मुख्य उपकरण हैं जिन पर Embargo लगाया गया है।

दरअसल Embargo एक सरकारी आदेश को कहा जाता है जिसके जरिए किसी देश की सरकार विदेशी सामान के आयात प्रतिबंध लगाती है।

वहीं Embargo किसी जानकारी पर भी लगाया जा सकता है जिसके बाद निश्चित समय के लिए वो जानकारी अप्रकाशित अवस्था में रहती है जब तक कि Embargo हटा ना लिया जाए।

ठीक ऐसे ही किसी अन्य अवस्था में भी जब किसी विषय-वस्तु पर जब आधिकारिक प्रतिबंध लगाया जाता है तो इसे Embargo कहा जाता है तथा वह विषय वस्तु Under Embargo की श्रेणी में आ जाती है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जिन 101 सैन्य उपकरणों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें स्नाइपर राइफल, ट्रैकड सेल्फ प्रोपेल्ड गन, शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, शिपबॉर्न क्रूज मिसाइल, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर, टैंक सिम्युलेटर्स, बुलेट प्रूफ जैकेट्स, बैलिस्टिक हेलमेट्स, मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फ्लॉटिंग डॉक, लाइट मशीन गन, माइन एंटी-टैंक, कन्वेंशनल सबमरीन्स, कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-7C, लांग रेंज - लैंड अटैक क्रूज मिसाइल इत्यादि शामिल हैं।

यह प्रतिबंध कुछ उपकरणों पर दिसंबर 2020 से लागू होगा तो वहीं सभी उपकरण दिसंबर 2025 तक पूरी तरह से बैन हो जाएंगे।

इस बैन का सीधा लाभ घरेलू उद्योगों को मिलेगा; आने वाले 6 से 7 वर्षों में घरेलू उद्योगों को 4 लाख करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने की संभावना है।

जानने योग्य है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में रक्षा बजट को दो भागों में बांटा जाएगा जिसमें घरेलू बजट तथा रक्षा खरीद बजट दोनों को अलग रखा जाएगा।

टिक बोर्न वायरस का अर्थ | Tick Borne Virus Meaning in Hindi

हाल ही में चीन में एक नए वायरस के मामले सामने आए यह एक टिक-बोर्न (टिक-जनित) वायरस है अर्थात इसका प्रसार टिक्स के काटने से होता है। टिक्स उन कीड़ों को कहा जाता है जो मवेशियों, भेड़-बकरियों इत्यादि की चमड़ी पर चिपक जाते हैं और खून चूसते हैं। ग्रामीण इलाकों में इन्हें किलनी, कुटकी या चिचड़ी इत्यादि नाम से जाना जाता है। इस टिक जनित वायरस के चलते चीन में 07 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 60 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इस वायरस का संक्रमण चीन के जियांगसू और अनहुई प्रांत में तेजी से फैल रहा है। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि यह नया वायरस क्या है; मनुष्यों में कैसे फैलता है; इससे होने वाली बीमारी क्या है, इससे ग्रसित होने वाले रोगियों में कौन से लक्षण देखे जाते हैं तथा यह वायरस अन्य देशों के लिए कितना खतरनाक है।

दरअसल टिक्स के काटने से पशुओं से होते हुए इंसानों में SFTS नामक वायरस फैल रहा है।

SFTS का पूरा नाम है Severe Fever With Thrombocytopenia Syndrome (अर्थात  तेज बुखार के साथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम बीमारी)

यह वायरस Bunyavirus श्रेणी से संबंधित है तथा Haemaphysalis longicornis नामक टिक के जरिए फैल रहा है जो कि आम तौर पर एशिया, अमेरिका, अफ्रीका तथा मेडिटेरियन क्षेत्र में पाया जाता है। इंसानों तक यह वायरस संक्रमित जानवर द्वारा काटे जाने, संक्रमित रक्त, बलगम, पसीने या घाव के संपर्क में आने से फैलता है।

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम गंभीर बुखार के साथ होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह बीमारी SFTS वायरस के कारण होती है। इससे जुड़े मामले पहली बार वर्ष 2009 में चीन के हुबेई और हेनान प्रांतों के ग्रामीण इलाकों में पाए गए थे। इस बीमारी में मृत्यु दर 16% से लेकर 30% है। इतनी ज्यादा मृत्यु दर होने के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बीमारी को 10 सबसे अधिक प्राथमिकता वाली बीमारियों में सूचीबद्ध किया है।

टिक जनित STFS वायरस से होने वाली इस बीमारी के प्रमुख ​​लक्षणों में गंभीर बुखार, उल्टी, दस्त, सर्दी लगना, सिर दर्द, अंगों की विफलता, पेट दर्द, मसूड़ों से रक्त बहना, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (प्लेटलेट्स की सँख्या कम होना), ल्यूकोपेनिया (श्वेत रक्त कोशिकाओं की सँख्या कम होना) इत्यादि शामिल है।

इस वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 07 से 13 दिन का है। अर्थात SFTS वायरस से संक्रमित होने पर इसके लक्षण उभरने में 07 से 13 दिन का समय लगता है।

टिक्स कीड़ों का जीवनकाल अमूमन 03 वर्षों का होता है तथा यह खून पीकर ही जीवित रहते हैं इसलिए जब यह मवेशियों या भेड़-बकरियों इत्यादि को काटते हैं तो उन्हें SFTS वायरस से संक्रमित कर देते हैं।

इन पशुओं के संपर्क में रहने वाले किसान, पशु पालक तथा शिकारी इस वायरस की चपेट में आ जाते हैं; और इस तरह यह वायरस इंसानों तक पहुँचता है।

इस वायरस के इलाज हेतु अभी तक कोई टिका विकसित नही किया जा सका है हालांकि इसके इलाज में Ribavirin (राइबावाईरिन) नामक एंटीवायरल दवा सहायक है।

फिलहाल इस वायरस के मामले मुख्यतः चीन, दक्षिण कोरिया, जापान तथा वियतनाम में देखे गए हैं।

धार्मिक राष्ट्रवाद का अर्थ | Dharmik Rashtravad Meaning in Hindi

धार्मिक राष्ट्रवाद को समझने से पूर्व हमें राष्ट्रवाद को समझना होगा; दरअसल राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना को कहा जाता है जिसमें किसी साझी विरासत को केंद्र बिंदु मानकर लोगों का एक समुदाय आपस में जुड़ाव महसूस करता हो। जैसे भारत को देखा जाए तो भारत के लोग एक साझा इतिहास रखते हैं। अंग्रेजों के आने से पूर्व भारत बहुत से छोटे खंडों में विभाजित था लेकिन अंग्रेजों को निकाल बाहर करने के उद्देश्य से सभी खंडों के लोग आपस में मिले और एक राष्ट्रीय आंदोलन किया। फलस्वरूप हमें आजादी मिली।

तो वो जो एक साझा इतिहास है जिसमें सभी भारतीयों ने अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म सहे और फिर संघर्ष कर उनसे आजादी पाई उस इतिहास ने सभी भारतीयों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया और जुड़ाव की यही भावना भारतीय-राष्ट्रवाद कहलाती है।

भारतीय-राष्ट्रवाद की भावना सदैव भारत की विविधता पर हावी रही है जिस कारण हम एक दूसरे से इतने अलग होते हुए भी एक हैं अर्थात भारत में असंख्य भाषाएं, धर्म, जाति, संस्कृतियां होने के बावजूद भी एक ऐसी भावना है जो हमें एक बनाए रखती है और यही भावना भारतीय-राष्ट्रवाद कहलाती है। दुनिया में जितने भी देशों का एकीकरण हुआ है चाहे वो इटली हो, जर्मनी हो या तुर्की हो; वो राष्ट्रवाद के उदय के चलते ही हुआ है।

राष्ट्रवाद की भावना जब पूरे राष्ट्र से संबंधितयम। हो तो यह एकता का भाव जगाती है वहीं यदि यह धर्म से संबंधित हो तो यह धार्मिक एकता के भाव को जगाती है और धार्मिक राष्ट्रवाद का रूप धारण कर लेती है।

अब किसी ऐसे देश में जहां पूरा देश एक ही धर्म को मानता हो और वो धर्म आगे समुदायों में ना बंटा हो तो धार्मिक राष्ट्रवाद इसके नागरिकों में एक अटूट गठजोड़ बना देता है जो अनंतकाल तक चल सकता है लेकिन वहीं यदि किसी देश का एकीकरण धर्म के आधार पर ना हुआ तथा धर्म आगे समुदायों में बंटा हो तो किसी एक धर्म को राष्ट्रीय दर्जा मिलने से बाकी के धर्म व अल्पसंख्यक समुदाय खुद को देश से टूटा हुआ महसूस करने लगते हैं।

वहीं धार्मिक राष्ट्रवाद धार्मिक ताकतों को मुखर भी बना सकता है। धार्मिक ताकतों के मुखर होने पर तर्क वितर्क से ज्यादा आस्था को तरजीह दी जाने लगती है।

इसीलिए धार्मिक राष्ट्रवाद जहां देश को एकता के सूत्र में बांध सकता है तो वहीं धार्मिक आधार पर विभाजन का कारण भी बन सकता है। इस प्रकार स्थिति अनुसार धार्मिक राष्ट्रवाद के अलग-अलग परिणाम देखे जा सकते हैं।

बिनोद का अर्थ | BINOD Meaning in Hindi

विनोद का शाब्दिक अर्थ होता है "हैप्पीनेस" (खुशी)

हाल ही में दुनिया भर की मुख्य खबरों के बीच एक हास्य शब्द सुर्खियों में छा गया। एक तरफ जहां धार्मिक राष्ट्रवाद का मुद्दा मुखर है (जिस पर आधारित अगली वीडियो आने वाली है) तो वहीं हमारे मिलेनियल्स हास्य-व्यंग्य में मदमस्त हैं। मौजूदा समय में BINOD शब्द ट्रेंड कर रहा है। ट्रेंड करने का मतलब इंटरनेट पर हर जगह इसी शब्द के बारे में बात की जा रही है। ट्विटर जिसे राजनीति का ऑनलाइन युद्ध क्षेत्र माना जाता है वहां पिछले कुछ दिनों से BINOD शब्द ट्रेंड में बना हुआ है; जबकि इस शब्द का कोई लॉजिक नही है। तो इस आर्टिकल में हम जानने का प्रयास करेंगे कि क्यों अचानक से ऐसे अजीबोगरीब शब्द इंटरनेट पर ट्रेंड करने लगते हैं जिनका कोई औचित्य ही नही होता।

दरअसल इंटरनेट की सार्वजनिक उपलब्धता ने दो दशक से भी ज्यादा का समय पार कर लिया है और इंटरनेट पर समय के साथ पेज तथा ग्रुप्स की एक ऐसी श्रृंखला तैयार हो चुकी है जो लोगों को हँसाने का काम करती है। यह श्रृंखला मीमर्स (Memers) के नाम से जानी जाती है।

मीमर्स द्वारा लोगों को हँसाने के लिए मीम्स (Memes) बनाए जाते हैं। (मीम्स एक ऐसी इमेज या वीडियो इत्यादि को कहा जाता है जिसमें कुछ हास्य प्रस्तुत करने वाले शब्द लिखे होते हैं तथा मौजूदा समय में इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण ये बड़ी तेजी से फैलते हैं)

मीम्स मुख्यतः ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बनाए जाते हैं ताकि लोगों को हँसने के लिए कुछ नया मिल सके। ज्यादातर समय यह ट्रेडिंग टॉपिक न्यूज से निकलते हैं। लेकिन कभी-कभी किसी प्रसिद्ध मीम्स पेज द्वारा स्वयं भी गढ़ लिए जाते हैं।

BINOD शब्द भी इसी तरह का एक ट्रेंडिंग मीम है जिसे मिलेनियल फ्रेंडली यूट्यूब चैनल द्वारा उस समय गढ़ा गया जब Binod Tharu नाम के यूट्यूब यूजर ने कोई वैल्यूएबल कमेंट करने की बजाए अपना ही नाम BINOD लिख कर कमेंट कर दिया; जिसका कोई लॉजिक नही बना। जिसके बाद मीमर्स की श्रृंखला ने इसे हाथों हाथ लिया और BINOD शब्द का इस्तेमाल कर तरह-तरह के व्यंग्य तैयार करने शुरू के दिए जिसके बाद यह शब्द अचानक से ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा।

मीमर्स मुख्य रूप से मिलेनियल्स तथा सेंटेलियन्स के लिए कंटेंट्स बनाते हैं।

मिलेनियल्स उन लोगों को कहा जाता है जो 21 वीं शताब्दी की शुरुआत में युवा अवस्था में पहुँचे हैं; अर्थात जिनका जन्म 1981 से 1996 के मध्य हुआ है। इन्हें जनरेशन Y के नाम से भी जाना जाता है। इस जनरेशन ने इंटरनेट को बनते हुए देखा है तथा ये इंटरनेट से पहले की दुनिया तथा बाद कि दुनिया दोनों से वाकिफ हैं।

वहीं सेंटेलियन्स उन लोगों को कहा जाता है जो 21 वीं शताब्दी के दूसरे दशक में युवा हुए हैं; अर्थात जिनका जन्म 1995 से 2015 के मध्य हुआ है। ये बचपन से ही इंटरनेट के संपर्क में रहे हैं जिस कारण इंटरनेट को अपने जीवन का अटूट हिस्सा मानते हैं लेकिन इंटरनेट से पहले के जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी नही रखते। इन्हें जनरेशन Z के नाम से जाना जाता है।

इस प्रकार इंटरनेट की आसान उपलब्धता, इसके उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या, मीमर्स द्वारा नए कंटेंट की खोज तथा हास्य व्यंग्य करने का नया चलन; इन सब के चलते हमें बहुत बार अजीबोगरीब शब्द ट्रेंड करते दिखाई देते हैं।

लेबनान का अर्थ | Lebanon Meaning in Hindi

हाल ही में लेबनान की राजधानी में अमोनियम नाइट्रेट के भंडार में हुए विस्फोट के कारण लेबनान देश चर्चा में आ गया है। हालांकि यह तो एक दुर्घटना थी लेकिन पहली नजर में इसे एक हमला माना गया कारण है लेबनान का हमलों से भरा इतिहास। लेबनान के लोग छोटे-मोटे हमलों के आदि हैं; लेकिन इस हादसे ने पहले से ही अनेक समस्याओं से जूझ रहे लेबनान को एक नया घाव दे दिया है। लेबनान का दुर्भाग्य है कि वो सीरिया और इजरायल के बीच में स्थित है जिस कारण ना चाहते हुए भी लेबनान की सरकार अपने देश में शांति स्थापित कर पाने में आज तक असफल है। इस वीडियो में आपको लेबनान के बारे में बहुत सी ऐसी जानकारियां मिलेंगी जिनके बारे में हर उस नागरिक को पता होना चाहिए जो अपने देश में शांति स्थापित करने की कामना करता है। तो आइए जानते हैं लेबनान देश के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य।

लेबनॉन पश्चिमी एशिया में भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित एक देश है।

इसका आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ लेबनान (लेबनान गणराज्य) है। गणराज्य ऐसे देश को कहा जाता है जहां आम नागरिक देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हो सके।

लेबनान पूर्व व उत्तर दिशा में सीरिया देश से सीमा बनाता है वहीं इसके दक्षिण में इजरायल देश स्थित है वहीं इसके पश्चिम में भूमध्य सागर स्थित है।

लेबनान की राजधानी का नाम बेरूत है (जो 04 अगस्त 2020 को हुए धमाके के चलते चर्चा में है)

लेबनान की आधिकारिक भाषा अरबी है।

लेबनान में 54% मुस्लिम (जिनमें शिया व सुन्नी दोनों सम्प्रदायों की लगभग आधी-आधी आबादी है) 41% ईसाई तथा 05% द्रूस रहते हैं। (द्रूस एक एकेश्वरवादी समुदाय है जिसे शिया सम्प्रदाय की शाखा के रूप में जाना जाता है)

लेबनान में एकात्मक संसदीय प्रणाली है तथा यह एक संवैधानिक गणराज्य है। इस देश की सरकार में राजनीति व धर्म का मिला जुला रूप शामिल है।

लेबनान का क्षेत्रफल 10,452 वर्ग किलोमीटर है तथा इसकी जनसंख्या 68 लाख 60 हजार के लगभग है।

लेबनान की मुद्रा "लेबनानी पाउंड" है मौजूदा समय में भारत का एक रूपया लगभग 20 लेबनानी पाउंड के बराबर है।

लेबनान वर्ष 1516 से 1918 तक उस्मानी साम्राज्य (ऑटोमन एम्पायर) के अधिकार में रहा तथा प्रथम विश्व युद्ध में उस्मानी साम्राज्य का पतन के बाद दो वर्षों तक आजाद रहा।

उस्मानी साम्राज्य के पतन के बाद वर्ष 1920 में लेबनान को फ्रेंच मैंडेट के अंतर्गत फ्रांस के अधिकार में सौंप दिया गया। इस मैंडेट में यह तय किया गया कि जब लेबनान के लोग स्वयं की सरकार बनाने के योग्य हो जाएंगे तो इसे आजाद कर दिया जाएगा।

जब लेबनान फ्रांस के अधिकार में था तो फ्रांस ने वर्ष 1920 में सीरिया सहित आसपास के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर "ग्रेटर लेबनान" की स्थापना की।

वर्ष 1943 लेबनान में स्थानीय सरकार बनी तथा उसने मैंडेट को एकतरफा रूप से समाप्त कर दिया।

फलस्वरूप प्रतिक्रिया करते हुए फ्रांस ने लेबनान की नई सरकार को जेल में डाल दिया लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते 22 नवंबर 1943 के दिन इस नई सरकार को पुनः रिहा कर दिया गया। फलस्वरूप लेबनान को आजादी मिली।

फ्रांस ने वर्ष 1946 में लेबनान से अपनी पूरी सेना वापिस बुला ली तथा लेबनान पूरी तरह से एक स्वतंत्र देश बन गया।

स्वतंत्रता के बाद लेबनान ने अपनी खुद की कॉन्फेशनलिज्म (Confessionalism) रूपी सरकार स्थापित की।

कॉन्फेशनलिज्म सरकार लेबनान से पहले किसी देश में देखने को नही मिली थी। सरकार के इस रूप में लेबनान ने अपने यहां के सभी धर्मों को सम्मान देने के लिए सरकारी व्यवस्था में धार्मिक व राजनीतिक गठजोड़ स्थापित किया।

इस व्यवस्था के अंतर्गत यह तय किया गया कि लेबनान का राष्ट्रपति केवल मेरोनाईट ईसाई समुदाय का सदस्य बन सकेगा; प्रधानमंत्री केवल सुन्नी समुदाय का सदस्य बन सकेगा; तथा स्पीकर ऑफ चैंबर केवल शिया समुदाय का सदस्य ही बन सकेगा।

इस प्रकार लेबनान की सरकार में राजनीतिक व धार्मिक संतुलन स्थापित हुआ।

लेबनान के प्रथम राष्ट्रपति बी. अल खौरी (B. El Khoury) बने।

लेबनान वर्ष 1945 में सयुंक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य देश बना। वहीं वर्ष 1961 में गुट निरपेक्ष देशों में भी शामिल हुआ।

शुरुआती तौर पर लेबनान में राजनीतिक व आर्थिक स्थिरता बनी रही लेकिन वर्ष 1975 में लेबनान में गृह युद्ध शुरू हो गया जो वर्ष 1990 तक चला और यहीं से लेबनान के बुरे दिन शुरू हो गए। (गृह युद्ध किसी देश के अंदर विभिन्न समुदायों में पनपी हिंसा को कहा जाता है जहां देश के नागरिक संगठन बनाकर आपस में ही लड़ने लगते हैं)

इस युद्ध के कारण लेबनान में लगभग 01 लाख 20 हजार लोगों की मृत्यु हुई; 76 हजार लोग विस्तापित होने पर विवश हुए जबकि लगभग 10 लाख लोग देश छोड़ने पर मजबूर हुए।

लेबनान के इस गृह युद्ध का कारण क्षेत्रीय ताकतों (विशेषकर इजरायल, सीरिया और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन) द्वारा लेबनान को अपने आपसी झगड़े सुलझाने के लिए लड़ाई के मैदान के तौर पर इस्तेमाल करना था।

फिलिस्तीन मुक्ति संगठन फिलिस्तीन नामक स्वतंत्र देश स्थापित करने के उद्देश्य से सन् 1964 में गठित हुआ एक संगठन है। 100 से अधिक देशों ने इसे फिलिस्तीनी लोगों का एकमात्र वैधानिक प्रतिनिधि स्वीकार किया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल इसे आंतकवादी संगठन मानते हैं फिलिस्तीनी शरणार्थी वो लोग हैं जिन्हें 1948 में इजरायल की स्थापना के समय देश से निष्काषित कर दिया गया था और फिलिस्तीन का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया था। ये शरणार्थी आज भी अपनी खोई हुई जमीन पाने के लिए इजरायल पर हमलावर हैं।

लेबनान गृह युद्ध के बीज उस समय बोए गए जब वर्ष 1967 में फिलिस्तीनी शरणार्थियों ने इजरायल पर हमला करने के लिए लेबनान में बेस स्थापित कर लिया। कारण था लेबनान का इजरायल से सीमा बनाना।

फलस्वरूप इजरायल ने वर्ष 1982 में लेबनान पर हमला किया तथा पूरे देश से फिलिस्तीनियों को निकाल बाहर करने के उद्देश्य से लेबनानी इलाकों पर काबिज हुआ।

लेबनान में इजरायल के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसके विरोध में वर्ष 1985 में ईरान की सहायता से लेबनान में हिजबुल्ला की स्थापना हुई। (हिजबुल्ला एक शिया राजनीतिक और अर्द्धसैनिक संगठन है जो आज लेबनान की आधिकारिक सेना से भी अधिक ताकतवर है तथा लेबनान की सरकार में हिस्सेदार है। यह संगठन अपने धर्म को लेकर कट्टर है और आज भी इजरायल के खिलाफ कार्यरत है)

वर्ष 1990 में लेबनान का गृह युद्ध समाप्त हुआ तथा वर्ष 2000 में इजरायल ने अपनी सेना वापिस बुला ली।

वहीं फिलिस्तीनी शरणार्थियों के खिलाफ संघर्ष हेतु लेबनान में सीरिया की सेना भी वर्ष 1976 से 2005 तक अपना वर्चस्व रख चुकी है।

लेकिन संस्कृतियों व धर्मों से संपन्न होने के बावजूद भी लेबनान आज तक एक स्थिर आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था के लिए आज तक संघर्ष कर रहा है।

जेईई मेन का अर्थ | JEE Main Meaning in Hindi

JEE MAIN एक इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा है; भारत के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए राजकीय स्तर पर कई प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की ज...