मार्क्सवादी दृष्टिकोण का अर्थ Marksvadi drishtikon meaning in hindi

राजनीतिक विज्ञान के अंतर्गत मार्क्सवादी दृष्टिकोण से अभिप्राय यह है कि कार्ल मार्क्स के राज्य व राजनीति को लेकर क्या विचार थे। दरअसल ज्यादातर दृष्टिकोणों में जहां राज्य को शोषण समाप्त करने, लोगों की रक्षा करने, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने, समानता लाने व किसी भी समाज का शासन चलाने के लिए अनिवार्य तत्व बताया गया है, वहीं मार्क्सवादी दृष्टिकोण राज्य को आवश्यकता को सिरे से नकारता है। मार्क्सवादी दृष्टिकोण का मानना है कि राज्य खुद ही व्यक्ति का शोषण करता है तथा यह संघर्षों को जन्म देता है। मार्क्सवादी लोग वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक ढांचे को समाप्त करके उसके स्थान पर वर्ग-विहीन समाज की स्थापना करना चाहते हैं। जिसमें ऊंच-नीच, जात-पात या अमीर गरीब जैसा कोई वर्ग न रहे तथा सभी आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से एक समान रहें। मार्क्सवादी इसके लिए राज्य की आवश्यकता को नही मानते। इस समानता को पाने के लिए कार्ल मार्क्स सर्वहारा क्रांति का सिद्धांत देते हैं जिसके अनुसार अमीरों और गरीबों के बीच एक दिन संघर्ष होगा और गरीब जीत जाएंगे क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है, तथा जीतने के बाद वे एक साम्यवादी व्यवस्था का निर्माण करेंगे जिसमें वे योग्यतानुसार कार्य करेंगे तथा आवश्यकतानुसार पैसा लेंगे। इस प्रकार सब समान हो जाएंगे तथा अमीर-गरीब का वर्ग-संघर्ष समाप्त हो जाएगा, जिससे राजनीति तथा राज्य की कोई आवश्यकता ही नही रहेगी। हालांकि मार्क्सवादी दृष्टिकोण के आधार पर हुई रूसी क्रांति के बाद वो समानता देखने को नही मिली जिसकी बात मार्क्स ने की थी। बल्कि सोवियत समय के दौरान सत्ता समाज में बंटने की बजाय कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो गई।

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