उदारवादी दृष्टिकोण का अर्थ Udarvadi Drishtikon meaning in hindi

उदारवादी दृष्टिकोण गतिशील है क्योंकि यह समय के साथ बदल गया है। हालांकि उदारवादी दृष्टिकोण मौजूदा समय में सर्वाधिक प्रचलित व मान्य है। 20 वीं सदी का उदारवाद कल्याणकारी राज्य से जुड़ा हुआ है जो सामाजिक स्वतंत्रता के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी पक्ष लेता है। जानने योग्य है कि उदारवादी विचारधारा अधिक्तर समय व्यक्ति की स्वतंत्रता व अधिकारों पर केंद्रित रही है। जॉन लॉक को आधुनिक उदारवाद का जनक माना जाता है, आधुनिक उदारवाद व्यक्ति के अधिकारों तथा उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अधिक बल देता है तथा चाहता है कि राज्य की शक्तियां व्यक्ति के निजी मामलों में हस्तक्षेप ना करें राज्य केवल शांति स्थापित करने तथा बाहरी आक्रमण से सुरक्षा करने तक सीमित रहे।

उदारवाद व्यक्ति को स्वतंत्रता तो देना चाहता है लेकिन यह भी मानता है कि व्यक्ति स्वार्थी होता है इसलिए वह कई बार अपने हित को पूरा करना के लिए सामने वाले का अहित भी कर सकता है इसलिए उस पर कुछ कानूनी नियंत्रण आवश्यक है और उसी कानूनी व्यवस्था की प्राप्ति हेतु वह राज्य को अनिवार्य मानता है। उदारवादी दृष्टिकोण राज्य द्वारा किसी भी वर्ग के लिए दिए जाने वाले आरक्षण का विरोधी है तथा एक वर्ग के आरक्षण को दूसरे वर्ग का शोषण मानता है, उदारवादी लोग खुली प्रतिस्पर्धा का समर्थन करते हैं।

खुली प्रतिस्पर्धा का अर्थ यह भी नही है कि उदारवादी बाजार को पूरी तरह से लोगों के हवाले कर दे, क्योंकि ऐसी अवस्था में पूंजीपति लोग गरीबों-मजदूरों का शोषण करना शुरू कर देंगे। मूलभूत आवश्यकताओं जैसे दाल, चीनी, अनाज व अन्य जीने के लिए आवश्यक वस्तुओं से जुड़े उद्योग में उदारवादी सरकार का हस्तक्षेप चाहते हैं ताकि जीने के लिए आवश्यक वस्तुओं के लिए मजदूरों को पूंजीपतियों का मोहताज ना बनना पड़े। इस प्रकार जितने भी सार्वजनिक हित हैं उनकी पूर्ति के लिए उदारवादी राज्य की उपस्थिति अनिवार्य मानते हैं, जबकि इसके उलट हमने देखा था कि मार्क्सवादी राज्य का अस्तित्व ही मिटाने के पक्ष में रहते हैं।

उदारवादी मीडिया पर किसी भी प्रकार की बंदिश का विरोध करते हैं तथा राज्य को यह अधिकार नही देना चाहते कि वह किसी भी प्रकार से कोई बात अपने नागरिकों से छुपाने की कोशिश करे। अंततः व्यक्ति को यह अधिकार होना चाहिए कि वो प्रत्येक बात को जानें और अपने विवेकानुसार उस पर अमल करें। इस प्रकार उदारवादियों की प्रत्येक माँग व्यक्ति से शुरू होकर व्यक्ति पर आकर ही समाप्त होती है, वे समाज, राज्य व अन्य सभी संगठनों को व्यक्ति के हितों की पूर्ति का साधन मानते हैं।

उदारवादी संगठनों के अलावा धर्म को भी व्यक्ति के बाद ही रखते हैं तथा सभी धर्मों को एक समान मानते हैं। बिना किसी धार्मिक दबाव के प्रत्येक व्यक्ति को अपने अनुसार किसी भी धर्म का अनुसरण करने की स्वतंत्रता व पूर्णतः अपने अनुसार जीवन जीने का अधिकार देने के समर्थक हैं। जहां उदारवाद एक व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता देता है वहीं उससे यह भी अपेक्षा करता है कि वह अन्य व्यक्तियों पर किसी धर्म को मानने का दबाव ना बनाए, तथा सभी के धर्मों, विश्वासों तथा रीति रिवाजों का सम्मान करे। इस प्रकार उदारवाद जिओ और जीने दो के सिद्धांत के करीब ही अपने विचार रखता है।

धर्म के बाद परिवार तक को भी उदारवाद व्यक्ति पर दबाव बनाने से वंचित करने का पक्षधर है, इस प्रकार व्यक्त किससे शादी करना चाहता है तथा परिवार के।साथ रहना चाहता है या नही यह पूर्णतः उसके विवेक पर छोड़ने की बात कहते हैं इस प्रकार हम देखते हैं की उदारवादी लगभग सब कुछ व्यक्ति और व्यक्ति के विवेक पर छोड़ने के पक्षधर हैं।

राजनीति के क्षेत्र में उदारवाद एक उत्तरदायी तथा प्रतिनिधि संस्था का समर्थन करता है। जिससे स्पष्ट होता है कि यह लोकतंत्र के समर्थक हैं क्योंकि उत्तरदायी व प्रतिनिधि सरकार लोकतंत्र का उत्पाद है। उदारवादी सत्ता के विकेंद्रीकरण को उचित ठहराते हैं। उदारवादी इस बात पर बल देते हैं कि व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का दबाव नही होना चाहिए जितनी अधिक हो सके उसे स्वतंत्रता दी जानी चाहिए हालांकि स्वतंत्रता इतनी भी ना हो कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के निजी क्षेत्र में हस्तक्षेप करने लगे।

इस प्रकार उदारवादी दृष्टिकोण एक ऐसा दृष्टिकोण है जो यह मानता है कि व्यक्ति एक विवेकशील प्रार्णी है तथा जितनी भी आज व्यवस्थाएं हम देखतें है वो खुद व्यक्ति ने बनाई हैं चाहे वो राज्य हो, समाज हो या परिवार। इसलिए व्यक्ति को किसी भी प्रकार से इनके अधीन नही किया जाना चाहिए हालांकि उनकी प्रकृति पर अंकुश रखने के लिए राज्य व अन्य संस्थाओं द्वारा कुछ नियम लगाए जाने चाहिए, कुल मिलाकर सकारात्मक स्वतंत्रता व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जो उसे स्वतंत्र भी रखे और दूसरे की स्वतंत्रता का हनन भी ना करने दे।

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