बीआईएस हॉलमार्क का अर्थ | BIS Hallmark Meaning in Hindi

जब सोने का कोई आभूषण बनाया जाता है तो सोने को सख्त करने के लिए उसमें कुछ अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं।

अब क्योंकि एक ग्राम सोने की कीमत भी 5000 तक होती है इसलिए एक ग्राम की मामूली मिलावट भी ग्राहक के लिए बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

इसलिए यह जानना अति आवश्यक हो जाता है कि जो आभूषण हम खरीद रहे हैं उसमें सोने की सही मात्रा कितनी है। तो सामान्य तौर पर लोग जान पहचान वाले सुनार से ही सोना खरीदते हैं ताकि उनके साथ कोई ठगी ना हो जाए। लेकिन क्या यह शुद्ध सोना होने की गारंटी है क्योंकि सोने की मात्रा कितनी है यह लैब में टेस्टिंग कर मालूम करना पड़ता है।

आभूषण में सोने की मात्रा कैरेट में मापी जाती है। कैरेट सोने का 1/24 भाग होता है। सोने के आभूषण सामान्यतः 14 कैरेट, 18 कैरेट, 20 कैरेट, 22 कैरेट और 24 कैरेट के होते है। इसमें 24 कैरेट (99.95%) का अर्थ होता है कि सोने में नाम मात्र की मिलावट है जिसे ना के बराबर मानते हुए इसे शुद्ध सोना माना जाता है। वहीं 18 कैरेट सोने में 75% सोना होता है यानि कि 18 भाग सोना और 6 भाग अन्य धातु। वहीं 22 कैरेट सोने में 91.6% सोना होता है। लेकिन आपके आभूषण में सोना कितना है यह कैसे पता चले?

आपके आभूषण में कितना सोना है यह जानने के लिए काम आता है हॉलमार्क; यह आपके आभूषण में सोने की कितनी मात्रा है इसकी गारंटी देता है। हॉलमार्किंग का काम भारत में BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैण्डर्ड) करता है। BIS देश भर में सोने के अलग-अलग स्थानों पर स्थापित सेंटर्स को लाइसेंस देता है।

किसी सोने पर हॉलमार्किंग के जरिए चार निशान लगाए जाते हैं पहला BIS का निशान, दूसरा कैरेट की निशानी, तीसरा हॉलमार्क लगाने वाले सेंटर की निशानी तथा चौथा सुनार के दुकान की निशानी। इसके अलावा हॉलमार्किंग का वर्ष भी लिखा जा सकता है।

यदि हॉलमार्किंग के बाद सोने की शुद्धता में कोई कमी मिलती है तो हॉलमार्किंग सेंटर का लाइसेंस रद्द करते हुए उस पर कार्यवाही की जा सकती है जिसमें 1 वर्ष की सजा व 1 लाख जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं ग्राहक को हॉलमार्क से जितना कम सोना मिला है उसकी कीमत का दोगुना पैसा दिया जाता है।

हालांकि हॉलमार्किंग का महत्व सोने के लिए ज्यादा है लेकिन यह मार्किंग चाँदी पर भी करवाई जा सकती है।

बिटकॉइन का अर्थ | Bitcoin Meaning in Hindi

बिटकॉइन एक वर्चुअल करेंसी (आभासी मुद्रा) है इसे अन्य करेंसी की तरह छापा नही जा सकता ये केवल इंटरनेट पर ही अपना अस्तित्व रख सकती है।

बिटकॉइन की शुरुआत वर्ष 2009 में एक अज्ञात व्यक्ति सतोशी नाकामोटो द्वारा की गई थी।

बिटकॉइन की तरह ही बहुत सी करेंसी मार्किट में मौजूद हैं इन सब को सयुंक्त रूप से क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है।

जिस तरह दुनिया की मौजूदा करेंसी जैसे कि रूपया, डॉलर, यूरो इत्यादि को डिजिटल रूप में बदला जा सकता है और फिर फिजिकल रूप में जेब में डाला जा सकता है बिटकॉइन के साथ ऐसा नही है इसे आप अपने डेटा की तरह केवल ऑनलाइन वॉलेट में ही रख सकते हैं। यहाँ तक कि आप इसे देख भी नही सकते।

बिटकॉइन को पारंपरिक मु्द्रा के विकल्प के तौर पर देखा जाता है इसलिए इसके भविष्य में होने वाले प्रयोग को लेकर एक बड़ा तबका काफी आशावादी हैं।

बिटकॉइन का दाम तेजी से घटता बढ़ता है और इसे ऑनलाइन क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से खरीदा व बेचा जा सकता है इसलिए लोग इसमें निवेश करते हैं।

बिटकॉइन किसी केंद्रीय संस्था (जैसे कि बैंक इत्यादि) द्वारा जारी नही की जाती इसलिए इसकी नोटबंदी या अवमूल्यन नही किया जा सकता।

पूर्णतः डिजिटल होने तथा हर ट्रांजेक्शन का पब्लिक रिकॉर्ड होने के चलते इसमें धोखधड़ी होने के चांस ना के बराबर हैं।

बिटकॉइन में बड़ी ही तेजी से गिरावट व उछाल आता है जिस कारण नुकसान की आशंका हमेशा बनी रहती है।

बिटकॉइन के लेनदेन में किसी भी तरह का कोई शुल्क नही लगता और ना ही इसे स्टोर करने की कोई सीमा है।

सामान्य करेंसी का लेन देन करने हेतु हमें बैकों पर या अन्य किसी आर्थिक संस्था पर आश्रित होना पड़ता है लेकिन बिटकॉइन कंप्यूटर कोड पर काम करता है इसलिए इसके लेन देन हेतु किसी भी संस्था पर आश्रित होने की आवश्यकता नही है।

जिस प्रकार सोने या अन्य धातु की माइनिंग (खनन) होता है उसी प्रकार कंप्यूटर पॉवर का प्रयोग कर ट्रांसजेक्शन प्रोसेस करने व अन्य तरीकों से नए बिटकॉइन बनाए जा सकते हैं। बिटकॉइन बनाने की प्रक्रिया को बिटकॉइन माइनिंग कहा जाता है।

बिटकॉइन की कीमत 45 लाख तक पहुँच चुकी है इसलिए यह दुनिया की किसी भी भौतिक करेंसी से महँगी है। (हालांकि इसकी कीमत में भारी उत्तर चढ़ाव आता रहता है)

बिटकॉइन बनने की अंतिम सीमा 2 करोड़ 10 लाख है इससे अधिक बिटकॉइन नही बनाए जा सकेंगे।

बिटकॉइन का मूल्य इसकी माँग पर निर्भर करता है।

बहुत से अर्थशास्त्री बिटकॉइन को पोंजी स्कीम का हिस्सा मानते हैं तथा इसे एक बबल की तरह देखते हैं।

Monsoon Satra Meaning in Hindi

मॉनसून सत्र में भारत की संसद में जुलाई और अगस्त के महीने में सांसदों की होने वाली बैठक को कहा जाता है भारत की संसद में 1 वर्ष में कुल 3 सत्र...