सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

नवंबर 12, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वैधानिक सत्ता का अर्थ Vaidhanik satta meaning in hindi

राजनीतिक सिद्धांत एक परिकल्पना और तथ्य ज्ञान है, जो राजनीति क्या है, से संबंधित है। यह राजनीतिक समस्याओं का अन्वेषण है डेविड हैल्ड कहते हैं कि राजनीतिक जीवन - विषयक संकल्पनाओं व सामान्यीकरणों का एक तंत्र है। जिसमें सरकार राज्य व समाज की प्रकृति, उद्देश्य व मुख्य अभिलक्षण विषयक तथा मनुष्यों की राजनीतिक क्षमताएं विषयक विचार, कल्पनाएं एवं उक्तियां सम्मिलित होती हैं। यद्द्पि राजनीतिक सिद्धांत के विद्वानों द्वारा को सर्वसम्मत परिभाषा उपलब्ध नहीं है। उतने ही प्रकार के राजनीतिक सिद्धांत हैं जितने राजनीतिक सिद्धांत के विषय में लिखने वाले विद्वान हैं। राजनीतिक सिद्धांत राजनीति विज्ञान की एक शाखा है यह उन विचारों का समूह है, जिनके आधार पर राजनीतिक तथ्यों एवं राजनीतिक संस्थाओं के स्वरूप की व्याख्या किया जाना संभव है। किसी भी राजनीतिक घटना के व्यवहारिक निरीक्षण करने तथा उससे निष्कर्ष निकालने के लिए राजनीतिक सिद्धांत की आवश्यकता होती है। व्यवहारिक पक्ष के साथ राजनीतिक सिद्धांत का आदर्शात्मक पक्ष भी है। मेयो के अनुसार राजनीतिक सिद्धांत के तीन पक्ष है - 1.  तथ्यात्मक - वर्णनात्मक 2. अनुभाविक अध्य

राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ Rajnitik siddhant meaning in hindi

राजनीतिक सिद्धांत एक परिकल्पना और तथ्य ज्ञान है, जो राजनीति क्या है, से संबंधित है। यह राजनीतिक समस्याओं का अन्वेषण है डेविड हैल्ड कहते हैं कि राजनीतिक जीवन - विषयक संकल्पनाओं व सामान्यीकरणों का एक तंत्र है। जिसमें सरकार राज्य व समाज की प्रकृति, उद्देश्य व मुख्य अभिलक्षण विषयक तथा मनुष्यों की राजनीतिक क्षमताएं विषयक विचार, कल्पनाएं एवं उक्तियां सम्मिलित होती हैं। यद्द्पि राजनीतिक सिद्धांत के विद्वानों द्वारा को सर्वसम्मत परिभाषा उपलब्ध नहीं है। उतने ही प्रकार के राजनीतिक सिद्धांत हैं जितने राजनीतिक सिद्धांत के विषय में लिखने वाले विद्वान हैं। राजनीतिक सिद्धांत राजनीति विज्ञान की एक शाखा है यह उन विचारों का समूह है, जिनके आधार पर राजनीतिक तथ्यों एवं राजनीतिक संस्थाओं के स्वरूप की व्याख्या किया जाना संभव है। किसी भी राजनीतिक घटना के व्यवहारिक निरीक्षण करने तथा उससे निष्कर्ष निकालने के लिए राजनीतिक सिद्धांत की आवश्यकता होती है। व्यवहारिक पक्ष के साथ राजनीतिक सिद्धांत का आदर्शात्मक पक्ष भी है। मेयो के अनुसार राजनीतिक सिद्धांत के तीन पक्ष है - 1.  तथ्यात्मक - वर्णनात्मक 2. अनुभाविक अध्य

राजनीति का अर्थ Rajniti meaning in hindi

राजनीति का इतिहास उतना ही पुराना है जितना राज्य का। राजनीति शब्द की उत्पत्ति भी वहीं से मानी जाती है जहां से राज्य की। वास्तव में राजनीति (यानी कि पॉलिटिक्स) ग्रीक शब्द पोलिस (Polis) से बना है जिसका अर्थ नगर-राज्य होता है। प्राचीन यूनान में छोटे-छोटे नगर-राज्य हुआ करते थे और जो व्यक्ति इन नगर-राज्य के कार्यों में हिस्सा लेते थे उन्हें नागरिक अधिकार प्राप्त थे। ग्रीक दार्शनिकों के अनुसार व्यक्ति अपना संपूर्ण विकास राज्य के अंदर रहकर ही कर सकता है तथा राजनीति इसमें अपरिहार्य भूमिका निभाती है। राजनीति के संदर्भ में विभिन्न विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत है कुछ विद्वानों के अनुसार यह शक्ति के लिए संघर्ष से संबंधित पहलुओं का अध्ययन करने वाला विषय है तो कुछ के अनुसार यह राज्य और सरकार से संबंधित है। कुछ प्रमुख विद्वानों ने राजनीति को परिभाषित करने की कोशिश की है जो इस प्रकार है - मैक्स वेबर के अनुसार - "राजनीति का अर्थ, सत्ता में भागीदारी के लिए प्रयास करना या राज्यों के अंतर्गत सत्ता के विभाजन या राज्य के अंतर्गत समूहों के बीच राजनीति को प्रभावित करने का प्रयास करना है" मारंग्येथ

राज्य का अर्थ Rajya meaning in hindi

राज्य का परिचय राजनीतिक विज्ञान के अध्ययन का केंद्रीय बिंदु राज्य है। इस विज्ञान का संपूर्ण अध्ययन राज्य पर ही टिका हुआ है गार्नर ने तो यहां तक भी कहा है कि राजनीति विज्ञान का आरंभ और अंत राज्य से ही होता है तो वही आर जी गार्टन ने अपनी पुस्तक पॉलिटिकल साइंस में राजनीति विज्ञान की परिभाषा देते हुए कहा है कि राजनीतिक विज्ञान राज्य का विज्ञान है। तो इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि राज्य की का महत्व राजनीतिक विज्ञान के लिए कितना अधिक है राज्य के बिना राजनीतिक विज्ञान की कल्पना करना असंभव भी है और अधूरा भी। तो इस वीडियो में हम जानेंगे कि राज्य क्या होता है राज्य की परिभाषा क्या है। राज्य की परिभाषा स्पष्ट अर्थों में बात की जाए तो और राज्य चार अनिवार्य तत्वों से मिलकर बनी हुई एक इकाई है। इसमें जनसंख्या, निश्चित भूभाग, सरकार और संप्रभुता का होना अनिवार्य है। इन चारों तत्वों से मिलकर जिस भौगोलिक, राजनीतिक और सामाजिक इकाई का निर्माण होता है उसे हम राज्य कहते हैं राज्य को इंग्लिश में स्टेट कहा जाता है। भारत के संविधान के अनुसार राज्य संविधान के नजरिए से देखा जाए तो भारत के संविधान में राज्य शब

वैधीकरण का अर्थ Vaidhikaran meaning in hindi

सत्ता को वैध घोषित करने या बनाने की प्रक्रिया वैधीकरण कहलाती है। राजनीतिक विद्वान वैधता को राजनीति विज्ञान का मुख्य केंद्रीय विषय मानते हैं। वास्तव में, वैधता से हमारा तातपर्य उन विधियों से है, जिनके द्वारा सत्ताधारी अपनी सत्ता को उचित ठहराते हैं। वैधता सत्ता को परखने में सहायता प्रदान करती है। यह हमें बताती है कि सरकार या सत्ता संविधान के कानून के अनुसार कार्य कर रही है या नहीं। सरकार द्वारा बनाया गया का विधि संगत है या अवैध। यह वैधता द्वारा ही पता किया जा सकता है। सत्ता का कौन सा रूप उचित है, यह वैधता ही निर्धारित करती है। दूसरे शब्दों में, वैधता सत्ता शक्ति पर नियंत्रण रखने का एक कुशल साधन है। मैक्स वेबर ने इस संबंध में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए सत्ता के तीन रूपों को उचित ठहराया है, ये रूप हैं - 1. पारंपरिक वर्चस्व - इसके अनुसार व्यक्ति को सत्ता-शक्ति वंशानुगत रूप में प्राप्त होती है। सत्ता सदैव सत्ताधारी या उसके परिवार के हाथों में विद्यमान रहती है। सत्ताधारी परंपरागत मान्यताओं, परंपराओं तथा रीति-रिवाजों के कानूनों के अनुसार शासन करता है। 2. करिश्माई विधि - इसके अंतर्गत व्यक्

फासीवादी राज्य का अर्थ Fasivadi rajya meaning in hindi

एक ऐसा देश जो शासन चलाने के लिए फासीवाद की विचारधारा का अनुसरण करता हो, फासीवादी राज्य कहलाता है। फासीवाद 20 वीं शताब्दी में इटली में बेनिटो मुसोलिनी (1882 - 1945) के नेतृत्व में प्रथम विश्व युद्ध के समय उभरी कट्टर दक्षिणपंथी विचारधारा थी, इसका उदय पूंजीपतियों के सहयोग से हुआ जो तत्कालीन समय में समाजवाद से डरे हुए थे। फासीवाद की विशेषताओं में तानाशाही शासन, व्यक्ति या समाज हित से ऊपर राष्ट्रहित व राज्य की सर्वोच्चता, विपक्ष का जबरन दमन, समाज और अर्थव्यवस्था पर कठोर नियंत्रण शामिल है, इसे सर्वाधिकारवाद का व्यवहारिक रूप माना जाता है। फासीवाद एक व्यवहारिक आंदोलन था जिस कारण अनेक विचारधारा वाले लोगों ने अपने अपने तरीके से इसमें अपना योगदान दिया, जिस कारण फासीवाद का कोई निश्चित सिद्धांत नही बन पाया। फासीवाद का उदय अराजकतावाद, लोकतंत्र, उदारवाद, शांतिवाद तथा मार्क्सवाद के विरोध में हुआ तथा इसे सत्ता की सर्वोच्चता, उग्र राष्ट्रवाद, युद्ध नायकवाद, साम्राज्यवाद, व्यक्तित्व पूजा और कठोर शासन का कट्टर समर्थक माना जाता है। इटली में पनपे इस फासीवादी राजनीतिक आंदोलन का प्रभाव यूरोप के अन्य देशों खास

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का अर्थ Punjivadi arthvyavastha meaning in hindi

ऐसी आर्थिक व्यवस्था जिसमें वस्तुओं के उत्पादन और वितरण पर व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह का नियंत्रण होता है, को पूंजीवादी अर्थव्यवस्था कहा जाता है। ये व्यक्ति या समूह अपने संचित धन का प्रयोग और अधिक धन संचय के लिए करते हैं। इस प्रकार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के दो तत्व हैं निजी पूंजी व निजी लाभ। यह तंत्र पूर्णतः निजी लाभ के लिए चलाया जाता है जिस कारण इसमें मुक्त बाजार का निर्माण होता है तथा वस्तुओं की मांग और पूर्ति पूरी तरह से बाजार की प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करती है। अमेरिका सहित अधिकतर विकसित देश इस अर्थव्यवस्था का अनुसरण करते हैं तथा भारत भी समाजवाद के तत्वों सहित पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को अपनाए हुए है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के गुणों में बिना सरकारी हस्तक्षेप के व्यवस्था का स्वयं संचालन, आर्थिक स्वतंत्रता, संसाधनों का अनुकूल उपयोग, उत्पादकता में वृद्धि, उत्पादों की गुणवत्ता में वृद्धि, लोगों के जीवन स्तर में सुधार, तकनीकी विकास, बाजार में लचीलापन, पूंजी निर्माण, योग्यतानुसार पुरस्कार, पूंजी निर्माण में प्रोत्साहन, आर्थिक विकास दर में वृद्धि, लोकतंत्र की दृढ़ता में सहयोग इत्यादि शामिल

प्रस्तावना का अर्थ Prastavana meaning in hindi

संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु अनुच्छेद शुरू होने से पूर्व प्रस्तुत किए गए अंश को प्रस्तावना/ उद्देशिका कहा जाता है। ऑस्ट्रेलियाई संविधान से प्रभावित मानी जाने वाली उद्देशिका संविधान का सार है। उद्देशिका द्वारा संविधान के जिन विषयों को जाना जा सकता है वे हैं - संविधान के आदर्श, आकांक्षाएं, उद्देश्य, इसका शक्ति स्रोत (जो कि भारत के लोग हैं) उद्देशिका की प्रकृति के अनुसार यह संविधान का महत्वपूर्ण अंग नही है क्योंकि यह राज्य के तीनों अंगों में से किसी को भी संवैधानिक शक्ति प्रदान नही करती। यदि किसी विषय पर अनुच्छेद व उद्देशिका के बीच संघर्ष की स्थिति उतपन्न होती है तो ऐसे में अनुच्छेद को वरीयता दी जाती है। उद्देशिका के आधार पर न्यायालय में कोई वाद नही लाया जा सकता। उद्देशिका को एक शोभात्मक आभूषण की तरह माना जाता है जिसका प्रयोग संविधान में विद्यमान अस्पष्टता को दूर करने हेतु किया जाता है। उद्देशिका में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है वे संविधान की स्पष्ट छवि प्रस्तुत करते हैं। अंतिम सार के रूप में हम कह सकते हैं कि उद्देशिका मुख्य रूप से यह बताती है कि संविधान जनता के लिए है और

लोक प्रशासन का अर्थ Lok Prashasan meaning in hindi

लोक प्रशासन का शाब्दिक अर्थ लोंगो के लिए स्थापित प्रशासन है। प्रशासन एक व्यापक शब्द है इसके लिए इंग्लिश में Administration शब्द का प्रयोग किया जाता है जो लैटिन भाषा के Ad + Ministrare से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "लोगों की देखभाल करना" या "कार्यों की व्यवस्था करना" है। सरल भाषा में लोक प्रशासन वह व्यवस्था है जो किसी राज्य में बसने वाले मानव समाज को निश्चित दिशा में ले जाने हेतु किए जा सकने वाले सभी कार्यों का क्रियान्वयन करती है, इन कार्यों में मुख्य रूप से आपसी झगड़े सुलझाना, अपराध रोकना व शांति स्थापित करना शमिल है। मौजूदा समय में भारत की केंद्रीय लोक प्रशासन सेवा में 60 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। राज्य अमूर्त होता है तथा लोक प्रशासन सहित अन्य सभी प्रशासनिक सेवाएं मिलकर राज्य को मूर्त रूप प्रदान करती हैं। लोक प्रशासन को राज्य की बाँहें कहा जाता है। लोक प्रशासन आधुनिक समाज का एक आवश्यक अंग है और जीवन का एक प्रमुख तत्व है। समय के साथ ऐसे कार्यों में वृद्धि हुई है जिन्हें लोक प्रशासन द्वारा क्रियान्वित किया जाता है इसी कारण लोक प्रशासन के आकार में लगातार वृद्धि हो रह

छायावाद का अर्थ Chhayavad meaning in hindi

छायावाद (1918-1936) हिंदी कविता के इतिहास का प्रसिद्ध आंदोलन है। छायावाद की काव्य धारा में कल्पना, मानवीकरण, प्रकृति प्रेम, नारी प्रेम तथा भावन्मुक्त की प्रधानता है। छायावाद का युग हिंदी साहित्य के चौथे भाग आधुनिक काल में भारतेंदु युग (1868-1900) तथा द्विवेदी युग (1900-1918) के बाद आया। छायावाद के स्पष्ट अर्थ को लेकर हिंदी साहित्य के विद्वान एकमत नही है। आचार्य शुक्ल तथा डॉ. रामकुमार वर्मा छायावाद को रहस्यवाद से जोड़ते हैं तो वहीं डॉ. नागेंद्र इसे स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह बताते हैं। छायावादी कविताओं की रचना द्विवेदी युग की नीरस तथा इतिवृत्तात्मक कविताओं के विरोध में की गई थी। क्योंकि उस दौर का कवि समाज सुधारों की चर्चाओं से भरी द्विवेदी काल की कोरी उपदेशात्मक कविताओं के नीरसपन से ऊब गया था इसलिए छायावाद में कविताएं इतिवृत्तात्मकता (वस्तुओं के विवरण) को छोड़ कल्पना लोक में विचरण करने लगी। छायावाद काव्य धारा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसके बाद बृजभाषा हिंदी की काव्य धारा से बाहर हो गई तथा हिंदी खड़ी बोली गद्य व पद्य दोनों की भाषा बन गई। इससे पूर्व भक्तिकाल तथा रीतिकाल में बृजभा

नौकरशाही का अर्थ Naukarshahi meaning in hindi

किसी भी लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली में दो कार्यपालिकाएं होती हैं - राजनीतिक कार्यपालिका एवं अराजनीतिक कार्यपालिका। राजनीतिक कार्यपालिका का कार्यकाल चुनावों के परिणामों पर निर्भर करता है इसलिए इसे अस्थायी कार्यपालिका कहा जाता हैं तो वहीं अराजनीतिक कार्यपालिका का कार्यकाल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन से अप्रभावित रहता है इसलिए इसे स्थायी का र्यपालिका कहा जाता है, इसी स्थायी कार्यपालिका को आम बोलचाल में नौकरशाही या अधिकारी तंत्र के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार नौकरशाही स्थायी सरकारी मशीनरी की तरह काम करती हैं। नौकरशाही शब्द ब्यूरो (जो कि एक फ्रांसीसी शब्द है) से बना है जिसका अर्थ होता है लिखने का मेज, इस प्रकार ब्यूरोक्रेसी को मेज का शासन कहा जाता है, जहां कार्यालय के मेज पर बैठ कर सरकार चलाई जाती है। नौकरशाही के अन्य नाम हैं - सिविल सेवा, मैजिस्ट्रेसी, सरकारी निरंकुशवाद, विभागीय सरकार, विशिष्ट वर्ग व गैर-राजनीतिक कार्यपालिका। नौकरशाही के कारण ही समय-समय पर होने वाले राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद शासन-प्रशासन में स्थायित्व व निरंतरता बनी रहती है। नौकरशाही तंत्र एक निर्धारित सेवाशर्त के अध

कार्यपालिका का अर्थ Karyapalika meaning in hindi

कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो विधायिका द्वारा स्वीकृत नीतियों और कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है। कार्यपालिका प्रायः नीति निर्माण में भी भाग लेती है। कार्यपालिका का औपचारिक नाम अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न होता है। कुछ देशों में राष्ट्रपति होता है तो कहीं चांसलर। कार्यपालिका में केवल राष्ट्रपति प्रधानमंत्री या मंत्री ही नहीं होते, बल्कि इसके अंदर पूरा प्रशासनिक ढांचा (सिविल सेवा के सदस्य) भी आते हैं। सरकार के प्रधान और उनके मंत्रियों को राजनीतिक कार्यपालिका कहते हैं और वे सरकार की सभी नीतियों के लिए उत्तरदाई होते हैं, लेकिन जो लोग रोज-रोज के प्रशासन के लिए उत्तरदाई होते हैं उन्हें स्थाई कार्यपालिका कहा जाता है।

राजनीतिक चेतना का अर्थ Rajnitik chetna meaning in hindi

राजनीति को लेकर व्यक्ति की आत्म-जागरूकता को ही राजनीतिक चेतना कहा जाता है। यह जान लेना कि अंततः किस प्रकार से राजनीति ही हमारी सभी प्रकार की समस्याओं का कारण है तथा राजनीति को समझ कर व इसकी शक्ति का प्रयोग कर किस प्रकार अपनी समस्याओं को सफलतापूर्वक समाप्त किया जा सकता है यही राजनीतिक चेतना के होने का प्रमाण है। मार्क्स के अनुसार तो हमारी पूरी चेतना ही राजनीतिक अर्थव्यवस्था का प्रतिबिंब मात्र है तथा एक व्यक्ति के विचार उसकी राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों से आकार लेते हैं। जब किसी समाज में राजनीतिक चेतना नही होती तो उसे झूठी चेतना का शिकार होना पड़ता है जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नही होता। उदाहरणतः समाज की ऊँच-नीच तथा गरीबी-अमीरी को सदियों तक भगवान की देन माना जाता रहा क्योंकि राजनीतिक चेतना के अभाव में लोगों ने उन्हीं विचारधाराओं को सच मान लिया गया जो अभिजात वर्ग व तात्कालीन शासकों ने जनता में प्रचारित करवाए। राजनीतिक चेतना के अभाव में ही अधीनस्थ लोग अपनी अधीनता को स्वीकार किए रहते हैं, उन्हें अपनी वास्तविक ताकत का एहसास ही नही होता। उदाहरणतः राजनीतिक चेतना आने तक भारत ने अंग्रेजो

राष्ट्र राज्य का अर्थ Rashtra Rajya meaning in hindi

ऐसा देश जिसमें राष्ट्र (जन समुदाय) व राज्य (राजनीतिक इकाई) में एकरूपता हो, को राष्ट्र-राज्य कहा जाता है। राज्य जब राष्ट्र के अनुरूप होता है तो उसमें स्थायित्व व दृढ़ता पाई जाती है। आधुनिक समय में राष्ट्र-राज्यों की बहुलता है तथा इन देशों में समरूपीय जनसंख्या पाई जाती है जो एक समान रीतिरिवाज, भाषा व धर्म इत्यादि के आधार पर एक जुट हुए होते हैं। भू-राजनीतिज्ञों के अनुसार राज्य, राष्ट्र की राजनीतिक अभिव्यक्ति होता है जिसके रचना तंत्र में राष्ट्रीय हित, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय रक्षा को अखण्ड बनाये रखने की धारणा होती है। राष्ट्र स्वाभाविक विकास की लम्बी यात्रा का परिणाम है जो रीतिरिवाज, भाषा, धर्म आदि की एकता से स्थापित होता है। 20 वीं शताब्दी में राष्ट्र-राज्य की अवधारणा अपने चरम पर थी जिस कारण यूरोप सहित विश्व के अनेक भागों में समान भाषा, धर्म व संस्कृति इत्यादि के आधार पर अनेक नए देशों का उदय हुआ। ध्यान रखने योग्य है की भारत राष्ट्र-राज्य नही बल्कि राज्य-राष्ट्र है क्योंकि यह विविध समुदायों से मिलकर बना है जिनमें समान इतिहास के कारण एक जुटता की भावना है।

नगर राज्य का अर्थ Nagar rajya meaning in hindi

नगर-राज्य संप्रभुता रखने वाला एक ऐसा राज्य होता है जिसका भौगोलिक क्षेत्र एक नगर या उसके उससे कुछ अधिक होता है। आसान भाषा में एक ऐसा शहर जो स्वतंत्र व संप्रभु है तथा जिसकी अपनी खुद की सरकार, जनसंख्या और क्षेत्र होता है, को नगर राज्य या सिटी स्टेट कहा जाता है। संप्रभुता से यहां तातपर्य उस शक्ति से है जो किसी भी संप्रभु देश की सरकार के पास होती है जो उस देश की सरकार को आंतरिक व बाहरी दबाव के बिना निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है। मैजूदा समय में वेटिकन सिटी, मोनोको तथा सिंगापुर इसके उदाहरण हैं। यद्द्पि नगर-राज्य आकार में शहर के बराबर या उससे थोड़े बड़े होते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये किसी भी राष्ट्र या उससे मिलता जुलता दर्जा रखते हैं। आधुनिक समय में विश्व में राष्ट्र-राज्यों का प्रभुत्व है ज्यादातर देश राष्ट्र-राज्य के रूप में उभरे हैं लेकिन प्राचीन समय में जब बड़ी टेरिटरी पर शासन करना सरल नही था उस समय नगर राज्यों का प्रभुत्व हुआ करता था। आधुनिक तकनीक व राष्ट्रवादी भावना ने बड़े क्षेत्र पर फैले संप्रभु राज्यों के निर्माण को आसान बना दिया है।

मार्क्सवादी दृष्टिकोण का अर्थ Marksvadi drishtikon meaning in hindi

राजनीतिक विज्ञान के अंतर्गत मार्क्सवादी दृष्टिकोण से अभिप्राय यह है कि कार्ल मार्क्स के राज्य व राजनीति को लेकर क्या विचार थे। दरअसल ज्यादातर दृष्टिकोणों में जहां राज्य को शोषण समाप्त करने, लोगों की रक्षा करने, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने, समानता लाने व किसी भी समाज का शासन चलाने के लिए अनिवार्य तत्व बताया गया है, वहीं मार्क्सवादी दृष्टिकोण राज्य को आवश्यकता को सिरे से नकारता है। मार्क्सवादी दृष्टिकोण का मानना है कि राज्य खुद ही व्यक्ति का शोषण करता है तथा यह संघर्षों को जन्म देता है। मार्क्सवादी लोग वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक ढांचे को समाप्त करके उसके स्थान पर वर्ग-विहीन समाज की स्थापना करना चाहते हैं। जिसमें ऊंच-नीच, जात-पात या अमीर गरीब जैसा कोई वर्ग न रहे तथा सभी आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से एक समान रहें। मार्क्सवादी इसके लिए राज्य की आवश्यकता को नही मानते। इस समानता को पाने के लिए कार्ल मार्क्स सर्वहारा क्रांति का सिद्धांत देते हैं जिसके अनुसार अमीरों और गरीबों के बीच एक दिन संघर्ष होगा और गरीब जीत जाएंगे क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है, तथा जीतने के बाद वे एक साम्यवादी व

उदारवादी दृष्टिकोण का अर्थ Udarvadi Drishtikon meaning in hindi

उदारवादी दृष्टिकोण गतिशील है क्योंकि यह समय के साथ बदल गया है। हालांकि उदारवादी दृष्टिकोण मौजूदा समय में सर्वाधिक प्रचलित व मान्य है। 20 वीं सदी का उदारवाद कल्याणकारी राज्य से जुड़ा हुआ है जो सामाजिक स्वतंत्रता के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी पक्ष लेता है। जानने योग्य है कि उदारवादी विचारधारा अधिक्तर समय व्यक्ति की स्वतंत्रता व अधिकारों पर केंद्रित रही है। जॉन लॉक को आधुनिक उदारवाद का जनक माना जाता है, आधुनिक उदारवाद व्यक्ति के अधिकारों तथा उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अधिक बल देता है तथा चाहता है कि राज्य की शक्तियां व्यक्ति के निजी मामलों में हस्तक्षेप ना करें राज्य केवल शांति स्थापित करने तथा बाहरी आक्रमण से सुरक्षा करने तक सीमित रहे। उदारवाद व्यक्ति को स्वतंत्रता तो देना चाहता है लेकिन यह भी मानता है कि व्यक्ति स्वार्थी होता है इसलिए वह कई बार अपने हित को पूरा करना के लिए सामने वाले का अहित भी कर सकता है इसलिए उस पर कुछ कानूनी नियंत्रण आवश्यक है और उसी कानूनी व्यवस्था की प्राप्ति हेतु वह राज्य को अनिवार्य मानता है। उदारवादी दृष्टिकोण राज्य द्वारा किसी भी वर्ग के लिए दिए जाने

कल्याणकारी राज्य का अर्थ Kalyankari Rajya meaning in hindi

चाणक्य, अरस्तु और प्लेटो के काल से ही किसी भी देश के शासन को चलाने के लिए एक ऐसी शासन व्यवस्था की खोज करने की कोशिश की जाती रही है, जो लोगों का ज्यादा से ज्यादा भला कर सके और जिस व्यवस्था को ज्यादा से ज्यादा लोग अच्छा माने। अच्छे शासन की तलाश में बहुत सी विचारधाराएं आई जो शासन शक्ति को अलग-अलग हाथों में सौंपना चाहती थी, कुछ विचारधाराएं ऐसी आई जो शासन को समाज के हाथ में सौंप देना चाहती थी जैसे कि समाजवाद। तो कुछ विचारधाराएं ऐसी आई जिन्होंने राज्य यानी कि सरकार की आवश्यकता को ही नकार दिया, साम्यवाद और अराजकतावाद ऐसी ही विचारधाराएं रही हैं जो व्यक्ति के जीवन में राज्य की कोई आवश्यकता नहीं मानती। इनका मानना है कि यदि राज्य ही नही होगा तो व्यक्ति का शोषण ही नही होगा और वो सदैव सुखी रहेगा। तो वही फासीवाद और नाजीवाद जैसी विचारधाराओं ने यह सिद्ध करने की कोशिश की, कि राज्य अति आवश्यक है और इसका प्रत्येक व्यक्ति पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए, तभी कोई देश सफल हो सकता है तथा नागरिकों के जीवन में सुख और समृद्धि आ सकती है। इन सब विचारों को पार करते हुए आज हम जिस सिद्धांत पर हम पहुंचे हैं तथा जो लोगो

उदारवादी नारीवाद का अर्थ | Udarvadi Narivad meaning in hindi

नारीवादी दृष्टिकोण के मुख्य रूप से दो कोण हैं उदारवादी नारीवाद तथा कट्टरपंथी नारीवाद। उदारवादी नारीवाद को मुख्यधारा का नारीवाद कहा जाता है। उदारवादी नारीवादियों का मानना है कि सामाजिक संस्थाओं में महिलाओं की आवाज तथा उनकी पहचान का सही मायने में प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता। जिसकी वजह से महिलाओं के प्रति भेदभाव पूर्ण नियम व कानून बनते हैं यही कारण है कि महिलाएं विकास से वंचित रहती है। इसलिए उदारवादी नारीवाद मानता है कि महिलाएं अपनी सोच बदल कर और अलग-अलग क्षेत्रों में अग्रिम भूमिका निभाकर समानता पा सकती हैं। इस प्रकार उदारवादी नारीवाद उदार लोकतंत्र के ढांचे के भीतर राजनीतिक और कानूनी सुधार के मध्यम से लैंगिक समानता को प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर चलता है। उदारवादी नारीवाद वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में ही महिलाओं के लिए विकास को पाने का समर्थक है। उदारवादी नारीवाद महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिलाने के लिए उन सभी बाधाओं को समाप्त कर देना चाहता है जो सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के कानूनों, राजनीतिक संगठनों, धार्मिक संगठनों, शिक्षा तथा कार्य क्षेत्र में महिलाओं पर थोपी गई हैं। उदार

वर्ग संघर्ष का अर्थ | Varg Sangharsh Meaning in Hindi

वर्ग संघर्ष जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स का दिया हुआ सिद्धांत है जो कहता है कि समाज हमेशा से अमीर और गरीब नाम के दो वर्गों बंटा रहा है, और इन दोनों वर्गों के हित आपस में टकराने से दोनों के बीच हमेशा संघर्ष बना रहता है, यही वर्ग संघर्ष यानी क्लास स्ट्रगल है। मार्क्स के अनुसार ये दोनों वर्ग मीन्स ऑफ प्रोडक्शन को लेकर आपस में बंटे हुए हैं, मीन्स ऑफ प्रोडक्शन, जमीन, लेबर और पैसे को कहा जाता है। जो वर्ग जमीन, लेबर और पैसे पर नियंत्रण किए हुए है उसे अमीर, सामंत, बुर्जुआ या पूंजीपति वर्ग कहा जाता है, और जिसके पास इनका नियंत्रण नही है, उसे गरीब, किसान, सर्वहारा या श्रमिक वर्ग कहा जाता है, श्रमिक वर्ग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पूंजीपतियों पर डिपेंड करता है, तथा इनके द्वारा चलाए गए कारखानों में काम करता है, बदले में वे उसे पैसा देते हैं। पूंजीपति लोग ज्यादा लाभ कमाने के लालच में श्रमिकों का शोषण करते हैं, और इन्हें कम से कम सेलरी देना चाहते हैं, जबकि श्रमिक अपनी जरूरत पूरी ना होने के चलते ज्यादा सेलरी की माँग करते हैं, इस वजह से संघर्ष पैदा होता है, क्योंकि एक के फायदे में दूसरे का नुकसान