सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Chemical Weapons meaning in Hindi | रासायनिक हथियार का अर्थ

रासायनिक हथियार ऐसे रासायनिक एजेंट्स को कहा जाता है जिनका प्रयोग मानवों को रासायनों के जरिए क्षति पहुंचाने के लिए किया जाता है, ये रासायनिक एजेंट्स शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं, कुछ हथियार ऐसे होते हैं जो मनुष्य के श्वसन तंत्र पर हमला करते हैं, तो वहीं कुछ ऐसे होते हैं जो आंखों पर असर डालते हैं और व्यक्ति को अंधा बना देते हैं और कुछ हथियार ऐसे होते हैं जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करते हैं, तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क को शरीर से जोड़ने का काम करता है इसलिए तंत्रिका तंत्र पर हमला करने वाले रासायनिक हथियार सबसे भयानक होते हैं और इनका सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है, इन रासायनों की जरा सी मात्रा मनुष्य की मृत्यु का कारण बन सकती है 

रासायनिक हथियारों के साथ ही आपको जैविक हथियारों का भी पता होना चाहिए, हम अक्सर इन दोनों के बारे में एक साथ ही सुनते हैं, रासायनिक हथियारों में जहां रासायनों का प्रयोग किया जाता है दुश्मन पर हमला करने के लिए, वहीं जैविक हथियारों में विषाणु, जीवाणु, कीटाणु तथा फफूंद इत्यादि का प्रयोग किया जाता है, जैविक हथियारो के रूप में वायरस या बैक्टीरिया को किसी क्षेत्र विशेष में छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद उस क्षेत्र में रहने वाले लोग संक्रमित हो कर मरने लगते हैं, एक समय पर कोरोनावायरस को भी जैविक हथियार माना जा रहा था, इसके अलावा बहुत से ऐसे संक्रमक रोग होते हैं जिनके विषाणुओं का प्रयोग जैविक हथियार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है

रासायनिक हथियारों को गरीबों का हथियार भी कहा जाता है क्योंकि इनको बनाए जाने में बहुत अधिक खर्च नहीं आता और इनका उत्पादन भी आसान होता है, इसलिए यह गरीबों के हथियार के नाम से भी जाने जाते हैं यही कारण है कि गरीब देश द्वारा बनाए गए रासायनिक हथियार हो या अमीर देश द्वारा बनाए गए रासायनिक हथियार, दोनों का असर लगभग एक जैसा ही होता है यद्यपि इनका उत्पादन सस्ता होता है लेकिन यदि इन्हें युद्ध में सटीकता से प्रयोग किया जाए तो ये दुश्मन देश को भयंकर क्षति पहुंचा सकते हैं, साथ ही उस देश में रहने वाले लोगों को मनोवैज्ञानिक चोट भी पहुंचा सकते हैं इसलिए रासायनिक हथियारों को बहुत ही भयानक समझा जाता है

सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाने वाले रासायनिक एजेंटों में हम जिन एजेंट्स का नाम ले सकते हैं वे हैं - मस्टर्ड गैस, फोस्जिन, क्लोरीन, नर्व एजेंट्स सरीन और VX इत्यादि, फोस्जिन गैस मनुष्य के श्वसन तंत्र पर हमला करती है जिससे कि व्यक्ति सांस लेने में असमर्थ हो जाता है व उसकी मृत्यु हो जाती है, वही मस्टर्ड गैस की बात की जाए तो इसका प्रयोग प्रथम विश्व युद्ध में सर्वाधिक रूप से किया गया था, इसलिए यह अब तक दुनिया में सबसे अधिक प्रयोग किया किया रासायनिक एजेंट है, इसके संपर्क में आने वाले व्यक्तियों में से 5 से 10 फीसदी की मृत्यु होना निश्चित होता, वहीं यदि 'सरीन' की बात की जाए तो यह रंगहीन व गंधहीन रासायनिक एजेंट बहुत ही शक्तिशाली होता है, इसकी जरा सी मात्रा व्यक्ति को मार सकती है, हालांकि यह हवा में ज्यादा देर तक स्थिर नहीं रह सकता इसी कारण बहुत ही जल्द इसका असर हवा से समाप्त हो जाता है, माना जाता है कि 2013 में सीरिया में सरकार द्वारा अपने ही नागरिकों पर जिस रासायन का प्रयोग किया गया था उसमें सरीन एजेंट्स थे, वहीं यदि VX की बात की जाए तो यह रासायन एजेंट हवा में स्थिर होता है, इसका जोखिम देर तक रहता है, यह एक नर्व एजेंट है यानी कि यह व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, यह त्वचा के जरिए खून में प्रवेश है और खून के जरिए तंत्रिका तंत्र तक पहुँच जाता है व व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है

जैसा कि हमने देखा कि रासायनिक हथियार बहुत ही ज्यादा खतरनाक होते हैं, इसलिए इनकी रोकथाम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत से कदम उठाए गए हैं और इनमें सबसे महत्वपूर्ण कदम है 'केमिकल वेपंस कन्वेंशन' जो कि एक बहुपक्षीय संधि है इस संधि का ड्राफ्ट 1992 में तैयार हुआ था और यह 1997 में प्रभावी हुई थी इसमें 195 सदस्य हैं तथा 165 हस्ताक्षरकर्ता हैं, भारत ने इस संधि पर वर्ष 1993 में हस्ताक्षर किए थे, इस प्रकार भारत की संधि का हिस्सा है, इस संधि के उद्देश्य है - रासायनिक हथियारों के विकास को रोकना, इनके उत्पादन को समाप्त करना, इनके स्थानांतरण, भंडारण व प्रयोग पर पूर्णता रोक लगाना, इस प्रकार रासायनिक हथियारों को दुनिया से समाप्त करने की कोशिश के रूप में यह संधि इन सभी देशों के बीच हुई है

रासायनिक हथियारों का प्रयोग आंसू गैस और वोमिटिंग एजेंट के रूप में दंगे रोकने के लिए भी किया जाता है, यदि कहीं पर दंगा हो जाता है या भीड़ अनियंत्रित रूप से इक्कठी हो जाती है तो प्रशासन जिन आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करता है, वे वास्तव में कम प्रभावी रासायनिक हथियार ही होते हैं जो आंखों में जलन पैदा करते हैं, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने में सहायता मिलती है, इसी प्रकार वोमिटिंग एजेंट्स के प्रयोग से भीड़ को उल्टियां होनी शुरू हो जाती है, जिससे कि वह बड़ी आसानी से बिखर जाती है, इस प्रकार पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए इन निम्न कोटि के रासायनिक हथियारों का प्रयोग करते हैं, आंसू गैस के एजेंटों में कलोरैसेटोफेनोन, केलोरोपिक्रीन, डिबेंज, ऑक्साजेपाइन आदि शामिल हैं

रासायनिक हथियार समय के साथ-साथ विकसित हो रहे हैं, पुराने हथियार जिन्हें पारंपरिक रासायनिक हथियार भी कहा जाता है, में रासायन सामग्री को पहले से ही मिश्रित करके रखा जाता था, लेकिन अब जो नए हथियार आ रहे हैं उनमें रसायन का मिश्रण या तो हवा में होता है या फिर किसी क्षेत्र विशेष पर दागे जाने के बाद हवा में फैलने पर ये मिश्रित होते हैं, इसका फायदा ये होता है कि जो देश इन हथियारों का प्रयोग कर रहा होता है उसे इनके भंडारण या रखरखाव में कोई परेशानी नहीं आती और ना ही इनकी लीकेज का खतरा रहता है

रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल 600 ईसा पूर्व से भी पहले से होता आ रहा है, पुराने समय में सैनिक दुश्मनों के कुओं में मरे हुए जानवर या विषैले पौधे डाल दिया करते थे, जिसके बाद उस दूषित पानी को पीने से उस क्षेत्र के लोगों में बीमारी फैल जाया करती थी, तथा लोग मरने लगते थे, वहीं यदि आधुनिक समय की बात की जाए तो 1845 में अल्जीरिया पर फ्रांसीसी विजय के दौरान फ्रांस के सैनिकों ने बर्बर जाति के 1000 से अधिक सदस्यों को एक गुफा के अंदर कैद कर धुएं से उनका दम घोंट कर मार दिया था, इसके अलावा प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान फ्रांसीसियों ने रासायनिक हथियार के रूप में आंसू गैस के गोले तैनात किए थे, जिनका निर्माण उन्होंने 1912 में पुलिस प्रशासन की सहायता के लिए किया था, प्रथम विश्व युद्ध में ही जर्मनी ने भी ब्रिटेन के खिलाफ रसायनिक हथियारों का प्रयोग किया था, व डायनिसिडाइन क्लोरोसल्फेट से युक्त 3000 गोले ब्रिटिशों पर दागे थे, इसके अलावा हाल ही की बात की जाए तो वर्ष 2013 में सीरिया की सरकार ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ सरीन से युक्त रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया था, सरीन एक नर्व एजेंट है जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिसकी बहुत ही कम मात्रा इंसान को मारने के लिए पर्याप्त है, बाद में अमेरिका द्वारा सीरिया की सरकार को हवाई हमले की धमकी दी गई ततपश्चात बशर अल असद की सीरियाई सरकार ने अपने रासायनिक हथियारों के शस्त्रागार को त्यागा था

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आमी तोमाके भालोबाशी का अर्थ - Ami Tomake Bhalobashi Meaning in Hindi

* आमी तोमाके भालोबाशी बंगाली भाषा का शब्द है। * इसका हिंदी में अर्थ होता है "मैं तुमसे प्यार करता/ करती हूँ। * इस शब्द का प्रयोग हिंदी फिल्मों और गानों में बंगाली टच देने के लिए किया जाता है। * आमी तोमाके भालोबाशी में "तोमाके" का अर्थ होता है "तुमको" इसे "तोमे" के साथ भी बोला जा सकता है अर्थात "आमी तोमे भालोबाशी" का अर्थ भी "मैं तुमसे प्यार करता हूँ" ही होता है। * अपने से उम्र में बड़े व्यक्ति जैसे माता-पिता को बंगाली में यह शब्द कहते हुए "तोमाके" शब्द को "अपनके" बोला जाता है जैसे : आमी अपनके भालोबासी" * अंग्रेजी में इसका अर्थ आई लव यू होता है। * अगर बोलना हो कि "मैं तुमसे (बहुत) प्यार करता हूँ" तो कहा जाएगा "आमी तोमाके खूब भालोबाशी" * वहीं अगर बोलना हो " तुम जानती हो मैं तुमसे प्यार करता हूँ" तो कहा जाएगा "तुमी जानो; आमी तोमाके भालोबाशी"

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान दोहे का अर्थ Karat Karat Abhyas Ke Jadmati Hot Sujan Doha Meaning in Hindi

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान मध्यकालीन युग में कवि वृंद द्वारा रचित एक दोहा है यह पूर्ण दोहा इस प्रकार है "करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान; रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान" इस दोहे का अर्थ है कि निरंतर अभ्यास करने से कोई भी अकुशल व्यक्ति कुशल बन सकता है यानी कि कोई भी व्यक्ति अपने अंदर किसी भी प्रकार की कुशलता का निर्माण कर सकता है यदि वह लगातार परिश्रम करे। इसके लिए कवि ने कुए की उस रस्सी का उदाहरण दिया है जिस पर बाल्टी को बांध कर कुए से पानी निकाला जाता है। बार-बार पानी भरने के कारण वह रस्सी कुए के किनारे पर बने पत्थर पर घिसती है तथा बार-बार घिसने के कारण वह कोमल रस्सी उस पत्थर पर निशान डाल देती है क्योंकि पानी भरने की प्रक्रिया बार बार दोहराई जाती है इसलिए वह रस्सी पत्थर निशान डालने में सफल हो जाती है। यही इस दोहे का मूल है इसमें यही कहा गया है कि बार-बार किसी कार्य को करने से या कोई अभ्यास लगातार करने से अयोग्य से अयोग्य व मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी कुशल हो जाता है। इसलिए व्यक्ति को कभी भी अभ्यास करना नहीं छोड़ना चाहिए। इस दोहे के लिए अंग्रेजी में एक वाक्य प्रय

जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिश का अर्थ | Zihale-E-Miskin Mukun Ba Ranjish Meaning in Hindi

"जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन बरंजिश" पंक्ति हिंदी फिल्म गुलामी में गए गए गीत के चलते प्रचलित हुई है। यह गीत प्रसिद्ध कवि अमीर ख़ुसरो द्वारा रचित फ़ारसी व बृजभाषा के मिलन से बनी कविता से प्रेरित है। यह कविता मूल रूप में इस प्रकार है। ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां... कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऐ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां... इस मूल कविता का अर्थ है : आँखे फेरके और बातें बनाके मेरी बेबसी को नजरअंदाज (तगाफ़ुल) मत कर... हिज्र (जुदाई) की ताब (तपन) से जान नदारम (निकल रही) है तुम मुझे अपने सीने से क्यों नही लगाते... इस कविता को गाने की शक्ल में कुछ यूँ लिखा गया है : जिहाल-ए -मिस्कीं मकुन बरंजिश , बेहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है... सुनाई देती है जिसकी धड़कन , तुम्हारा दिल या हमारा दिल है... इस गाने की पहली दो पंक्तियों का अर्थ है : मेरे दिल का थोड़ा ध्यान करो इससे रंजिश (नाराजगी) न रखो इस बेचारे ने अभी बिछड़ने का दुख सहा है...