सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Kantara meaning in Hindi, कांतारा का मतलब, Story, OTT Release Date, Hero & Heroine Name

उच्चारण - कांतारा

दोस्तों हिंदी टू मीनिंग कि इस एक्सप्लेनेशन सीरीज में आपका स्वागत है इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं कांतारा शब्द और इससे जुड़े तथ्यों के बारे में जो मौजूदा समय में चर्चा में बना हुआ है। दरअसल हाल ही में एक फ़िल्म रिलीज हुई है जो कि दक्षिण भारत में निर्मित कन्नड़ भाषा की एक्शन और रहस्यों से भरी फिल्म है। इसका नाम कांतारा रखा गया है।

इसे ऋषभ शेट्टी ने लिखा और निर्देशित किया है। इस मूवी ने KGF का रिकॉर्ड तोड़ दिया है तथा बॉक्स आफिस पर 100 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर लिया है। अब क्योंकि यह फ़िल्म कन्नड़ भाषा में बनी है इसलिए इसके कन्नड़ नाम से हिंदी भाषी परिचित नही हैं। आइए जानते हैं इसके नाम का हिंदी अर्थ और साथ में इससे जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारियां।

कांतारा का मतलब क्या है 



सबसे पहले बात करते हैं Kantara meaning in Hindi की। इस शब्द का मतलब है Mystical Forest यानी रहस्यमयी जंगल। अब क्योंकि इस फिल्म की कहानी एक ऐसे जंगल के आसपास घूमती जो अनेक रहस्यों और मिथकों से घिरा हुआ है इसीलिए इस जंगल को रहस्यमई जंगल बताया गया है। इसी की तर्ज पर इस मूवी का नाम कांतारा रखा गया है।

इस फिल्म के बारे में यदि ओर बात की जाए तो इसमें मुख्य रोल ऋषभ शेट्टी ने निभाया है जो कि कंबाला चैंपियन की भूमिका निभा रहे हैं। जबकि अभिनेत्री का रोल सप्तमी गोवड़ा और मानसी सुधीर ने निभाया है। यह फिल्म मुख्य रूप से दक्षिण भारत की क्षेत्रीय संस्कृति और वहां के जंगलों से जुड़े मिथकों पर बनी हुई है और क्योंकि इसमें बहुत ही अलग तरीके से चीजों को दिखाया गया है इसलिए यह फिल्म बहुत ज्यादा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित भी कर रही है। इसी कारण इसने 100 करोड़ से ज्यादा का धुआंधार कलेक्शन करते हुए के KGF को भी पीछे छोड़ दिया है।

कांतारा का बजट

कांतारा फिल्म का कुल बजट 16 करोड़ रुपए था। जबकि इसने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड से ज्यादा की कमाई अब तक कर ली है और आगे चलकर इसके और ज्यादा कमाई करने की उम्मीद है। इस फिल्म की मूल भाषा कन्नड़ है तथा यह पूरे भारत में अलग-अलग भाषाओं में वितरित की गई है।

जैसे कि एए-फिल्म्स ने इसे हिंदी भाषा में वितरित किया है, गीता आर्ट्स ने तेलुगु भाषा में, पृथ्वीराज प्रोडक्शन से मलयालम भाषा में, और ड्रीम वारियर पिक्चर्स ने इसे तमिल भाषा में वितरित किया है। यह फिल्म 30 सितंबर 2022 को रिलीज हुई थी, 150 मिनट लंबी इस मूवी की कहानी जंगलों के आसपास घूमती है और उससे जुड़े हुए मिथकों पर रोशनी डालते हुए चलती है। इसे OTT Plateform पर 4 नवंबर 2022 को रिलीज किया जाएगा जबकि हिंदी डबिंग में यह 14 अक्टूबर 2022 को रिलीज की जा चुकी है।

दक्षिण भारत का सिनेमा और बॉलीवुड

कांतारा फिल्म क्योंकि दक्षिण भारत के सिनेमा से जुड़ी हुई है इसलिए दक्षिण में इसे पहले रिलीज किया गया था और अब इसे उत्तर भारत की ओर भी रिलीज कर दिया गया है अब जैसा कि हम जानते हैं कि हिंदी भाषा में बहुत ज्यादा दर्शक है जो साउथ की फिल्मों से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाए हुए हैं जिसके चलते कांतारा फिल्म भी बहुत ज्यादा उम्मीदों से घिर गई है।

इसको लेकर काफी ज्यादा हाइप बन गया है। यह फिल्म एक्शन, रोमांस, विश्वास और पौराणिक कथाओं को एक साथ दिखाती है और यह हाल ही के समय में भारतीय फिल्म निर्माताओं द्वारा की गई बेहतरीन कोशिशों में से एक है यह माना जाता है कि बॉलीवुड की भारतीय सिनेमा बाजार पर जो पकड़ थी वह छूट रही है और जो एक खाली स्थान बन रहा है उसे दक्षिण सिनेमा धीरे-धीरे भर रहा है।

क्या है कांतारा फिल्म की कहानी का आधार

विविधताओं से भरे हुए हमारे देश में क्षेत्रीय सिनेमा बहुत ही अच्छी कहानियां पेश कर रहा है, जो दर्शकों के मन पर अच्छी पकड़ भी बना रही हैं। बात की जाए कांतारा फिल्म की तो यह दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव की कहानी है। फिल्म में कर्नाटक के तटीय इलाकों से जुड़ी संस्कृति और वहां की पौराणिक कथाओं को दिखाया गया है। कहानी शुरू होती है दक्षिण कर्नाटक के एक गांव से जहां एक राजा ने 150 एक साल पहले गांव वालों को जंगल की जमीन दान में दे दी थी इसके बाद यह कहानी 1990 के समय में आ जाती है और पूरी कहानी इसी समय में चलती है।

कहानी आगे बढ़ती है जब एक इमानदार वन अधिकारी जंगल में पेड़ों की कटाई रोकने की कोशिश करता है जो कि अब एक आरक्षित जंगल है। इसके बाद मामला तब बढ़ता है जब ग्रामीण उसकी बात नही मानते, क्योंकि उनकी मान्यता है कि उनके देवी-देवताओं ने यह जंगल उन्हें वरदान के रूप में दिया है और इस जंगल की रक्षा देवता करते हैं इसलिए वे किसी बाहरी व्यक्ति की बात नही सुनेंगे। गांव के साथ गांव का ताकतवर व्यक्ति शिव भी खड़ा होता है जो मूवी का मुख्य किरदार है और इन सब को राजा के वंशज यानी कि गांव के "साहब" से भी समर्थन प्राप्त है। इस प्रकार यह पूरी मूवी चलती है और रोमांच व रहस्य बनाती चली जाती है।

निष्कर्ष

हालांकि बॉलीवुड ने दशकों तक भारतीय सिनेमा बाजार पर राज किया है। लेकिन हाल ही के वर्षों में उसने ऐसी बहुत सी फिल्में दी है जिन की कहानी बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है। कुछ परिवार के लोगों की जकड़ में आ चुका बॉलीवुड अक्सर या तो हॉलीवुड का या फिर दक्षिण भारत की फिल्मों का रीमेक दिखाता है। शुरुआती तौर पर यह फॉर्मूला काम कर गया लेकिन अब दर्शक रीमेक नहीं देखना चाहते वे उस फिल्म को देखना चाहते हैं जो वास्तव में उस कहानी के साथ बनाई गई है। ताकि कुछ फेरबदल उन्हें ना देखना पड़े। यही कारण है कि उत्तर भारत के दर्शक धीरे-धीरे दक्षिण भारतीय फिल्मों की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि उन मूवीज को हिंदी भाषा में भी रिलीज किया जाता है।

इसके अलावा क्योंकि वे फिल्में ओरिजिनल हैं रिमेक नही तो इसलिए जो कहानी दिखाई जानी है वो वास्तविक परिदृश्य में ही सामने आती है बिना किसी अतिरिक्त चमक-धमक के। जबकि बॉलीवुड रिमेक में हम देखते हैं कि किसी एक हीरो को दिखाया जाता है तथा कहानी को उसके अनुसार ही ढाल दिया जाता है। जिसे कहानी अपनी वास्तविकता खो देती है। इसलिए कांतारा जैसी फिल्मों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए ताकि क्षेत्रीय सिनेमा ओर ज्यादा उभरकर सामने आए और नई नई कहानियां हमें देखने को मिलें। बॉलीवुड केवल उत्तरी भारत की संस्कृति को ही दिखाता है और उसे भी वह अच्छे से नहीं दिखा पाता। क्योंकि आम व्यक्ति के जीवन में इतनी चमक-धमक या चमत्कार नही हैं जो बॉलीवुड दिखाता है इसलिए आम आदमी को ये फिल्में अपील नहीं करती। तो ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रीय सिनेमा अपने यहां के कहानियां लेकर आते हैं जिससे कि दर्शक सिनेमा से और ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। इन क्षेत्रीय सिनेमा को ओर अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है ताकि हमें कांतारा जैसी बेहतरीन फिल्में देखने को मिलती रहें। उम्मीद है आपको Kantara meaning in Hindi और इस मूवी की जानकारी से जुड़ी यह जानकारी पसंद आई होगी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आमी तोमाके भालोबाशी का अर्थ - Ami Tomake Bhalobashi Meaning in Hindi

* आमी तोमाके भालोबाशी बंगाली भाषा का शब्द है। * इसका हिंदी में अर्थ होता है "मैं तुमसे प्यार करता/ करती हूँ। * इस शब्द का प्रयोग हिंदी फिल्मों और गानों में बंगाली टच देने के लिए किया जाता है। * आमी तोमाके भालोबाशी में "तोमाके" का अर्थ होता है "तुमको" इसे "तोमे" के साथ भी बोला जा सकता है अर्थात "आमी तोमे भालोबाशी" का अर्थ भी "मैं तुमसे प्यार करता हूँ" ही होता है। * अपने से उम्र में बड़े व्यक्ति जैसे माता-पिता को बंगाली में यह शब्द कहते हुए "तोमाके" शब्द को "अपनके" बोला जाता है जैसे : आमी अपनके भालोबासी" * अंग्रेजी में इसका अर्थ आई लव यू होता है। * अगर बोलना हो कि "मैं तुमसे (बहुत) प्यार करता हूँ" तो कहा जाएगा "आमी तोमाके खूब भालोबाशी" * वहीं अगर बोलना हो " तुम जानती हो मैं तुमसे प्यार करता हूँ" तो कहा जाएगा "तुमी जानो; आमी तोमाके भालोबाशी"

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान दोहे का अर्थ Karat Karat Abhyas Ke Jadmati Hot Sujan Doha Meaning in Hindi

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान मध्यकालीन युग में कवि वृंद द्वारा रचित एक दोहा है यह पूर्ण दोहा इस प्रकार है "करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान; रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान" इस दोहे का अर्थ है कि निरंतर अभ्यास करने से कोई भी अकुशल व्यक्ति कुशल बन सकता है यानी कि कोई भी व्यक्ति अपने अंदर किसी भी प्रकार की कुशलता का निर्माण कर सकता है यदि वह लगातार परिश्रम करे। इसके लिए कवि ने कुए की उस रस्सी का उदाहरण दिया है जिस पर बाल्टी को बांध कर कुए से पानी निकाला जाता है। बार-बार पानी भरने के कारण वह रस्सी कुए के किनारे पर बने पत्थर पर घिसती है तथा बार-बार घिसने के कारण वह कोमल रस्सी उस पत्थर पर निशान डाल देती है क्योंकि पानी भरने की प्रक्रिया बार बार दोहराई जाती है इसलिए वह रस्सी पत्थर निशान डालने में सफल हो जाती है। यही इस दोहे का मूल है इसमें यही कहा गया है कि बार-बार किसी कार्य को करने से या कोई अभ्यास लगातार करने से अयोग्य से अयोग्य व मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी कुशल हो जाता है। इसलिए व्यक्ति को कभी भी अभ्यास करना नहीं छोड़ना चाहिए। इस दोहे के लिए अंग्रेजी में एक वाक्य प्रय

जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिश का अर्थ | Zihale-E-Miskin Mukun Ba Ranjish Meaning in Hindi

"जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन बरंजिश" पंक्ति हिंदी फिल्म गुलामी में गए गए गीत के चलते प्रचलित हुई है। यह गीत प्रसिद्ध कवि अमीर ख़ुसरो द्वारा रचित फ़ारसी व बृजभाषा के मिलन से बनी कविता से प्रेरित है। यह कविता मूल रूप में इस प्रकार है। ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां... कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऐ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां... इस मूल कविता का अर्थ है : आँखे फेरके और बातें बनाके मेरी बेबसी को नजरअंदाज (तगाफ़ुल) मत कर... हिज्र (जुदाई) की ताब (तपन) से जान नदारम (निकल रही) है तुम मुझे अपने सीने से क्यों नही लगाते... इस कविता को गाने की शक्ल में कुछ यूँ लिखा गया है : जिहाल-ए -मिस्कीं मकुन बरंजिश , बेहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है... सुनाई देती है जिसकी धड़कन , तुम्हारा दिल या हमारा दिल है... इस गाने की पहली दो पंक्तियों का अर्थ है : मेरे दिल का थोड़ा ध्यान करो इससे रंजिश (नाराजगी) न रखो इस बेचारे ने अभी बिछड़ने का दुख सहा है...