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Untouchability Meaning in Hindi | अस्पृश्यता का अर्थ, मतलब, परिभाषा, जुड़े कानून, कारण और निवारण

उच्चारण - अनटचेबिलिटी

दोस्तों, अंग्रेजी भाषा के अनेक शब्द हिंदी भाषा में प्रयोग किए जाते हैं और इनमें से कुछ शब्द बहुत ज्यादा प्रचलित होते हैं, ऐसा ही एक शब्द है Untouchability (अनटचेबिलिटी) इस आर्टिकल में हम इस शब्द का अर्थ जानेंगे और इसे विस्तार से समझेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं और सबसे पहले जानते हैं Untouchability का अर्थ क्या होता है।

Untouchability एक अंग्रेजी भाषा का शब्द है तथा इसका प्रयोग भारत के संविधान सहित अनेक स्थानों पर किया गया है। सामान्य हिंदी में इसके अर्थ निम्नलिखित हैं।

Untouchability Meaning in Hindi

  • छुआ छूत
  • अस्पृश्यता
  • अस्पृश्य बनाने का व्यवहार
  • अछूत होने की अवस्था
  • एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को ना छूने की प्रथा
  • अछूतपन

न छूने योग्य का भावतो ये है इसका शाब्दिक अर्थ, लेकिन इसे विस्तार से समझने के लिए हमें इस आर्टिकल को विस्तार से पढ़ना होगा क्योंकि छुआछूत या अस्पृश्यता एक पारिभाषिक शब्द है, अतः इसकी परिभाषा व विस्तापूर्वक वर्णन संभव है। लेकिन उससे पहले जानते हैं इसके Synonyms और Antonyms जानते हैं।


Untouchability Synonyms यानी समानार्थी शब्द

inaccessible, inapproachable, inconvenient, unapproachable,
unattainable, unavailable, unobtainable, unreachable.

Untouchability Antonyms यानी विपरीतार्थक शब्द

accessible, acquirable, approachable, attainable,
convenient, getatable, handy, obtainable

Untouchability Use in Sentence वाक्य में प्रयोग

1. India's constitution abolishes Untouchability.
भारत का संविधान अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है

2. Even after so many reforms, the idea of untouchability is still very much a part of Indian life.
बहुत से सुधारों के बावजूद भारतीय जीवन में अस्पृश्यता बहुत हद तक विद्यमान है

Untouchability यानी अस्पृश्यता क्या है?

Untouchability Meaning in Hindi जानने के बाद अब हम बात करते हैं कि अस्पृश्यता है क्या। दरअसल प्राचीन भारत में अनेक कुरीतियां फैली हुई थी तथा भारत का समाज अनेक अंधविश्वासों में जकड़ा हुआ था। भारत के सापेक्ष में यह कुरीति सर्वाधिक हिंदू धर्म में देखने को मिली। जहां उच्च जातियों के लोग निम्न जातियों के लोगों से अच्छा व्यवहार नही करते थे। यह व्यवहार अमानवीय था क्योंकि उच्च जातियों के लोग निम्न जातियों के लोगों को छूने तक से खुद को बचाते थे तथा उन्हें अछूत मानते थे। और यह भी मानते थे कि अछूतों की परछाई तक भी पढ़ने से उच्च जाति के लोग अशुद्ध हो जाते हैं और उन्हें पुनः शुद्ध होने के लिए पवित्र गंगाजल से स्नान करना पड़ता है। धारे-धीरे प्राचीन भारत में अस्पृश्यता जाति आधारित हो गई थी यानी कि एक व्यक्ति यदि किसी अछूत समझे जाने वाली जाति में पैदा हो जाता था, तो उसे भी अछूत माना जाता था। यही सामाजिक कुरीति अस्पृश्यता के नाम से जानी जाती है।

अस्पृश्यता और अनुच्छेद 17

भारत के संविधान में अस्पृश्यता को निषेध किया गया है तथा भारत के अनुच्छेद 17 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अस्पृश्यता दंडनीय अपराध माना जाएगा। संविधान में जिस अस्पृश्यता की बात की गई है वह जाति से संबंधित है। भारत में प्राचीन समय से ही जाति आधारित अस्पृश्यता देखने को मिलती रही है जैसा कि पहले बताया गया है कि इसके अंतर्गत तथाकथित उच्च जातियां, तथाकथित निम्न जातियों से अमानवीय व्यवहार करती हैं तथा उन जातियों के लोगों को छूने से खुद को बचाती है। उच्च जातियों के लोगों का मानना है यदि वे निम्न जाति के लोगों को छू लेते हैं तो अशुद्ध हो जाते हैं तथा उन्हें पुनः शुद्धि प्राप्त करने के लिए गंगा जल में स्नान करना पड़ता है तब जाकर वे पुनः शुद्ध होते हैं। इस प्रकार यहां पर सामाजिक स्तर पर फैली छुआछूत देखने को मिलती है। छुआछूत यानी अस्पृश्यता एक सामाजिक कुरीति है जहां पर एक मनुष्य दूसरे मनुष्य को छूने तक से खुद को बचाने लगता है। यह सामाजिक कुरीति अनेक देशों में अलग-अलग रूप में देखने को मिलती है। जैसे अमेरिका में गोरे लोग काले लोगों को अस्पृश्य मानते हैं तथा उन्हें छूने से बचते हैं। ठीक ऐसे ही भारत में भी है लेकिन आजादी के बाद से भारत में संविधान लागू हुआ और संविधान में मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद 17 में अस्पृश्यता को पूरी तरह से निषेध कर दिया गया और इसे दंडनीय अपराध बना दिया गया।

अस्पृश्यता को निषेध बनाने से जुड़े कानून

Untouchability Meaning in Hindi को स्पष्ट रूप से समझने के बाद अब बात करते हैं अस्पृश्यता से जुड़े कानूनों की। जैसा कि संविधान ने घोषित कर दिया है कि अस्पृश्यता एक दंडनीय अपराध है तो इसके लिए क्या दंड दिया जाए और किस प्रकार से पूरी प्रक्रिया की जाए इसको लेकर देश में अलग-अलग कानून बनाए गए हैं और इन्हीं में से एक कानून है "सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955"। इस कानून के अंतर्गत अस्पृश्यता के उन्मूलन के प्रयास किए गए और 1976 में इस कानून को संशोधित करके और अधिक कठोर बना दिया गया। इसके अंतर्गत छुआछूत के कारण यदि कोई व्यक्ति अपना समग्र विकास करने में अक्षम हो जाता है तो ऐसे में छुआछूत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अदालती कार्यवाही की जा सकती है। ठीक ऐसे ही एक अन्य कानून है "अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न निवारण अधिनियम 1989" इस कानून के तहत पहली बार उत्पीड़न शब्द की व्याख्या की गई तथा इसी के अंतर्गत 2015 में उत्पीड़न के परिभाषा में कुछ अन्य कृत्य जोड़े गए जैसे अस्पृश्य समझे जाने वाली जातियों के लोगों का सिर या मूंछ मूँड़ना, चप्पलों की माला पहनाना, जनजातीय महिलाओं को देवदासी बनाना इत्यादि। यह सभी कृत्य उत्पीड़न के अंतर्गत लाए गए और ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अस्पृश्यता करता है या फिर उपरोक्त किसी भी प्रकार का उत्पीड़न करता है तो उसे दंड दिया जाता है इस दंड के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अस्पृश्यता को व्यवहार में लाता हुआ पाया जाता है तो उसे कम से कम एक महीना और अधिक से अधिक 6 महीने की कैद तथा उस पर ₹100 से लेकर ₹500 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है यानी स्पष्ट है कि अस्पृश्यता को व्यवहार में लाने वाले व्यक्ति को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

अस्पृश्यता के कारण

1. किसी भी देश में अस्पृश्यता के फैलने के अनेक कारण होते हैं। हम भारत के नजरिए से बात करें तो छुआछूत का सबसे प्रथम कारण जो यहां पर मिलता है वह है प्रजातीय भावना का विकास। कुछ प्रजातियां समय के साथ दूसरी प्रजातियों से खुद को श्रेष्ठ मानने लगती है। चाहे वह किसी युद्ध में जीत प्राप्त की हुई जातियां हो या फिर आर्थिक रूप से मजबूत हो या फिर सामाजिक रूप से उनके पूर्वजों द्वारा प्राप्त की गई प्रतिष्ठा उनके साथ हो, ऐसे अनेक कारणों की वजह से कुछ प्रजातियां खुद को दूसरों से अव्वल दर्जे का मानने लगती हैं और दूसरी प्रजातियों को विवश करती हैं कि वह भी उन्हें अपने से उच्च दर्जे का माने और इसे व्यवहार में लाने के लिए ये तथाकथित अव्वल प्रजातियां अपनी सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक शक्ति का प्रयोग करती हैं। इस प्रकार यह अस्पृश्यता का सबसे पहला कारण है। हालांकि हम भारत के संबंध में बात कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि छुआछूत केवल भारत में ही विद्यमान है। अन्य देशों सहित अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी यह विद्यमान है। अमेरिका में भी गोरे लोग काले लोगों से छुआछूत करते हैं। क्योंकि वहां पर गोरे लोग बहुत ही लंबे समय तक आर्थिक रूप से शक्तिशाली रहे हैं और उन्होंने काले लोगों का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक शोषण किया है। इसी कारण अमेरिकी गोरे लोग खुद को काले लोगों से श्रेष्ठ मानते रहे हैं इस कारण वहां पर भी अस्पृश्यता विद्यमान हैं जिसका कारण है प्रजातीय भावना का विकास। यह अस्पृश्यता का पहला कारण है।

2. इसके बाद आता है दूसरा कारण। जो है धार्मिक भावना। धर्म में पवित्रता और शुद्धि का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होता है। इस कारण जो व्यक्ति ऐसे कार्य करता है जिनमें शुद्धता ज्यादा होती है तो उन्हें धार्मिक दृष्टि से शुद्ध माना जाने लगता है जबकि ऐसे कार्य जिनमें शुद्धता इतनी नहीं होती तो ऐसे व्यक्ति जो उस कार्य को करते हैं उन्हें अशुद्ध और धीरे-धीरे अछूत माना जाने लगता है। जैसे कि भारतीय समाज में ऐसे लोग जो पाठ पूजा करते थे उन्हें शुद्ध व पवित्र माना जाता था जबकि ऐसे लोग जो मैला ढोना या साफ-सफाई का काम करते थे उन्हें अशुद्ध समझा जाता था। इस कारण धर्म ने भी यहां पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तथा शुद्धता के आधार पर कुछ कामों को उच्च तो कुछ को निम्न व अपवित्र बना दिया। ऐसे में तथाकथित शुद्ध काम करने वाले लोग तथाकथित निम्न काम करने वाले लोग को छूने से बचने लगे और छुआछूत का विकास हुआ। इस प्रकार धार्मिक अंधभक्ति की भावना ने भी अस्पृश्यता में एक बड़ा योगदान दिया है।

3. उपरोक्त दो कारणों के बाद तीसरा सबसे बड़ा कारण है आर्थिक स्थिति। जैसा कि हम देखते हैं कि व्यक्ति जो आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं उनके साथ ज्यादा उच्च दर्जे का व्यवहार देखने को मिलता है। ऐसे में समाज में आर्थिक रूप से संपन्न लोग समय बीतने के साथ आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को निम्न दर्जे का समझने लगते हैं तथा उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने लगते हैं। और वहां पर छुआछूत जैसी कुरीतियां पनपने लगती है। इसलिए सरकार का यह उद्देश्य होना चाहिए कि अमीर और गरीब के बीच की जो खाई है और ज्यादा बड़ी ना होने पाए। ताकि आर्थिक आधार पर इस प्रकार की सामाजिक कुरीतियों से बचा सके।

अस्पृश्यता के निवारण के उपाय

1. अस्पृश्यता के निवारण के अनेक उपाय हैं, उनमें से सबसे पहला है शिक्षा। शिक्षा का उद्देश्य होता है समाज में प्रचलित रूढ़ियों, धर्मांधता, तथा संकीर्णता की भावना को दूर करना। क्योंकि यह सब समाप्त होने से छुआछूत खुद ही दूर हो जाती है। यानी कि छुआछूत जो कि एक सामाजिक कुरीति है, इसे शिक्षा के जरिए समाप्त किया जा सकता है। शिक्षा व्यक्तियों और समाज का नजरिया बदलती है और जब व्यक्ति का दृष्टिकोण ही बदल जाता है यानीसमाज का नजरिया ही परिवर्तित हो जाता है तो जो भी सामाजिक रूढ़ियां और सामाजिक कुरीतियां बहुत समय से चली आ रही होती हैं वे भी धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। शिक्षा के जरिए व्यक्तियों और समाज को समझ आने लगता है कि अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियों के विद्यमान रहने का कोई अर्थ नहीं है। ये बिना वजह लोगों को नीचा दिखाने और उनका विकास रोकने के उपाय हैं जो पुराने समय में कुछ बुरे लोगों द्वारा स्थापित किए गए थे। शिक्षा का प्रसार करने से विश्वबंधुत्व भावना का विकास होता है और उच्च और निम्न वर्गों के मध्य जो अंतर है वह समाप्त होना शुरु हो जाता है और यह अंतर समाप्त होने के पश्चात अस्पृश्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है।

2. अस्पृश्यता को समाप्त करने का दूसरा उपाय है जाति उपजाति प्रथा को समाप्त कर देना यदि यह प्रथा ही पूरी तरह से समाप्त हो जाती है तो और सभ्यता भी खुद ब खुद समाप्त हो जाएगी क्योंकि यदि भारत की बात की जाए तो भारत में ज्यादातर जो अस्पृश्यता है वह जाति आधारित है तो यदि जाति को ही समाप्त कर दिया जाता है तो इस सामाजिक कुरीतियों को भी समाप्त करना आसान हो जाएगा।

3. अस्पृश्यता को समाप्त करने का तीसरा उपाय है सरकारी क्षेत्रों, यानी कि राजकीय पदों पर अनुसूचित जाति के पढ़े-लिखे युवक/ युवतियों की नियुक्ति करना। इससे उनके बीच आत्मगौरव और नवीन चेतना का संचार होता है। जिससे कि वे अपने समग्र समाज में भी उस चेतना का प्रचार-प्रसार करते हैं इससे ऐसी जातियां जो कई सदियों से निम्न दर्जे की समझी जाती रही हैं और जिन्होंने इस व्यवस्था में खुद को भी निम्न दर्जे का मान लिया है, उनके बीच आत्मगौरव की भावना पनपती है और वे खुद भी इस तरह की सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का प्रयास करते हैं तो इस प्रकार यह भी छुआछूत को समाप्त करने का एक उपाय है

4. इसके अलावा निम्न जाति के लोगों को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाकर भी अस्पृश्यता के इस वृक्ष को गिराया जा सकता है। इसके लिए उन्ह आर्थिक सहायता दी जा सकती है, उन्हें कृषि से जुड़े यंत्र या गृह उद्योग के लिए जमीन इत्यादि देने पर भी वे आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और जब वे आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक रूप से मजबूत होंगे तो वे खुद ऐसे कानून बनाने की मांग करेंगे जिससे कि उनके खिलाफ हो रहे भेदभाव को समाप्त किया जा सके। इस प्रकार आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक हर प्रकार से इस तबके का विकास किया जाना अनिवार्य है जिससे की अस्पृश्यता जैसी कुरीतियां खुद ब खुद समाप्त हो जाएंगी।

निष्कर्ष

उम्मीद है आपको Untouchability Meaning in Hindi से जुड़ी पूरी जानकारी समझ आ गई होगी। हमारे समाज में अनेक तरह की सामाजिक कुरीतियां विद्यमान रही हैं, जैसे कि बाल विवाह, विधवा विवाह ना होने देना, स्ती प्रथा देवदासी प्रथा इत्यादि। इनमें से कुछ समाप्त हो चुकी हैं लेकिन अस्पृश्यता जैसी समस्या आज भी बनी हुई है।जिसके उन्मूलन पर ध्यान दिया जाना अनिवार्य है। सामाजिक प्राणी होने के नाते एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से इतना ज्यादा भेदभाव नहीं कर सकता कि वह उसे छूने से भी बचने लगे। इसलिए हमारे भारत में छुआछूत को समाप्त करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 17 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत में अस्पृश्यता पूर्ण रुप से निषेध है और यदि कोई इसे व्यवहार में लाता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। 



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